बिजनौर (09 मई, 2026): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। जिले के नहटौर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले फुलसंदा गांव में शनिवार की सुबह एक भीषण अग्निकांड हो गया। यहां स्थित एक कपड़ा बुनाई फैक्ट्री (Cloth Weaving Factory) में अचानक भयंकर आग लग गई। आग ने चंद मिनटों में ही इतना विकराल और भयानक रूप ले लिया कि पूरी फैक्ट्री आग की तेज लपटों और काले धुएं के गुबार में घिर गई। इस दर्दनाक हादसे में फैक्ट्री मालिक का लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। फैक्ट्री के अंदर रखा बुनाई का सारा कच्चा माल, तैयार कपड़े और महंगी मशीनरी पूरी तरह से जलकर खाक हो गई है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि किसी भी प्रकार की जनहानि (Loss of Life) नहीं हुई है। समय रहते फैक्ट्री में मौजूद लोग और आसपास के ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए थे।READ ALSO:-बिजनौर: राष्ट्रीय लोक अदालत में न्याय का महाकुंभ, 74 हजार से अधिक मुकदमों का एक ही दिन में निपटारा, 15 करोड़ से अधिक का हुआ समझौता
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सुबह का शांत माहौल अचानक चीख-पुकार में बदला

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प्राप्त जानकारी और ग्रामीणों के अनुसार, शनिवार की सुबह फुलसंदा गांव में रोजमर्रा की तरह ही शांति थी। लोग अपने-अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। तभी अचानक सुबह के समय फैक्ट्री के भीतर से कुछ जलने की दुर्गंध आने लगी और देखते ही देखते वेंटिलेशन और खिड़कियों से काला धुआं बाहर निकलने लगा। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, धुएं ने आग की ऊंची-ऊंची लपटों का रूप ले लिया।
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आग इतनी तेजी से फैली कि उसने कुछ ही पलों में पूरी फैक्ट्री परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। आग की भयंकरता को देखकर आसपास के लोगों में भारी दहशत फैल गई। गांव में 'आग-आग' का शोर मच गया और मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। हर कोई अपनी जान बचाने और दूसरों की मदद करने के लिए दौड़ पड़ा।
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ग्रामीणों ने दिखाई बहादुरी, बाल्टियों से शुरू किया आग बुझाना

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इस संकट की घड़ी में फुलसंदा गांव के लोगों ने अत्यधिक बहादुरी और एकजुटता का परिचय दिया। बिना समय गंवाए, ग्रामीणों ने अपने स्तर पर ही आग बुझाने का प्रारंभिक प्रयास शुरू कर दिया। जिसके हाथ में जो आया—बाल्टियां, टब, प्लास्टिक के ड्रम और पानी के पाइप—वह उसी से आग पर पानी डालने लगा।
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चूंकि फैक्ट्री में कपड़े, सूत और धागे जैसे अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ भारी मात्रा में रखे हुए थे, इसलिए आग पर काबू पाना ग्रामीणों के लिए लगभग असंभव साबित हो रहा था। सूत और धागे आग पकड़ने के बाद तेजी से सुलगते हैं, जिसके कारण आग का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा था और फैक्ट्री की छत से धुएं का विशाल गुबार आसमान को छूने लगा था।
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दमकल विभाग का त्वरित एक्शन और घंटों की मशक्कत

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ग्रामीणों ने तत्काल घटना की सूचना स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड (Fire Brigade) को दी। सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए नहटौर और आसपास के दमकल केंद्रों से फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां सायरन बजाते हुए घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ीं।
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दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचते ही मोर्चा संभाल लिया। चारों तरफ से पानी की बौछारें शुरू की गईं। दमकल कर्मियों को आग बुझाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा क्योंकि फैक्ट्री के अंदर का तापमान अत्यधिक बढ़ चुका था और जहरीले धुएं के कारण अंदर प्रवेश करना मुश्किल था। ग्रामीणों के सहयोग और दमकल कर्मियों की घंटों की निरंतर और कड़ी मशक्कत के बाद अंततः आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि, आग बुझने के कई घंटों बाद तक फैक्ट्री के मलबे से धुआं उठता हुआ दिखाई देता रहा, जिसे पूरी तरह से ठंडा करने (Cooling Process) का काम जारी रहा।
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मालिक का रो-रोकर बुरा हाल, लाखों का कच्चा माल और मशीनें राख

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इस भीषण अग्निकांड ने फैक्ट्री मालिक इमरान अहमद को गहरे आर्थिक सदमे में डाल दिया है। अपनी आंखों के सामने अपनी वर्षों की मेहनत और पूंजी को जलकर राख होते देख इमरान अहमद का रो-रोकर बुरा हाल है।
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फैक्ट्री मालिक इमरान अहमद ने भारी मन से जानकारी देते हुए बताया कि आग के कारण उनका लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री में बड़े पैमाने पर कपड़ा बुनाई का कच्चा माल (Raw Material), विभिन्न प्रकार के रंग-बिरंगे धागे, सूत और कई अत्याधुनिक व महंगी पावरलूम मशीनें रखी हुई थीं। आग ने किसी भी चीज को नहीं छोड़ा, सब कुछ जलकर लोहे के कबाड़ और राख के ढेर में तब्दील हो गया। इसके अलावा, फैक्ट्री में ऑर्डर पर तैयार किया गया लाखों रुपये का तैयार माल (Finished Goods) भी रखा था, जिसे अगले कुछ दिनों में बाजार में सप्लाई किया जाना था, वह भी इस आग की भेंट चढ़ गया। इस भयानक हादसे ने फैक्ट्री के संचालन को पूरी तरह से ठप कर दिया है और इमरान अहमद के सामने एक बहुत बड़ा आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।
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स्थानीय रोजगार पर भी पड़ेगा असर

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फुलसंदा गांव में स्थित यह कपड़ा फैक्ट्री केवल इमरान अहमद की ही आजीविका का साधन नहीं थी, बल्कि गांव और आसपास के कई मजदूरों और कारीगरों का घर भी इसी फैक्ट्री से चलता था। फैक्ट्री के जल जाने से अब उन मजदूरों के सामने भी रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो गया है, जो दिहाड़ी या मासिक वेतन पर यहां बुनाई, कटिंग और पैकिंग का काम करते थे।
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पुलिस जांच शुरू: शॉर्ट सर्किट से आग लगने की प्रबल आशंका

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इतनी बड़ी आग आखिर कैसे लगी, यह फिलहाल जांच का विषय बना हुआ है। अभी तक आग लगने के वास्तविक और पुख्ता कारणों का आधिकारिक तौर पर पता नहीं चल पाया है। हालांकि, घटनास्थल का मुआयना करने के बाद शुरुआती जांच में यह प्रबल आशंका जताई जा रही है कि आग फैक्ट्री की वायरिंग में हुए किसी 'शॉर्ट सर्किट' (Short Circuit) के कारण लगी होगी। सूत और कपड़ों के रेशे हवा में उड़ते रहते हैं, जो हल्की सी चिंगारी मिलने पर भी बारूद की तरह सुलग उठते हैं।
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दमकल विभाग की तकनीकी टीम और स्थानीय पुलिस बल घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर रहे हैं। बिजली के पैनल और मेन स्विच बोर्ड की स्थिति की जांच की जा रही है ताकि आग लगने के मूल कारण (Root Cause) का पता लगाया जा सके। दमकल अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो सकेगी।
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'कोई जनहानि नहीं होना सबसे बड़ी राहत': कोतवाल

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इस पूरी घटना पर नहटौर थाने के कोतवाल रविन्द्र प्रताप सिंह ने भी अपना बयान जारी किया है। कोतवाल रविन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि कंट्रोल रूम से आगजनी की सूचना मिलते ही नहटौर थाना पुलिस की पूरी टीम तत्काल प्रभाव से दलबल के साथ मौके पर पहुंच गई थी।
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पुलिस ने सबसे पहले भीड़ को नियंत्रित किया और यह सुनिश्चित किया कि कोई भी ग्रामीण उत्साह या घबराहट में आग की लपटों के करीब न जाए। उन्होंने कहा, "यह सच है कि फैक्ट्री में लगी आग बहुत भयानक थी और इससे मालिक को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। सारा माल और मशीनें जल गई हैं। लेकिन इस पूरी त्रासदी में सबसे बड़ी और एकमात्र राहत की बात यह है कि किसी भी व्यक्ति की जान नहीं गई है और न ही कोई गंभीर रूप से झुलसा है।" कोतवाल ने आगे बताया कि पुलिस और दमकल विभाग आपस में समन्वय स्थापित कर मामले की विस्तृत और गहन जांच में जुटे हुए हैं।
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औद्योगिक सुरक्षा और प्रशासन से मुआवजे की गुहार

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इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित होने वाली छोटी और मध्यम दर्जे की औद्योगिक इकाइयों (MSME) में अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) के मानकों पर भी एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण इलाकों की फैक्ट्रियों में आग बुझाने के पर्याप्त उपकरण (Fire Extinguishers) या उचित आपातकालीन निकास प्रणाली नहीं होती है।
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इस बीच, स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि पीड़ित फैक्ट्री मालिक इमरान अहमद के नुकसान का राजस्व विभाग की टीम से सही आकलन कराया जाए और उन्हें उचित सरकारी मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि वे दोबारा अपना व्यवसाय खड़ा कर सकें और फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों के रोजगार को बचाया जा सके।
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