बिजनौर (खबरीलाल विशेष रिपोर्ट): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में एक बार फिर से गुलदार (Leopard) का खौफनाक चेहरा सामने आया है। यहां के ग्रामीण इलाकों में इंसान और जंगली जानवरों के बीच का खूनी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा और बेहद दिल दहला देने वाला मामला थाना हीमपुर दीपा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम अजूपुर जट से सामने आया है, जहां एक निहत्थी और बेबस महिला को गुलदार ने अपना शिकार बना लिया। खेत में अपने पशुओं के लिए चारा लेने गई इस महिला ने शायद ही सोचा होगा कि गन्ने के खेतों की आड़ में मौत उसका इंतजार कर रही है। इस दर्दनाक घटना के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा है, जो बीच-बीच में परिजनों की चीखों और ग्रामीणों के गुस्से से टूट रहा है।Read also:-यूपी के लाखों लोगों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी! अब बुजुर्गों, दिव्यांगों और असहायों को घर बैठे मिलेगा राशन, कोटेदार खुद आएंगे आपके द्वार
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कैसे घटी यह खौफनाक घटना? गन्ने के खेत में छिपी थी मौत प्राप्त जानकारी के अनुसार, अजूपुर जट गांव की रहने वाली यह महिला अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या के तहत पशुओं के लिए चारा काटने के लिए गांव के बाहरी छोर पर स्थित खेतों की तरफ गई थी। बिजनौर का यह पूरा बेल्ट गन्ने की खेती के लिए जाना जाता है। ऊंची-ऊंची गन्ने की फसलें गुलदारों के लिए एक प्राकृतिक जंगल और छिपने की सुरक्षित जगह बन चुकी हैं। बताया जा रहा है कि गुलदार पहले से ही खेत में घात लगाए बैठा था। जैसे ही महिला चारा काटने के लिए खेत के करीब पहुंची, गुलदार ने अचानक पीछे से उस पर जानलेवा हमला कर दिया।
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हमला इतना तीव्र और हिंसक था कि महिला को संभलने या शोर मचाकर मदद बुलाने तक का मौका नहीं मिला। गुलदार ने महिला के गर्दन और शरीर के अन्य हिस्सों पर गहरे वार किए, जिससे अत्यधिक खून बहने के कारण महिला ने मौके पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। जब काफी देर तक महिला घर नहीं लौटी, तो परिजनों को चिंता हुई। तलाश करते हुए जब ग्रामीण खेत की तरफ पहुंचे, तो वहां का दृश्य देखकर हर किसी की रूह कांप उठी। खेत में महिला का क्षत-विक्षत शव खून से लथपथ पड़ा था।
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परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल: छिन गया घर का एक अहम साया जैसे ही महिला की मौत की खबर अजूपुर जट गांव में पहुंची, वहां कोहराम मच गया। मृतका के घर पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। घर के बच्चों और महिलाओं की चीत्कार सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। ग्रामीण परिवेश में महिलाएं अक्सर खेती-किसानी और पशुपालन में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चलती हैं। ऐसे में एक हंसते-खेलते परिवार से अचानक एक सदस्य का इस क्रूरता से छिन जाना, पूरे गांव के लिए एक गहरा सदमा है। परिजन अब प्रशासन से इंसाफ और मदद की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनके दिल का जो घाव इस गुलदार ने दिया है, वह शायद ही कभी भर पाए।
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खौफ के साये में जीने को मजबूर ग्रामीण: घरों में कैद होने की नौबत बिजनौर जिले में गुलदार का यह कोई पहला हमला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में बिजनौर, मेरठ और आस-पास के सटे हुए तराई और कृषि प्रधान इलाकों में गुलदार के हमलों की झड़ी सी लग गई है। अजूपुर जट के ग्रामीणों का कहना है कि आए दिन उन्हें खेतों के आस-पास या सड़कों पर गुलदार दिखाई देते हैं। शाम ढलते ही लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हो जाते हैं। बच्चों का स्कूल जाना, महिलाओं का खेतों में काम करना और किसानों का रात के समय फसलों की सिंचाई करना—सब कुछ इस खौफ के कारण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
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ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार गुलदार देखे जाने की शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। इस ताजा घटना ने लोगों के भीतर बैठे डर को अब आक्रोश में बदल दिया है। "हम किसान हैं, अगर खेत में नहीं जाएंगे तो खाएंगे क्या? लेकिन अब खेत में जाना सीधे मौत के मुंह में जाने जैसा हो गया है," एक स्थानीय ग्रामीण ने 'खबरीलाल' की टीम को अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा।
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वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल घटना की सूचना मिलते ही गांव वालों ने तुरंत स्थानीय पुलिस और वन विभाग (Forest Department) को मामले की जानकारी दी। हालांकि, ग्रामीणों में वन विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली को लेकर भारी रोष है। लोगों का स्पष्ट आरोप है कि वन विभाग केवल तब जागता है जब कोई जनहानि हो जाती है। लगातार शिकायतों के बावजूद इलाके में पिंजरे लगाने, ड्रोन से निगरानी करने या ट्रेंकुलाइजर गन (Tranquilizer Gun) से लैस टीमों की गश्त बढ़ाने में विभाग नाकाम रहा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि जब तक इस आदमखोर हो चुके गुलदार को पकड़ा या मारा नहीं जाता, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में ले लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, ग्रामीणों को शांत करने के लिए इलाके में कॉम्बिंग (Combing) ऑपरेशन शुरू करने और पिंजरा लगाने का आश्वासन दिया गया है।
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इंसान और वन्यजीवों का संघर्ष: एक गहराता संकट बिजनौर के इस इलाके में इंसान और गुलदार का यह संघर्ष पर्यावरण और कृषि के बदलते स्वरूप का नतीजा भी है। जंगलों के सिकुड़ने और शिकार की कमी के चलते ये जंगली जानवर अब गन्ने के घने खेतों को अपना आशियाना बना रहे हैं। गन्ने के खेत उन्हें न सिर्फ छिपने की जगह देते हैं, बल्कि गांवों के आवारा कुत्ते और सुअर उनके लिए आसान शिकार बन जाते हैं। इसी प्रक्रिया में जब कोई इंसान उनके सामने आ जाता है, तो ऐसी दुखद घटनाएं जन्म लेती हैं।
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खबरीलाल का प्रशासन से सीधा सवाल और अपील 'खबरीलाल न्यूज़' प्रशासन और वन विभाग से यह सवाल करता है कि आखिर कब तक हमारे अन्नदाता और उनके परिवार ऐसे ही जंगली जानवरों का निवाला बनते रहेंगे? प्रशासन को चाहिए कि वह मृतका के परिवार को तत्काल उचित आर्थिक मुआवजा दे और इस आदमखोर गुलदार को पकड़ने के लिए युद्ध स्तर पर अभियान चलाए। वन विभाग को इस पूरे क्षेत्र को 'अति संवेदनशील' घोषित कर विशेष सुरक्षा उपाय करने होंगे।
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फिलहाल, थाना हीमपुर दीपा के अजूपुर जट गांव में दहशत, मातम और गुस्सा—तीनों का माहौल है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गुलदार को नहीं पकड़ा गया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस दर्दनाक घटना के बाद कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है।
Sabse pehle comment karne wale banein.