बिजनौर (शकील अहमद की रिपोर्ट): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में गुलदार (तेंदुए) और इंसानों के बीच संघर्ष का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन जिले के किसी न किसी हिस्से से गुलदार के देखे जाने या उसके द्वारा पालतू जानवरों और इंसानों पर हमला करने की खबरें सामने आती रहती हैं। इसी कड़ी में बिजनौर वन विभाग की टीम को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। जिले के नगीना थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव हम्ज़ापुर कठेर में वन विभाग द्वारा लगाए गए एक पिंजरे में एक खूंखार 'नर गुलदार' (Male Leopard) कैद हो गया है।READ ALSO:-मेरठ: नगर निगम की घोर लापरवाही, शिकायतों के अंबार के बाद भी नहीं सुलझी स्ट्रीट लाइट, नाली और फॉगिंग की समस्या; लोगों में भारी आक्रोश
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गुलदार के पिंजरे में फंसने की खबर जैसे ही गांव में फैली, मौके पर उसे देखने के लिए ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। पिछले काफी समय से खौफ के साये में जी रहे ग्रामीणों ने गुलदार के पकड़े जाने के बाद अब जाकर राहत की सांस ली है।
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27 अप्रैल से लगाया गया था पिंजरा, ग्रामीणों में थी भारी दहशत प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगीना थाना क्षेत्र के गांव हम्ज़ापुर कठेर और इसके आस-पास के जंगली इलाकों में पिछले कई दिनों से गुलदार की हलचल देखी जा रही थी। गुलदार अक्सर रात के अंधेरे में जंगल से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों में घुस आता था, जिससे किसानों और आम ग्रामीणों का घर से बाहर निकलना, विशेषकर रात के समय खेतों में सिंचाई के लिए जाना, बेहद दुश्वार हो गया था।
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ग्रामीणों ने इस खौफनाक स्थिति की सूचना तुरंत स्थानीय वन विभाग (Forest Department) के अधिकारियों को दी थी। ग्रामीणों की शिकायत और खतरे की गंभीरता को संज्ञान में लेते हुए, वन विभाग की टीम ने हरकत में आते हुए 27 अप्रैल को गांव के उस चिन्हित स्थान पर एक लोहे का मजबूत पिंजरा लगा दिया था, जहां गुलदार की आवाजाही सबसे अधिक देखी गई थी। पिंजरे के अंदर गुलदार को लुभाने के लिए बकरे का शिकार भी रखा गया था। कई दिनों के इंतजार के बाद आखिरकार बीती रात यह चालाक नर गुलदार शिकार के लालच में पिंजरे के अंदर घुस गया और उसका दरवाजा बंद हो गया।
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महज दो सप्ताह के भीतर यह दूसरी कामयाबी हम्ज़ापुर कठेर गांव के लिए यह घटना इसलिए भी बेहद संवेदनशील और डराने वाली है क्योंकि महज दो सप्ताह पूर्व ही इसी गांव की सीमा के भीतर से वन विभाग की टीम ने एक अन्य गुलदार को पिंजरे में कैद किया था। एक ही गांव से मात्र 15 दिनों के छोटे से अंतराल में दो-दो गुलदारों का पकड़ा जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आस-पास के जंगलों में गुलदारों का एक पूरा कुनबा सक्रिय हो सकता है।
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लगातार दो गुलदारों के पकड़े जाने से यह साबित होता है कि यह पूरा इलाका वन्यजीवों, विशेषकर तेंदुओं के लिए एक संवेदनशील क्षेत्र (Sensitive Zone) बन चुका है। हालांकि वन विभाग की सक्रियता से दो गुलदार पकड़े जा चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों के मन में अभी भी यह डर बना हुआ है कि कहीं जंगल में और भी गुलदार न छिपे हों, जो कभी भी बस्ती की ओर रुख कर सकते हैं।
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वन विभाग की आगे की कार्रवाई और अपील पिंजरे में नर गुलदार के कैद होने की सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम, रेंजर और अन्य अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ हम्ज़ापुर कठेर गांव पहुंचे। भीड़ को नियंत्रित करने के बाद, वन विभाग की टीम ने पूरी सावधानी के साथ पिंजरे को अपने कब्जे में ले लिया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पकड़े गए इस नर गुलदार का पहले पशु चिकित्सकों द्वारा मेडिकल चेकअप किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उसे पिंजरे में कैद होते समय कोई चोट तो नहीं आई है।
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स्वस्थ पाए जाने पर, उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार इस गुलदार को आबादी से कई सौ किलोमीटर दूर स्थित किसी घने जंगल (जैसे अमानगढ़ टाइगर रिजर्व या शिवालिक वन प्रभाग) में सुरक्षित छोड़ दिया जाएगा, ताकि वह वापस इस इलाके में न लौट सके। इसके साथ ही वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अभी भी पूरी तरह से सतर्कता बरतें। खेतों में जाते समय समूह में जाएं, शोर मचाते रहें और रात के समय अनावश्यक रूप से घरों से बाहर निकलने से बचें।
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बिजनौर में मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) एक स्थायी समस्या बन चुका है। सिकुड़ते जंगल और भोजन की तलाश इन जंगली जानवरों को मजबूरन इंसानी बस्तियों की ओर धकेल रही है। ऐसे में प्रशासन और वन विभाग को भविष्य में किसी बड़ी जनहानि को रोकने के लिए और अधिक ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
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