घरेलू एलपीजी सिलेंडर (LPG Cylinder) की कीमतों में रविवार को 29 रुपये का इजाफा होने के बाद देश भर में विपक्ष और आम जनता ने सरकार पर जोरदार हमला बोला है। हालांकि, भारी आलोचना के बीच केंद्र सरकार ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता और पेट्रोलियम कंपनियों के भारी-भरकम घाटे का हवाला दिया है। सरकार का दावा है कि इतनी बढ़ोतरी के बावजूद भारत में रसोई गैस की कीमतें अमेरिका, कनाडा जैसे विकसित देशों और पाकिस्तान, श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों की तुलना में काफी कम हैं।Read also:-   LPG Price Hike: आम आदमी को महंगाई का बड़ा झटका! रसोई गैस सिलेंडर 29 रुपये हुआ महंगा, जानें नई कीमतें
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आम आदमी के रसोई बजट पर सीधा प्रहार

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रविवार की सुबह आम आदमी के लिए महंगाई की एक नई खबर लेकर आई। केंद्र सरकार और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में अचानक 29 रुपये की वृद्धि कर दी है। महंगाई के इस दौर में जहां खाद्य पदार्थों की कीमतें पहले से ही आसमान छू रही हैं, वहां रसोई गैस के दामों में इस बढ़ोतरी ने सीधे तौर पर मध्यम वर्गीय और गरीब परिवारों के मासिक बजट को हिला कर रख दिया है।
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जैसे ही यह खबर फैली, सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सरकार के इस फैसले की तीखी आलोचना शुरू हो गई। विवाद को बढ़ता देख केंद्र सरकार ने रविवार देर शाम एक विस्तृत बयान जारी कर इस बढ़ोतरी का बचाव किया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह मूल्य वृद्धि किसी मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और देश की पेट्रोलियम कंपनियों को दिवालिया होने से बचाने के लिए एक 'मजबूरी में उठाया गया कदम' है।
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कीमतों का पूरा गणित: कैसे 942 रुपये तक पहुंचा सिलेंडर?

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यह मूल्य वृद्धि कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि पिछले कुछ समय से गैस की कीमतों में लगातार हो रहे बदलावों की एक कड़ी है। आइए समझते हैं कि हाल के दिनों में गैस के दाम कैसे बढ़े हैं:
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    ताजा बढ़ोतरी: रविवार को घरेलू एलपीजी सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) की कीमत में 29 रुपये की सीधी बढ़ोतरी की गई।
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    मार्च में हुई थी वृद्धि: इससे ठीक पहले इसी साल 7 मार्च को भी रसोई गैस के दामों में 60 रुपये प्रति सिलेंडर का इजाफा किया गया था।
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    कुल इजाफा: अगर पिछले कुछ महीनों के आंकड़ों को जोड़ें, तो रसोई गैस सिलेंडर के दाम कुल मिलाकर 89 रुपये बढ़ चुके हैं।
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    राजधानी दिल्ली के नए रेट: इस नई बढ़ोतरी के बाद, देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत जो पहले 913 रुपये थी, वह अब बढ़कर 942 रुपये हो गई है।
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यह आंकड़ा 1000 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब पहुंच गया है, जो आम उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।
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सरकार का बचाव: वैश्विक तुलना में भारत की स्थिति

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आलोचनाओं का जवाब देते हुए सरकार ने एक तुलनात्मक रिपोर्ट पेश की है। सरकार का मुख्य तर्क यह है कि वैश्विक महंगाई के इस दौर में भारत सरकार ने अपने नागरिकों को काफी हद तक सुरक्षित रखा है। बयान में कहा गया है कि:
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    पड़ोसी देशों से तुलना: भारत में घरेलू एलपीजी की मौजूदा कीमतें पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों की तुलना में आज भी काफी कम हैं।
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    विकसित देशों से तुलना: केवल विकासशील देश ही नहीं, बल्कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे दुनिया के सबसे ताकतवर और विकसित देशों में भी गैस की कीमतें भारत के मुकाबले कहीं अधिक हैं।
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सरकार यह संदेश देना चाहती है कि विश्व स्तर पर ऊर्जा संकट गहराया हुआ है, लेकिन भारत सरकार अपनी नीतियों के माध्यम से इस झटके को आम जनता तक पहुंचने से रोकने की पूरी कोशिश कर रही है।
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पेट्रोलियम कंपनियों का खजाना खाली: प्रति सिलेंडर 703 रुपये का भारी नुकसान

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सरकार ने इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया है कि आम उपभोक्ता आज भी गैस सिलेंडर की 'असली कीमत' नहीं चुका रहे हैं। एक 14.2 किलो के गैस सिलेंडर को विदेश से मंगाने, उसे रिफाइन करने, बॉटलिंग करने और उपभोक्ता के घर तक पहुंचाने की वास्तविक लागत इस समय 1,600 रुपये के पार जा चुकी है।
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    कंपनियों का घाटा: जब एक आम उपभोक्ता दिल्ली में 942 रुपये का भुगतान करता है, तो बाकी बची हुई रकम पेट्रोलियम विपणन कंपनियों (जैसे- इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम) और सरकार को अपनी जेब से भरनी पड़ती है। आज की 29 रुपये की वृद्धि के बावजूद, सार्वजनिक क्षेत्र की इन पेट्रोलियम कंपनियों को प्रत्येक सिलेंडर की बिक्री पर 703 रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है।
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    बढ़ता आर्थिक बोझ: सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, घरेलू एलपीजी पर सब्सिडी और अंडर-रिकवरी के कारण कंपनियों का नुकसान पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर लगभग 60,000 करोड़ रुपये हो गया था। यह आंकड़ा एक साल पहले 41,338 करोड़ रुपये था।
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    राहत पैकेज (Bailout): इन कंपनियों को इस भारी आर्थिक संकट से उबारने और उनके संचालन को सुचारू बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में पेट्रोलियम कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति (Compensation) देने की मंजूरी दी है।
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अंतरराष्ट्रीय कारण: 'सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस' और भू-राजनीतिक तनाव का खेल

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भारत अपनी एलपीजी की जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा आयात (Import) करता है। इसलिए, अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली कोई भी हलचल सीधे भारतीय रसोई को प्रभावित करती है। सरकार ने इस मूल्य वृद्धि के पीछे दो बड़े अंतरराष्ट्रीय कारण बताए हैं:
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    पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव: पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे युद्ध और कूटनीतिक तनाव ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को बुरी तरह बाधित कर दिया है।
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    होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का संकट: यह जलमार्ग दुनिया के तेल और गैस व्यापार का सबसे अहम रास्ता है। यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने से मालभाड़ा (Freight charges) और बीमा की लागत (Insurance cost) कई गुना बढ़ गई है।
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    सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में उछाल: एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों का निर्धारण करने वाले वैश्विक बेंचमार्क, जिसे 'सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस' (Saudi Contract Price) कहा जाता है, में इस साल फरवरी के बाद से लगभग 46 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। यही वह मुख्य कारण है जिसने भारत में गैस की खरीद लागत को 1600 रुपये के पार पहुंचा दिया है।
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प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों पर क्या होगा असर?

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गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाली महिलाओं के लिए शुरू की गई 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' के लाभार्थियों के लिए सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है।
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    सब्सिडी का गणित: इन लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सीधी सब्सिडी उनके बैंक खातों में दी जाती है।
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    प्रभावी कीमत: इस सब्सिडी को घटाने के बाद, उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए 14.2 किलो वाले सिलेंडर की प्रभावी कीमत 642 रुपये (942 - 300) रह जाएगी।
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    नियमों में बदलाव: हालांकि, यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पिछले साल सरकार ने यह 300 रुपये की सब्सिडी साल भर में 'नौ बार' (9 सिलेंडरों पर) देने की घोषणा की थी। लेकिन अब जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह सब्सिडी साल में केवल चार बार (4 सिलेंडरों पर) ही उपलब्ध होगी। इसके बाद लिए जाने वाले सिलेंडरों पर उन्हें आम उपभोक्ताओं की तरह पूरी कीमत (942 रुपये) चुकानी होगी।
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विपक्ष का तीखा प्रहार: "दिशाहीन सरकार की किश्तों वाली महंगाई"

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कीमतों में इस वृद्धि ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक मजबूत राजनीतिक हथियार दे दिया है। समाजवादी पार्टी (SP) के वरिष्ठ नेता और सांसद राजीव राय ने इस बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है।
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उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, "पश्चिम बंगाल चुनावों के दौरान भी मैंने यह स्पष्ट रूप से कहा था कि यह एक ऐसी सरकार है जो केवल सही मौके का इंतजार करती है। जैसे ही चुनाव खत्म होते हैं, कीमतें तेजी से बढ़ना शुरू हो जाती हैं। वे एक साथ दाम नहीं बढ़ाते, बल्कि इसे किश्तों में, दिन-प्रतिदिन बढ़ाते जाएंगे ताकि जनता विरोध न कर सके। यह पूरी तरह से एक दिशाहीन सरकार है, जिसके पास कोई दूरदृष्टि (Vision), कोई ठोस रणनीति और कोई योजना नहीं है। सरकार की इस आर्थिक नाकामी का खामियाजा आज पूरा देश और आम आदमी भुगत रहा है।"
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विपक्ष का सीधा आरोप है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार के बहानों के पीछे छिपकर आम जनता की जेब काट रही है और चुनावों के दौरान राजनीतिक लाभ लेने के लिए अस्थाई रूप से कीमतों को रोक कर रखती है।
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घरेलू गैस की कीमतों में हुई यह 29 रुपये की वृद्धि एक तरफ जहां आम आदमी के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार और पेट्रोलियम कंपनियों के लिए यह एक आर्थिक मजबूरी बन चुकी है। वैश्विक बाजार की अनिश्चितताएं, भू-राजनीतिक तनाव और 703 रुपये प्रति सिलेंडर का भारी-भरकम नुकसान—ये सभी कारक भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 'सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस' में कोई नरमी आती है या आम आदमी को महंगाई के और भी झटके सहने के लिए तैयार रहना होगा।
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