बिजनौर (ग्राउंड रिपोर्ट: शकील अहमद): भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में 'गौ माता' (Cow) का स्थान सर्वोच्च और अद्वितीय है। वेदों से लेकर पुराणों तक, गाय को केवल एक पशु नहीं बल्कि 'विश्व की माता' (गावो विश्वस्य मातरः) माना गया है। इसी शाश्वत सत्य को आधुनिक भारत के संविधान और समाज में स्थापित करने के लिए एक बहुत बड़ा राष्ट्रव्यापी आंदोलन चल रहा है।READ ALSO:-लखनऊ में महा-त्रासदी: अलीगंज की कोचिंग बिल्डिंग में भड़की भीषण आग, 14 छात्रों की दर्दनाक मौत; दौरा छोड़ तुरंत वापस लौटे CM योगी
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इस महा-अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं ज्योतिष्पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज। 'गौ माता को राष्ट्रीय माता' (National Mother) घोषित करने की अपनी इस अटूट मुहिम के तहत शंकराचार्य महाराज जब अपने प्रवास के दौरान उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक जिले बिजनौर (Bijnor) पहुंचे, तो वहां का नजारा देखते ही बनता था। सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा और शंख-घड़ियालों की गूंज के बीच महाराज का ऐसा भव्य स्वागत हुआ, जिसकी चर्चा आज पूरे क्षेत्र में हो रही है।
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पुष्प वर्षा, जयकारे और भक्तिमय हुआ बिजनौर का माहौल

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जैसे ही जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का काफिला बिजनौर की सीमा में दाखिल हुआ, वहां पहले से मौजूद हजारों श्रद्धालुओं और समर्थकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। इस स्वागत समारोह की सबसे खास बात यह रही कि इसका नेतृत्व समाजवादी पार्टी (SP) के युवा और तेजतर्रार नेता अनुज मलिक कर रहे थे।
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अनुज मलिक और उनके सैकड़ों समर्थकों ने महाराज के रथ के आगे और पूरे मार्ग पर मीलों तक गुलाब और गेंदे के फूलों की बारिश की। "गौ माता की जय", "धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो" और "जगद्गुरु शंकराचार्य की जय" के गगनभेदी नारों से बिजनौर का पूरा आसमान गुंजायमान हो उठा।
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महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने सड़क के दोनों ओर कतारबद्ध होकर महाराज के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। वातावरण में गूंजते वैदिक मंत्रोच्चार और ढोल-नगाड़ों की थाप ने पूरे शहर को एक आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। यह नजारा इस बात का प्रमाण था कि जब बात आस्था और गौ माता के सम्मान की आती है, तो पूरा समाज एकजुट होकर खड़ा हो जाता है।
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सपा नेता अनुज मलिक का बड़ा बयान: "गौ माता हमारी संस्कृति का आधार हैं"

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राजनीतिक मंचों से इतर, एक धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान में समाजवादी पार्टी के नेता की यह सक्रिय और भव्य भागीदारी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। जगद्गुरु शंकराचार्य का आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद, मीडिया से रूबरू होते हुए सपा नेता अनुज मलिक ने बेहद प्रभावशाली और स्पष्ट विचार रखे।
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अनुज मलिक ने अपनी 'बाइट' में कहा:

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"गौ माता केवल किसी एक धर्म या वर्ग की नहीं हैं, बल्कि वे संपूर्ण भारतीय संस्कृति और कृषि प्रधान देश की आत्मा हैं। बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। आज जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज ने गौ माता को 'राष्ट्रीय माता' का दर्जा दिलाने का जो बीड़ा उठाया है, वह एक अत्यंत पुनीत और ऐतिहासिक कार्य है। हम सभी को राजनीतिक विचारधाराओं से ऊपर उठकर इस मुहिम को व्यापक जनसमर्थन देना चाहिए। आज बिजनौर की जनता ने महाराज का जो स्वागत किया है, वह इस बात का सबूत है कि इस मुहिम के साथ पूरा देश खड़ा है।"
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अनुज मलिक के इस बयान की स्थानीय लोगों और साधु-संत समाज द्वारा काफी सराहना की जा रही है। यह इस बात को भी दर्शाता है कि गौ-संरक्षण का मुद्दा अब दलगत राजनीति की सीमाओं को तोड़कर एक राष्ट्रीय चेतना का रूप ले रहा है।
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क्या है 'गौ माता को राष्ट्रीय माता' बनाने का यह राष्ट्रव्यापी अभियान?

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बिजनौर में उमड़े इस जनसैलाब को समझने के लिए, जगद्गुरु शंकराचार्य जी के इस देशव्यापी अभियान की गहराई को समझना बहुत जरूरी है।
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वर्तमान में भारत में कई जानवरों को राष्ट्रीय प्रतीक का दर्जा प्राप्त है (जैसे- बाघ राष्ट्रीय पशु है)। लेकिन, संतों और धर्माचार्यों का स्पष्ट मत है कि गाय को केवल एक 'पशु' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का स्पष्ट मानना है कि:
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    पशु नहीं, माता हैं: गाय हमें अपना दूध पिलाकर पालती है, इसलिए वह हमारी माता है। एक माता को 'पशु' कहना सनातन संस्कृति का अपमान है।
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    कानूनी संरक्षण (Legal Protection): यदि गौ माता को 'राष्ट्रीय माता' का संवैधानिक दर्जा मिल जाता है, तो पूरे देश में गौ हत्या पर पूर्ण और कठोरता से प्रतिबंध लग जाएगा। इससे गौ-तस्करी जैसे अपराधों पर हमेशा के लिए लगाम लगेगी।
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    आर्थिक और कृषि विकास: यह अभियान केवल धार्मिक नहीं है। जैविक खेती (Organic Farming) के लिए गाय का गोबर और गौमूत्र संजीवनी के समान हैं। गौ माता के संरक्षण से भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की स्थिति में अभूतपूर्व सुधार होगा।
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इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए महाराज जी नंगे पांव और रथ के माध्यम से पूरे देश का भ्रमण कर रहे हैं। वे गांव-गांव, शहर-शहर जाकर लोगों को गौ रक्षा का संकल्प दिला रहे हैं और उन्हें एक 'गौ-भक्त' के रूप में एकजुट कर रहे हैं।
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बिजनौर की जनता ने दिया पूर्ण समर्थन (Public Support)

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बिजनौर के प्रवास के दौरान, जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने एक विशाल धर्म सभा को भी संबोधित किया। उनके ओजस्वी और ज्ञानवर्धक प्रवचन को सुनने के लिए शहर और आसपास के देहात क्षेत्रों से भारी भीड़ उमड़ी।
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अपने संबोधन में महाराज ने कहा कि जब तक गौ माता को वह सम्मान नहीं मिल जाता जिसकी वह हकदार है, तब तक सनातन समाज चैन से नहीं बैठेगा। उन्होंने बिजनौर के लोगों से अपील की कि वे अपने घरों में पहली रोटी गाय के लिए निकालें और आवारा व बेसहारा घूम रही गौ माताओं की देखभाल का जिम्मा उठाएं।
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जनता का उत्साह: महाराज के इस संदेश को बिजनौर के लोगों ने अत्यंत उत्साह और श्रद्धापूर्वक सुना। सभा में मौजूद हर एक व्यक्ति ने दोनों हाथ उठाकर 'गौ माता को राष्ट्रीय माता' बनाने के इस अभियान के प्रति अपना बिना शर्त समर्थन व्यक्त किया। युवाओं ने संकल्प लिया कि वे सोशल मीडिया और धरातल, दोनों जगह इस मुहिम को आगे बढ़ाएंगे।
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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का बिजनौर दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ है। एक तरफ जहां इस दौरे ने क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया, वहीं दूसरी ओर अनुज मलिक जैसे नेताओं के समर्थन ने इस धार्मिक आंदोलन को एक मजबूत सामाजिक आधार प्रदान किया है।
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गौ माता को 'राष्ट्रीय माता' का दर्जा दिलाने की यह राह लंबी जरूर हो सकती है, लेकिन बिजनौर जैसी जगहों पर मिल रहा यह प्रचंड जनसमर्थन इस बात का साफ संकेत है कि यह मुहिम अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है। जिस दिन यह संकल्प सिद्धि में बदलेगा, वह दिन भारतीय इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा। बिजनौर से उठा यह शंखनाद अब निश्चित रूप से देश की सत्ता के गलियारों तक अपनी गूंज पहुंचाएगा।
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