बिजनौर (शकील अहमद ब्यूरो चीफ बिजनौर)
\r\n\r\nबिजनौर: गुरुवार की सुबह जब हल्दौर में 20 वर्षीय अभिषेक की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या की गई, तो यह सिर्फ कानून-व्यवस्था की हार नहीं थी। यह उस भरोसे की भी हार थी जो आम आदमी पुलिस पर करता है। अब, एसपी बिजनौर की एक अभूतपूर्व कार्रवाई ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि उस भरोसे को तोड़ा गया था। अभिषेक की मौत के बाद, इस मामले में अब सबसे बड़े 'आरोपी' खुद कुछ पुलिसकर्मी बन गए हैं।READ ALSO:-कैमरे में कैद हुई दबंगई! बिजनौर में पेट्रोल पंप कर्मचारी को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, VIDEO वायरल
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क्या थी पुलिस की वो 'लापरवाही'?
\r\n\r\nएसपी सिटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर हल्दौर के SHO महेंद्र पाल सिंह और PRV पर तैनात मुख्य आरक्षी मोहब्बत खां व आरक्षी प्रशांत तोमर को सस्पेंड किया गया है। प्रेस नोट में इस्तेमाल हुए दो शब्द- 'लापरवाही' (Negligence) और 'स्वेच्छाचारिता' (Arbitrariness/High-handedness) - पूरी कहानी बयां करते हैं।
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- \r\n क्या PRV देर से पहुंची? क्या मारपीट की सूचना मिलने के बावजूद पुलिस रिस्पांस व्हीकल (PRV) ने मौके पर पहुंचने में देरी की?\r\n \r\n
- \r\n क्या SHO ने मामले को हल्के में लिया? क्या थाना प्रभारी ने घटना की गंभीरता को नहीं समझा या शिकायत पर तत्काल एक्शन लेने में मनमानी दिखाई?\r\n \r\n
- \r\n क्या पीड़ितों को समय पर मदद नहीं मिली? जांच रिपोर्ट इन्हीं सवालों की ओर इशारा कर रही है, जिसका मतलब है कि अगर पुलिस ने अपनी ड्यूटी ठीक से निभाई होती, तो शायद आज अभिषेक जिंदा होता।\r\n \r\n
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डैमेज कंट्रोल या न्याय की शुरुआत?
\r\n\r\nएक युवक की मौत और एक फौजी के गंभीर रूप से घायल होने के बाद जब जनता का गुस्सा सड़क पर उतरा, तो पुलिस महकमे के शीर्ष अधिकारियों को अपनी साख बचाने के लिए कड़े कदम उठाने पड़े। SHO समेत तीन पुलिसकर्मियों का निलंबन इसी 'डैमेज कंट्रोल' का हिस्सा माना जा रहा है। एसपी बिजनौर ने इस कार्रवाई के जरिए पूरे जिले की फोर्स को संदेश दिया है कि अब ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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परिवार के लिए दोहरी मार
\r\n\r\nयह कार्रवाई अभिषेक के परिवार के जख्मों पर मरहम लगाने की एक कोशिश हो सकती है, लेकिन यह उनके लिए एक दोहरी मार भी है। उन्हें न केवल अपने बेटे को खोने का दुख झेलना पड़ रहा है, बल्कि इस अहसास के साथ भी जीना पड़ रहा है कि शायद जिन लोगों पर उनकी सुरक्षा का जिम्मा था, उन्हीं की लापरवाही ने उनके बेटे को मौत के मुंह में धकेल दिया।
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यह निलंबन सिर्फ एक विभागीय कार्रवाई नहीं है। यह बिजनौर पुलिस के लिए एक आत्म-मंथन का समय है। सवाल यह है कि क्या यह एक्शन सिर्फ जनता के गुस्से को शांत करने के लिए है, या यह वास्तव में एक ऐसी व्यवस्था बनाने की शुरुआत है जहां हर पुलिसकर्मी अपनी जिम्मेदारी को समझेगा और अभिषेक जैसा कोई और युवा लापरवाही का शिकार नहीं होगा?
Sabse pehle comment karne wale banein.