रिपोर्टर: शकील अहमद
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का योगी आदित्यनाथ बिजनौर दौरा कई मायनों में बेहद ऐतिहासिक और खास रहा। जिले के आलमपुर गावड़ी गांव में आयोजित एक भावुक और महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शिरकत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दशकों से न्याय की आस लगाए बैठे शरणार्थियों को उनका अधिकार सौंपा। उन्होंने साल 1947 में देश के विभाजन के दौरान पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आए 14 परिवारों को उनकी जमीनों का मालिकाना हक (Ownership Rights) प्रदान किया। यह एक ऐसा पल था जब पीढ़ियों का इंतजार खत्म हुआ। इसके साथ ही, मंच से अपने चिर-परिचित और सख्त अंदाज में मुख्यमंत्री ने गोकशी (Cow Slaughter) के मुद्दे पर स्पष्ट और कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने मौलवियों और गोतस्करों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि गाय हमारे लिए कोई पशु नहीं, बल्कि 'माता' है, और माता की हत्या करने वालों को भयंकर अंजाम भुगतना पड़ेगा।READ ALSO:-Gold Rate Today (1 June 2026): डॉलर की मजबूती से धड़ाम हुआ सोना, रिकॉर्ड ऊंचाई से फिसली कीमतें; चेक करें दिल्ली-मुंबई समेत बड़े शहरों के ताजा भाव
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योगी आदित्यनाथ बिजनौर: 7 दशकों का लंबा इंतजार हुआ खत्म

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बिजनौर जिले का ग्राम आलमपुर गावड़ी आज एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना। 1947 में जब भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुआ था, तब भारी हिंसा और उथल-पुथल के बीच कई परिवार अपनी जान और धर्म बचाकर भारत आ गए थे। इनमें से कई परिवारों ने उत्तर प्रदेश के बिजनौर और आसपास के इलाकों में शरण ली थी। वे दशकों से यहां रह रहे थे, खेती कर रहे थे, लेकिन सरकारी कागजों में उनके पास अपनी जमीन का कोई पुख्ता मालिकाना हक नहीं था। योगी आदित्यनाथ बिजनौर दौरे के दौरान इसी सबसे बड़ी समस्या का समाधान लेकर पहुंचे।
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मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से 14 विस्थापित परिवारों को जमीन के पट्टे और मालिकाना हक के दस्तावेज सौंपे। इस दौरान उन्होंने पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, "साल 1947 से इन परिवारों को केवल आश्वासन मिलता रहा। किसी भी सरकार ने इन विस्थापितों की पीड़ा को नहीं समझा और जमीनों का कोई मालिकाना हक इन्हें नहीं दिया। आज हमारी सरकार ने इन्हें इनका वास्तविक अधिकार देकर न्याय किया है।" मालिकाना हक मिलने से अब ये परिवार सरकारी योजनाओं, कृषि लोन और अन्य सुविधाओं का पूरी तरह से लाभ उठा सकेंगे।
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गाय पर मुख्यमंत्री का स्पष्ट रुख: 'पशु नहीं, मां है हमारी'

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जमीन के पट्टे बांटने के बाद अपने संबोधन में मुख्यमंत्री का रुख गोवंश की रक्षा को लेकर बेहद सख्त दिखा। हाल ही में किसी मौलवी द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिलाने की बात कहे जाने पर मुख्यमंत्री ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि कुछ लोगों के लिए गाय केवल एक पशु हो सकती है, लेकिन सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में गाय का दर्जा 'माता' का है।
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मुख्यमंत्री ने गरजते हुए कहा, "एक मौलवी गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिलाने की बात कर रहे हैं। मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि गाय हमारी माता है। एक मां और पुत्र के बीच रिश्ते की घोषणा करने की या किसी सर्टिफिकेट की कोई आवश्यकता नहीं होती है। तुम्हारे लिए वह सिर्फ एक पशु है, लेकिन हमारे लिए वह साक्षात मां का दर्जा रखती है।" इस बयान से उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि गोवंश की रक्षा उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है और इसे महज एक 'पशु' के नजरिए से देखना उनकी सरकार को कतई स्वीकार नहीं है। 
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गोकशी करने वालों को खुली और सख्त चेतावनी

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योगी आदित्यनाथ बिजनौर की जनसभा से गोतस्करों और अपराधियों को कड़ा संदेश देना नहीं भूले। उत्तर प्रदेश में गोकशी के खिलाफ पहले से ही सख्त कानून लागू हैं, लेकिन मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में इसे और भी कड़े शब्दों में दोहराया।
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उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "गौ माता की हत्या करने वाले अपने अंजाम के बारे में अच्छी तरह से सोच लें। योगी उनके साथ क्या करता है और क्या कर सकता है, यह किसी से छिपा नहीं है।" उनका यह बयान सीधे तौर पर उन अपराधियों और माफियाओं के लिए एक अल्टीमेटम था जो अब भी गोवंश की तस्करी या अवैध कटान में लिप्त हैं। प्रशासन को स्पष्ट निर्देश हैं कि ऐसे लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) और गैंगस्टर एक्ट जैसी कठोरतम धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए और उनकी संपत्तियों को कुर्क किया जाए। 
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पाकिस्तान पर मौलानाओं की चुप्पी पर उठाए तीखे सवाल

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कार्यक्रम के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रवाद और आतंकवाद के मुद्दे पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने देश में कुछ मौलानाओं और धार्मिक नेताओं के दोहरे रवैये पर कड़ा प्रहार किया। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और वहां अल्पसंख्यकों (हिंदुओं और सिखों) पर हो रहे अत्याचारों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने तीखा सवाल दागा।
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उन्होंने पूछा, "ये मौलाना हर छोटी-बड़ी बात पर अपनी राय रखते हैं और फतवे जारी करते हैं, लेकिन जब बात पाकिस्तान की आती है, तो ये मौलाना कभी पाकिस्तान की निंदा क्यों नहीं करते?" उन्होंने कहा कि जो देश भारत में आतंकवाद फैला रहा है और जिसने विभाजन के समय लाखों बेगुनाहों का खून बहाया, उसकी निंदा करने में इन मौलानाओं की जुबान क्यों बंद हो जाती है। यह सवाल उठाकर मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर उन तत्वों पर निशाना साधा जिनकी निष्ठा पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। (
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कुल मिलाकर, योगी आदित्यनाथ बिजनौर का यह दौरा राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से एक मजबूत लकीर खींच गया है। एक तरफ जहां उन्होंने 1947 से प्रताड़ित और उपेक्षित 14 शरणार्थी परिवारों को जमीन का मालिकाना हक देकर 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे को चरितार्थ किया, वहीं दूसरी तरफ गोकशी और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर अपना आक्रामक रुख बरकरार रखा। रिपोर्टर शकील अहमद के अनुसार, इस कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़ और लोगों का उत्साह यह बता रहा था कि मुख्यमंत्री के इस कदम और कड़े बयानों का स्थानीय जनता पर गहरा प्रभाव पड़ा है। विस्थापित परिवारों के चेहरों पर जो खुशी आज दिखाई दी, वह दशकों के लंबे और दर्दनाक इंतजार के बाद न्याय मिलने की सच्ची गवाही थी।
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर के आलमपुर गावड़ी गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में 1947 के विभाजन के दौरान पाकिस्तान से आए 14 शरणार्थी परिवारों को उनकी जमीन का मालिकाना हक सौंपा। दशकों बाद अपना अधिकार पाकर परिवार भावुक नजर आए। इस अवसर पर सीएम योगी ने गोकशी के मुद्दे पर सख्त रवैया अपनाते हुए कहा कि गाय हमारी माता है, कोई पशु नहीं, और इसकी हत्या करने वालों को भयंकर अंजाम भुगतना होगा। साथ ही, उन्होंने पाकिस्तान की करतूतों पर मौलानाओं की चुप्पी पर भी तीखे सवाल उठाए।
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