बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में इंसानों और जंगली जानवरों के बीच टकराव (Human-Wildlife Conflict) के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। गन्ने के खेतों से निकलकर अब खूंखार जंगली जानवर सीधे रिहायशी इलाकों और बाग-बगीचों में दस्तक दे रहे हैं। ऐसा ही एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया सोमवार सुबह बिजनौर के मंडावर थाना क्षेत्र में सामने आया, जब एक आम के बाग में काम कर रहे लोगों ने पेड़ की टहनियों के बीच एक खूंखार गुलदार (Leopard) को बैठे देखा।READ ALSO:-सांसद चंद्रशेखर आजाद के आवास पर 'नारी शक्ति' का हल्ला बोल: महिला आरक्षण के विरोध पर भड़कीं BJP नेत्रियों ने किया उग्र घेराव, छावनी में तब्दील हुआ इलाका
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गुलदार की मौजूदगी की खबर जंगल में आग की तरह फैली और देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। आनन-फानन में पुलिस और वन विभाग को सूचना दी गई, जिसके बाद शुरू हुआ पूरे 3 घंटे तक चला एक हाई-वोल्टेज 'रेस्क्यू ऑपरेशन' (Rescue Operation)।
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सुबह 10 बजे का वक्त: जब बाग में ऊपर देखा तो फटी रह गईं आंखें

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घटनाक्रम के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 10:00 बजे का समय था। मंडावर-बिजनौर मार्ग पर स्थित बंधन बैंकेट हॉल के ठीक पास एक विशाल आम का बाग है। सुबह के वक्त बाग की रखवाली करने वाले और कुछ स्थानीय लोग वहां मौजूद थे। तभी एक व्यक्ति की नजर आम के पेड़ की घनी पत्तियों के बीच गई। वहां का नजारा देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
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पेड़ की एक मोटी टहनी पर एक गुलदार बेहद शांत लेकिन खतरनाक मुद्रा में घात लगाए बैठा था। गुलदार को अपने इतने करीब और वो भी पेड़ के ऊपर बैठे देखकर बाग में मौजूद व्यक्ति के हाथ-पांव फूल गए। उसकी चीख निकल गई और वह जान बचाकर वहां से भागा। शोर शराबा सुनकर आसपास के ग्रामीण और राहगीर भी वहां इकट्ठा होने लगे। पेड़ पर गुलदार होने की बात सुनकर हर किसी के चेहरे पर खौफ साफ देखा जा सकता था।
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डायल 112 ने बजाया सायरन, मौके पर पहुंची पुलिस और वन विभाग

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बिना कोई देरी किए, समझदारी दिखाते हुए तुरंत डायल 112 (यूपी पुलिस की आपातकालीन सेवा) को इस खौफनाक मंजर की सूचना दी गई। सूचना मिलते ही मंडावर थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई और सायरन बजाती हुई पीआरवी (PRV) वैन मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने सबसे पहले लोगों को पेड़ से दूर किया ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
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इसके तुरंत बाद बिजनौर वन विभाग (Forest Department Bijnor) को अलर्ट किया गया। सूचना पाते ही वन क्षेत्राधिकारी (Range Officer) महेश गौतम अपनी पूरी टीम और आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों (पिंजरा, जाल आदि) के साथ मंडावर के उस बाग में पहुंच गए।
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3 घंटे की भारी मशक्कत और सांस रोक देने वाला 'रेस्क्यू ऑपरेशन'

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गुलदार का रेस्क्यू करना कभी भी आसान नहीं होता, खासकर तब जब वह पेड़ के ऊपर ऊंचाई पर बैठा हो और नीचे सैकड़ों लोगों की भीड़ शोर मचा रही हो। शोरगुल से घबराकर जानवर के अचानक भीड़ पर हमला करने का खतरा बना रहता है।
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वन क्षेत्राधिकारी महेश गौतम के नेतृत्व में वन दरोगा रचित चौधरी, हेमन्त और अजय ने मोर्चा संभाला। सबसे बड़ी चुनौती थी भीड़ को नियंत्रित करना, जिसमें मंडावर पुलिस ने अहम भूमिका निभाई। इसके बाद वन विभाग की टीम ने पेड़ के चारों ओर जाल बिछाने की रणनीति तैयार की।
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इस कठिन ऑपरेशन में स्थानीय युवाओं ने भी अदम्य साहस का परिचय दिया। मंडावर के युवा अमान हैदर जैदी, शाहनवाज सिद्दीकी शानू और सुहेल सलमानी ने अपनी जान की परवाह न करते हुए वन विभाग की टीम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। उन्होंने जाल पकड़ने, भीड़ को पीछे करने और अधिकारियों के दिशा-निर्देशों का पालन करने में पूरी मदद की।
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करीब तीन घंटे की भारी जद्दोजहद, सूझबूझ और तकनीकी प्रयासों के बाद आखिरकार गुलदार को सुरक्षित तरीके से जाल में फांस लिया गया और पिंजरे में कैद कर लिया गया। जब पिंजरे का दरवाजा बंद हुआ, तब जाकर वन विभाग की टीम, पुलिस और वहां मौजूद हजारों लोगों ने राहत की सांस ली।
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क्या कहते हैं वन विभाग के अधिकारी?

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रेस्क्यू ऑपरेशन के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए वन क्षेत्राधिकारी महेश गौतम ने बताया, "हमें मंडावर क्षेत्र के एक आम के बाग में गुलदार के होने की पुख्ता सूचना मिली थी। हमारी टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। गुलदार पेड़ पर काफी ऊंचाई पर था, जिससे रेस्क्यू थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो गया था। लगभग तीन घंटे की मशक्कत के बाद हमने इसे सुरक्षित पिंजरे में कैद कर लिया है।"
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अधिकारी ने आगे बताया कि, "पकड़े गए गुलदार की आयु लगभग डेढ़ (1.5) वर्ष के आस-पास है। यह एक युवा और फुर्तीला गुलदार है। फिलहाल वह पूरी तरह से स्वस्थ है। इसे सुरक्षित स्थान (जंगल) में छोड़ने की आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।"
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बिजनौर में क्यों बढ़ रहे हैं गुलदार के मामले? (Background & Context)

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बिजनौर जिला भौगोलिक दृष्टि से वन्यजीवों के लिए एक संवेदनशील इलाका है। यह जिला अमानगढ़ टाइगर रिजर्व (Amangarh Tiger Reserve) और शिवालिक वन प्रभाग की सीमाओं से सटा हुआ है। इसके अलावा, बिजनौर में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती होती है।
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वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि गन्ने के घने खेत गुलदारों के लिए एक सुरक्षित 'नैचुरल हैबिटेट' (प्राकृतिक आवास) और 'ब्रीडिंग ग्राउंड' (प्रजनन केंद्र) बन चुके हैं। जब गन्ने की कटाई का सीजन खत्म हो जाता है या उन्हें भोजन (जैसे आवारा कुत्ते, जंगली सुअर) की तलाश होती है, तो ये गुलदार भटककर रिहायशी इलाकों, गांवों और आम के बागों का रुख कर लेते हैं। पिछले कुछ सालों में बिजनौर में गुलदार के हमलों में कई ग्रामीणों और बच्चों की जान जा चुकी है, जिसके कारण लोगों में हमेशा दहशत का माहौल बना रहता है।
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अपील: वन विभाग ने स्थानीय लोगों और किसानों से अपील की है कि वे सुबह और शाम के समय खेतों या बागों में अकेले जाने से बचें। यदि जाना भी पड़े तो समूह में जाएं और शोर करते हुए (रेडियो बजाकर या डंडा खटखटाकर) जाएं। यदि कहीं कोई जंगली जानवर दिखाई दे, तो तुरंत 112 या वन विभाग के टोल-फ्री नंबर पर सूचना दें और खुद जानवर से छेड़छाड़ करने का प्रयास बिल्कुल न करें।
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(मंडावर पुलिस और वन विभाग की इस त्वरित और सफल कार्यवाही की पूरे इलाके में जमकर सराहना हो रही है।)
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