भारतीय सशस्त्र बलों (Indian Armed Forces) में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और सेना को युवा व आधुनिक बनाने के उद्देश्य से लाई गई 'अग्निपथ योजना' (Agnipath Scheme) में जल्द ही एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। देश की सरहदों पर सीना तानकर खड़े अग्निवीरों (Agniveers) के लिए यह खबर किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है।
\r\n\r\nअक्सर यह बहस का मुद्दा रहा है कि 4 साल के लिए भर्ती होने वाले अग्निवीर अगर ड्यूटी के दौरान देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देते हैं, तो उनके परिवार का क्या होगा? अब इसी चिंता को दूर करने के लिए केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) एक नई और बेहद सम्मानजनक योजना पर काम कर रहे हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के लिए जान कुर्बान करने वाले अग्निवीरों को नियमित (Regular) सैनिकों के बराबर सम्मान और उनके परिवार को आजीवन आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।
\r\n\r\nरेगुलर जवानों जैसा सम्मान: क्या है नया प्रस्ताव?
\r\n\r\nहाल ही में रक्षा मंत्रालय से संबंधित संसदीय स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee on Defence) ने सरकार को कुछ बेहद अहम और मजबूत सिफारिशें सौंपी हैं। इन सिफारिशों के केंद्र में अग्निवीर और उनके परिवार का भविष्य है।
\r\n\r\nसूत्रों के अनुसार, इस नए प्रस्ताव में तीन सबसे प्रमुख बातें शामिल हैं:
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- \r\n शहीद (Martyr) का आधिकारिक दर्जा: अब तक ड्यूटी पर जान गंवाने वाले अग्निवीरों को तकनीकी रूप से 'शहीद' या 'बैटल कैजुअल्टी' (Battle Casualty) के वे सभी दर्जे प्राप्त नहीं थे, जो एक नियमित सैनिक को मिलते हैं। नए प्रस्ताव के लागू होते ही, सर्वोच्च बलिदान देने वाले हर अग्निवीर को आधिकारिक रूप से 'शहीद' का दर्जा दिया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n पारिवारिक पेंशन (Family Pension): शहादत के बाद शहीद सैनिक की पत्नी या माता-पिता को जीवन यापन के लिए आजीवन पेंशन (Pension) देने का प्रावधान किया जा रहा है, ताकि उन्हें किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े।\r\n \r\n
- \r\n अनुकंपा के आधार पर नौकरी (Compassionate Job): देश के लिए जान देने वाले अग्निवीर के आश्रित (पत्नी, भाई या बच्चे) को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाएगी, ठीक वैसे ही जैसे रेगुलर सैनिकों के परिवारों को मिलती है।\r\n \r\n
वर्तमान में अग्निवीरों को क्या-क्या मिलता है? (Current Rules)
\r\n\r\nयह समझना बहुत जरूरी है कि आखिर इस नए बदलाव की मांग क्यों उठी और वर्तमान में नियम क्या कहते हैं।
\r\n\r\nमौजूदा अग्निपथ योजना के नियमों के अनुसार, अगर 4 साल के सेवाकाल के दौरान किसी अग्निवीर की शहादत होती है, तो:
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- \r\n परिवार को कोई पारिवारिक पेंशन (Family Pension) नहीं मिलती है।\r\n \r\n
- \r\n आश्रितों को सेना या सरकार में नौकरी देने का कोई सीधा प्रावधान नहीं है।\r\n \r\n
- \r\n पूर्व सैनिकों को मिलने वाली कैंटीन (CSD Canteen) और मेडिकल सुविधाएं (ECHS) शहादत के बाद परिवार को नहीं दी जाती हैं।\r\n \r\n
- \r\n क्या मिलता है? वर्तमान में, शहीद अग्निवीर के परिवार को दो अलग-अलग बीमा योजनाओं (Insurance Schemes) और अनुग्रह राशि को मिलाकर लगभग 1 करोड़ रुपये से 1.25 करोड़ रुपये तक की एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जाती है। साथ ही बचे हुए सेवाकाल का वेतन दिया जाता है।\r\n \r\n
"गोली रेगुलर और अग्निवीर में फर्क नहीं करती"
\r\n\r\nसंसदीय समिति ने अपनी सिफारिशों में बहुत ही भावुक और तार्किक बात रखी है। समिति का मानना है कि जब एक अग्निवीर और एक रेगुलर सैनिक सीमा पर कंधे से कंधा मिलाकर लड़ते हैं, तो दुश्मन की गोली यह देखकर नहीं आती कि सामने वाला 4 साल के लिए भर्ती हुआ है या 15 साल के लिए। दोनों का खून देश की मिट्टी के लिए समान रूप से गिरता है।
\r\n\r\nऐसे में, शहादत के बाद उनके परिवारों के साथ होने वाले बर्ताव या मिलने वाली सुविधाओं में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। इस सिफारिश ने पूरे देश और सेना के पूर्व अधिकारियों का दिल जीत लिया है। रक्षा मंत्रालय (MoD) भी इस सिफारिश को लेकर बेहद सकारात्मक और गंभीर है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इसे कैबिनेट की मंजूरी मिल जाएगी।
\r\n\r\nअग्निपथ योजना: एक नजर आंकड़ों पर
\r\n\r\nअग्निपथ योजना को वर्ष 2022 में लॉन्च किया गया था। इस योजना के तहत 17.5 साल से 21 साल तक के युवाओं को 4 साल के लिए सेना (थलसेना, वायुसेना और नौसेना) में भर्ती किया जाता है।
\r\n\r\nयुवाओं के मनोबल पर क्या होगा असर?
\r\n\r\nअगर सरकार इस प्रस्ताव को अपनी अंतिम मंजूरी दे देती है, तो इसका सबसे बड़ा असर देश के उन लाखों युवाओं पर पड़ेगा जो सेना में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
\r\n\r\nकई युवाओं के मन में यह झिझक रहती थी कि 4 साल की नौकरी में अगर उन्हें कुछ हो गया, तो उनके माता-पिता या परिवार का सहारा कौन बनेगा। पेंशन और सरकारी नौकरी की गारंटी मिलने से युवाओं का मनोबल (Morale) सातवें आसमान पर होगा। इससे सेना को और भी ज्यादा जुनूनी, निडर और देश के लिए मर-मिटने वाले वीर जवान मिलेंगे।
\r\n\r\nएक राष्ट्र के रूप में यह हमारा परम कर्तव्य है कि जो सैनिक हमारी रातों की नींद के लिए अपनी जान दांव पर लगाते हैं, हम उनके परिवारों की जिम्मेदारी लें। अग्निवीरों को शहीद का दर्जा और उनके परिवार को स्थायी आर्थिक सुरक्षा देने का यह संभावित फैसला भारतीय सेना के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। अब हर किसी की निगाहें रक्षा मंत्रालय की उस फाइनल मुहर पर टिकी हैं, जो इन सिफारिशों को हकीकत में बदल देगी।
\r\n\r\n(सेना और अग्निपथ योजना से जुड़े हर नए और सटीक अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहें।)
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