नई दिल्ली: जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) या युद्ध होता है, तो आम आदमी सबसे पहले पेट्रोल-डीजल या रसोई गैस के महंगे होने की चिंता करता है। लेकिन वर्तमान में मिडिल-ईस्ट (Middle-East) में जो हालात बन रहे हैं, उसने एक बिल्कुल नई और अप्रत्याशित समस्या को जन्म दे दिया है। महंगाई की जो आंच अब तक आपकी रसोई और सफर तक सीमित थी, वह अब आपके बेडरूम तक पहुंचने वाली है।READ ALSO:-महंगाई का 'ट्रिपल अटैक'! दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी की कीमतों में लगी आग, नोएडा में ₹90 के करीब पहुंचे दाम
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ईरान में चल रहे युद्ध और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के बाधित होने से ग्लोबल सप्लाई चेन (Global Supply Chain) पूरी तरह चरमरा गई है। इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उछाल आया है। इस वैश्विक संकट का असर अब रबर और लेटेक्स इंडस्ट्री पर पड़ रहा है, जिसका सीधा मतलब है कि भारत में जल्द ही कंडोम (Condoms) की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
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मैनकाइंड फार्मा (Mankind Pharma) का बड़ा अलर्ट
\r\n\r\nभारत में 'मैनफोर्स' (Manforce) ब्रांड के तहत सबसे ज्यादा बिकने वाले कंडोम बनाने वाली जानी-मानी कंपनी मैनकाइंड फार्मा ने इस आसन्न संकट को लेकर बाजार और ग्राहकों को आगाह किया है।
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कंपनी के सीईओ (CEO) शीतल अरोड़ा ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स (Reuters) को दिए एक इंटरव्यू में स्पष्ट संकेत दिया है कि मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष अगर जल्द नहीं थमता है और कच्चे तेल की कीमतें अपने मौजूदा उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो कंडोम की उत्पादन लागत (Production Cost) का बोझ आखिरकार ग्राहकों के कंधों पर ही डालना पड़ेगा।
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\r\n\r\n\r\n"फिलहाल हमारे पास अगले कुछ महीनों की घरेलू डिमांड को पूरा करने के लिए पर्याप्त इन्वेंट्री और स्टॉक मौजूद है। लेकिन यह एक अस्थायी राहत है। अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और सप्लाई-चेन में आ रही रुकावटें दूर नहीं होती हैं, तो मैनकाइंड को आखिरकार बढ़ी हुई इनपुट लागत (Input Cost) का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालना ही पड़ेगा।" - शीतल अरोड़ा, CEO, मैनकाइंड फार्मा\r\n
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कच्चे तेल और कंडोम का क्या है कनेक्शन? (विज्ञान और अर्थशास्त्र)
\r\n\r\nआम तौर पर लोगों के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि कच्चे तेल (Crude Oil) का कंडोम से क्या लेना-देना है? कंडोम तो मुख्य रूप से पेड़ों से निकलने वाले प्राकृतिक लेटेक्स (Natural Latex) से बनते हैं। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं कि एक कंडोम के निर्माण से लेकर उसकी पैकेजिंग तक तेल क्यों इतना जरूरी है:
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- \r\n लुब्रिकेंट्स (Lubricants): कंडोम को इस्तेमाल के लायक बनाने के लिए जिन लुब्रिकेंट्स (जैसे सिलिकॉन ऑयल - Silicone Oil) का भारी मात्रा में उपयोग किया जाता है, वे पूरी तरह से पेट्रोलियम-बेस्ड (Petroleum-based) उत्पाद होते हैं।\r\n \r\n
- \r\n पैकेजिंग मटेरियल (Packaging Material): कंडोम की सुरक्षा और हाइजीन बनाए रखने के लिए जिस एल्युमिनियम फॉइल (Aluminum Foil) और प्लास्टिक रैपर का इस्तेमाल होता है, उसकी पूरी उत्पादन प्रक्रिया कच्चे तेल और रिफाइनरी बाय-प्रोडक्ट्स पर निर्भर है।\r\n \r\n
- \r\n सिंथेटिक रबर (Synthetic Rubber): लेटेक्स से एलर्जी वाले लोगों के लिए जो विशेष कंडोम (पॉलीयूरेथेन या नाइट्राइल) बनाए जाते हैं, वे पूरी तरह से सिंथेटिक रबर से बनते हैं, जो पेट्रोकेमिकल उद्योग की ही देन है।\r\n \r\n
- \r\n लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट (Logistics): इसके अलावा कच्चे माल को फैक्ट्रियों तक लाने और तैयार माल को दुनिया भर के बाजारों में पहुंचाने का खर्च (Freight Cost) सीधे तौर पर ईंधन की कीमतों से जुड़ा होता है।\r\n \r\n
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मौजूदा कीमतें और भविष्य का अनुमान (Price Analysis)
\r\n\r\nभारत में मैनफोर्स (Manforce) को सबसे किफायती और आम आदमी की पहुंच वाले कंडोम ब्रांडों में गिना जाता है। यदि कंपनियां अपनी लागत का 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा भी ग्राहकों पर ट्रांसफर करती हैं, तो कीमतों में सीधा उछाल देखने को मिलेगा।
\r\n\r\n| \r\n ब्रांड / पैक साइज \r\n | \r\n \r\n वर्तमान औसत कीमत \r\n | \r\n \r\n अनुमानित बढ़ोतरी के बाद (संभावित) \r\n | \r\n
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| \r\n मैनफोर्स (10 कंडोम का पैक) \r\n | \r\n \r\n ₹100 - ₹150 \r\n | \r\n \r\n ₹130 - ₹180 \r\n | \r\n
| \r\n ड्यूरेक्स / अन्य प्रीमियम (10 पैक) \r\n | \r\n \r\n ₹200 - ₹250 \r\n | \r\n \r\n ₹260 - ₹320 \r\n | \r\n
(नोट: यह एक अनुमानित आंकड़ा है जो कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के आगामी फैसलों पर निर्भर करेगा।)
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ग्लोबल मार्केट का हाल: मलेशियाई कंपनी ने बढ़ाए 30% दाम
\r\n\r\nयह समस्या सिर्फ भारत या मैनकाइंड फार्मा तक सीमित नहीं है। दुनिया की सबसे बड़ी कंडोम मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में से एक, मलेशिया की 'कैरेक्स' (Carex) ने पहले ही अपने दामों में भारी इजाफा कर दिया है।
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कैरेक्स वह कंपनी है जो दुनिया भर में ड्यूरेक्स (Durex) सहित कई नामी ग्लोबल ब्रांड्स के लिए कंडोम की सप्लाई करती है। पिछले महीने ही कैरेक्स ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया था कि मिडिल-ईस्ट में तनाव और सप्लाई-चेन में आई भयंकर रुकावटों के कारण वे अपने उत्पादों की कीमतों में 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर रहे हैं।
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28 फरवरी के बाद से बिगड़े हालात: 28 फरवरी को जबसे मिडिल-ईस्ट में नया संघर्ष शुरू हुआ है, तब से कैरेक्स ने अपनी पूरी सप्लाई-चेन (Supply Chain) में लागत में भारी बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी के मुताबिक:
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- \r\n कंडोम बनाने में इस्तेमाल होने वाले सिंथेटिक रबर और नाइट्राइल (Nitrile) की कीमतें आसमान छू रही हैं।\r\n \r\n
- \r\n पैकेजिंग मटेरियल, विशेषकर एल्युमिनियम फॉइल के दाम दोगुने हो गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n मशीनों और कंडोम में इस्तेमाल होने वाले सिलिकॉन ऑयल (Silicone Oil) की भारी शॉर्टेज पैदा हो गई है।\r\n \r\n
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100 डॉलर के पार निकला कच्चा तेल (Energy Crisis)
\r\n\r\nइन सभी समस्याओं की जड़ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बेतहाशा बढ़ती कीमतें हैं। जब से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (दुनिया का 20% से ज्यादा तेल यहीं से गुजरता है) पर संकट के बादल मंडराए हैं और युद्ध ने जोर पकड़ा है, तब से ऑयल मार्केट में हाहाकार मचा हुआ है।
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आंकड़ों पर गौर करें तो 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत का भारी-भरकम उछाल आ चुका है। तेल की कीमतें अब 100 डॉलर प्रति बैरल ($100/Barrel) के खतरनाक स्तर को पार कर गई हैं। जब तक कच्चे तेल के दाम इस स्तर पर बने रहेंगे, तब तक दुनिया भर की निर्माण कंपनियों के लिए अपने उत्पाद पुरानी कीमतों पर बेचना आर्थिक रूप से असंभव हो जाएगा।
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मिडिल-ईस्ट का यह युद्ध साफ तौर पर यह दर्शाता है कि आज की ग्लोबल इकोनॉमी (Global Economy) किस कदर एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। हजारों किलोमीटर दूर हो रहे धमाकों की गूंज और वहां बंद हो रहे समुद्री रास्तों का असर भारत के दूर-दराज के गांवों और शहरों के मेडिकल स्टोर्स तक पहुंच रहा है। फिलहाल भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात सिर्फ इतनी है कि कंपनियों के पास कुछ महीनों का पुराना स्टॉक (Inventory) बचा हुआ है। लेकिन अगर अगले कुछ हफ्तों में वैश्विक तनाव कम नहीं होता है, तो सुरक्षित और स्वस्थ यौन जीवन (Safe Sex) के लिए लोगों को अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी ही पड़ेगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.