राष्ट्रीय डेस्क, नई दिल्ली:
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वैश्विक पटल पर बदलते राजनीतिक और सैन्य घटनाक्रमों का असर सीधा हमारी रसोई के बजट पर पड़ता है। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में थमा युद्ध एक बार फिर भड़क उठा है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी देखी जाने लगी है। इस नाजुक स्थिति के बीच भारतीय तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने आज 15 जुलाई 2026 के लिए एलपीजी गैस सिलेंडरों के ताजा दाम जारी कर दिए हैं।
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​गनीमत यह है कि वैश्विक संकट के बावजूद आज भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया है। घरेलू रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) और कमर्शियल गैस (19 किलोग्राम) दोनों ही सिलेंडरों की कीमतें पिछले स्तर पर बरकरार हैं।
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पिछले महीनों में क्या हुए थे बदलाव? (Previous Rate Trends)

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​भारतीय बाजारों में पिछले कुछ समय से गैस सिलेंडरों की कीमतों में निम्नलिखित बदलाव दर्ज किए गए हैं:
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    ​कमर्शियल सिलेंडर (19 kg): व्यावसायिक उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए बीते 1 जुलाई को इसके दामों में 183.50 रुपये की बड़ी कटौती की गई थी।
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    ​घरेलू रसोई गैस (14.2 kg): आम परिवारों के रसोई बजट को प्रभावित करने वाले इस सिलेंडर की कीमत आखिरी बार 7 जून को 29 रुपये बढ़ाई गई थी। तब से लेकर अब तक इसके दाम जस के तस बने हुए हैं।
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देश के प्रमुख शहरों में गैस सिलेंडर के लाइव रेट (City-Wise Rates on 15 July 2026)

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​स्थानीय स्तर पर लगने वाले टैक्स, माल ढुलाई और अन्य शुल्कों के कारण देश के अलग-अलग शहरों में एलपीजी सिलेंडरों के दाम अलग-अलग होते हैं। नीचे दी गई तालिका में आज के ताजा रेट देखें:
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शहर का नाम (City)
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घरेलू सिलेंडर (14.2 kg)
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कमर्शियल सिलेंडर (19 kg)
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नई दिल्ली (New Delhi)
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₹ 942.00
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₹ 2,930.00
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मुंबई (Mumbai)
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₹ 941.50
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₹ 2,885.50
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हैदराबाद (Hyderabad)
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₹ 934.00
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₹ 2,052.50 (सबसे सस्ता)
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चंडीगढ़ (Chandigarh)
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₹ 951.50
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₹ 2,954.50
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तिरुपति / तिरुवनंतपुरम
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₹ 951.00
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₹ 2,970.50
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चेन्नई (Chennai)
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₹ 957.50
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₹ 3,106.00
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देहरादून (Dehradun)
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₹ 961.00
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₹ 2,983.50
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कोलकाता (Kolkata)
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₹ 968.00
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₹ 3,082.00
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भुवनेश्वर (Bhubaneswar)
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₹ 968.00
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₹ 3,115.00
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विशेष नोट: इस सूची में सबसे बड़ी राहत तेलंगाना के हैदराबाद शहर को मिली है, जहां कमर्शियल सिलेंडर देश में सबसे सस्ता यानी ₹2,052.50 में मिल रहा है, और घरेलू सिलेंडर भी मात्र ₹934 में उपलब्ध है।
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अमेरिका और ईरान के बीच क्यों भड़का तनाव? (US-Iran Conflict Details)

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​पश्चिम एशिया (Middle East) में शांति की कोशिशों को एक बार फिर तगड़ा झटका लगा है। केवल तीन हफ्तों का युद्ध विराम पूरी तरह से टूट चुका है और हालात बेहद गंभीर हो गए हैं।
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    ​अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी: अमेरिकी सेना ने ईरान के प्रमुख समुद्री व्यापारिक रास्तों को चारों तरफ से घेर लिया है।
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    ​ईरान का पलटवार: इसके जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर एक के बाद एक कई मिसाइलें दाग दी हैं।
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    ​कच्चे तेल में उछाल: दोनों महाशक्तियों के बीच सीधे टकराव की स्थिति बनने से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति ठप होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें अचानक से उछलने लगी हैं।
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भारत पर क्या होगा इसका असर? (Impact on India)
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​यह युद्ध केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की पूरी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा इससे सीधे तौर पर खतरे में पड़ सकती है।
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    ​होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) ब्लॉक: भारत अपनी आवश्यकता का अधिकांश कच्चा तेल और एलपीजी गैस शिपमेंट इसी पतले समुद्री रास्ते से मंगवाता है। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण फिलहाल यह समुद्री मार्ग पूरी तरह से ब्लॉक (बंद) है।
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    ​लंबा और महंगा समुद्री रास्ता: यदि यह तनाव कुछ और दिनों तक खिंचता है, तो भारतीय तेल जहाजों को अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' (Cape of Good Hope) से घूमकर आना पड़ेगा। यह चक्कर बहुत लंबा है, जिससे माल ढुलाई का समय कई हफ्ते बढ़ जाएगा।
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    ​बढ़ेगा महंगाई का बोझ: लंबा चक्कर लगाने के कारण न केवल ईंधन का खर्च बढ़ेगा, बल्कि समुद्री बीमा (Marine Insurance) की दरें भी आसमान छू लेंगी। विशेषज्ञों की मानें तो यदि होर्मुज जलडमरूमध्य का गतिरोध जल्द हल नहीं हुआ, तो आने वाले कुछ ही हफ्तों में भारत में एलपीजी गैस, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है।
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​अंतिम सलाह: हालांकि आज तेल कंपनियों ने राहत दी है, लेकिन आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ने के पूरे आसार दिख रहे हैं। इसलिए उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने बजट का नियोजन उसी हिसाब से करें।
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