बिजनौर (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक बेहद बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आ रही है। पिछले कई दिनों से जिस खूंखार तेंदुए ने इलाके के लोगों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया था, आखिरकार वह वन विभाग की चाल में फंस ही गया। बिजनौर के चांदपुर वन रेंज के अंतर्गत आने वाले इस्माइलपुर गांव में स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट - DIET) परिसर में रविवार की सुबह यह खूंखार तेंदुआ वन विभाग द्वारा लगाए गए एक पिंजरे में कैद हो गया।READ ALSO:-बिजनौर में खून से लाल हुई सड़क: बैराज रोड पर दो ट्रकों की आमने-सामने की खौफनाक टक्कर, एक चालक ने मौके पर ही तोड़ा दम
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तेंदुए के पकड़े जाने की खबर जैसे ही इलाके में फैली, ग्रामीणों, स्कूल प्रशासन और आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों ने राहत की एक बड़ी सांस ली। बताया जा रहा है कि यह तेंदुआ पिंजरे के अंदर रखी एक मुर्गी के शिकार के लालच में अंदर घुसा था और फिर सलाखों के पीछे हमेशा के लिए कैद हो गया।
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कई दिनों से दहशत के साये में जी रहे थे लोग

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस्माइलपुर गांव के इस इलाके और विशेषकर डायट परिसर (Ismailpur DIET Campus) के आसपास पिछले कई दिनों से इस जंगली जानवर की हलचल देखी जा रही थी। डायट परिसर में छात्रों और शिक्षकों का आना-जाना लगा रहता है, ऐसे में तेंदुए की मौजूदगी ने वहां दहशत का माहौल पैदा कर दिया था। स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार रात के अंधेरे में और सुबह के धुंधलके में इस आदमखोर प्रवृत्ति वाले जानवर को वहां घूमते हुए देखा था।
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खौफ का आलम यह था कि शाम ढलते ही लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हो गए थे। बच्चों ने अकेले स्कूल या बाहर खेलने जाना बंद कर दिया था और किसान भी खेतों में जाने से कतराने लगे थे। लगातार मिल रही शिकायतों और लोगों में बढ़ते डर को देखते हुए स्थानीय लोगों और डायट प्रशासन ने तुरंत वन विभाग (Forest Department Bijnor) के उच्चाधिकारियों को इस गंभीर स्थिति से अवगत कराया था।
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वन विभाग की रणनीति: मुर्गी का लालच पड़ा भारी

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मामले की गंभीरता को समझते हुए बिजनौर वन विभाग की टीम तुरंत हरकत में आई। वन अधिकारियों ने इलाके का मुआयना किया और तेंदुए के पगमार्क (पैरों के निशान) की पुष्टि करने के बाद डायट परिसर के एक एकांत हिस्से में एक मजबूत लोहे का पिंजरा स्थापित कर दिया।
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जंगली जानवरों को पकड़ने की अपनी रणनीति के तहत, वन विभाग ने तेंदुए को लालच देने के लिए पिंजरे के अंदर एक जीवित मुर्गी को चारे के रूप में रख दिया। विभाग की यह रणनीति पूरी तरह से कारगर साबित हुई। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, रविवार की अलसुबह जब यह खूंखार तेंदुआ अपने शिकार की तलाश में डायट परिसर के आसपास मंडरा रहा था, तभी उसे पिंजरे के अंदर से आ रही मुर्गी की गंध और आवाज महसूस हुई।
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शिकार के लालच में अंधा हो चुका तेंदुआ बिना किसी खतरे का अंदेशा लगाए पिंजरे के अंदर घुस गया। जैसे ही उसने मुर्गी पर झपट्टा मारने की कोशिश की, पिंजरे का ऑटोमैटिक दरवाजा झटके से बंद हो गया और इलाके में दहशत फैलाने वाला यह खूंखार जानवर सलाखों के पीछे कैद हो गया।
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सुबह पिंजरे में दहाड़ता मिला तेंदुआ, जुटी ग्रामीणों की भारी भीड़

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रविवार की सुबह जब इस्माइलपुर गांव के कुछ ग्रामीण और डायट परिसर के कर्मचारी अपनी नियमित दिनचर्या के लिए बाहर निकले, तो उन्हें पिंजरे की तरफ से एक भारी गुर्राहट और दहाड़ की आवाजें सुनाई दीं। उत्सुकतावश जब लोग पिंजरे के पास पहुंचे, तो उनके होश उड़ गए। पिंजरे के अंदर एक विशालकाय और आक्रामक तेंदुआ कैद था।
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प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अपने आप को चारों तरफ से सलाखों से घिरा देखकर तेंदुआ बेहद गुस्से में था। वह पिंजरे में कैद होने के बावजूद बाहर खड़े लोगों को देखकर जोर-जोर से गुर्रा रहा था और सलाखों पर पंजे मार रहा था। उसकी भयानक आवाज और आक्रामक तेवर देखकर वहां मौजूद लोग एक पल के लिए सहम गए और पीछे हट गए।
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हालांकि, जानवर पिंजरे के अंदर सुरक्षित रूप से बंद था, इसलिए किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं घटी। पल भर में ही यह खबर पूरे इस्माइलपुर गांव और आसपास के इलाकों में जंगल की आग की तरह फैल गई। मौके पर तेंदुए को देखने के लिए सैकड़ों ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। लोगों में दहशत के साथ-साथ इस बात की खुशी भी थी कि अब उनका इलाका सुरक्षित है।
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वन विभाग का त्वरित और सफल रेस्क्यू ऑपरेशन

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ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए वन विभाग को तेंदुए के पकड़े जाने की सूचना दी। सूचना मिलते ही वन रेंज अधिकारी (Ranger) दुष्यंत सिंह के नेतृत्व में एक विशेष रेस्क्यू टीम तुरंत साजो-सामान के साथ मौके पर पहुंच गई।
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रेस्क्यू टीम ने सबसे पहले वहां मौजूद भारी भीड़ को सुरक्षित दूरी पर किया ताकि जानवर और अधिक आक्रामक न हो और किसी भी संभावित दुर्घटना को टाला जा सके। इसके बाद, बेहद सावधानी और पेशेवर तरीके से पिंजरे को कवर किया गया और एक सुरक्षित वाहन में लादकर वहां से निकाला गया। वन विभाग की इस सफल रेस्क्यू टीम में रेंजर दुष्यंत सिंह के साथ वन दरोगा मुकुल त्यागी, वन दरोगा हिमांशु, फॉरेस्ट गार्ड गौरव कुमार और वनकर्मी मोहम्मद अनीस ने मुख्य भूमिका निभाई। टीम के इस त्वरित कार्य की स्थानीय लोगों ने खूब सराहना की।
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6 से 7 वर्ष आंकी गई है तेंदुए की उम्र: आगे क्या होगा?

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चांदपुर रेंज के वन रेंजर दुष्यंत सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि डायट परिसर से पकड़ा गया यह तेंदुआ पूरी तरह से वयस्क (Adult) और स्वस्थ है। शारीरिक बनावट और दांतों के आधार पर इसकी उम्र करीब 6 से 7 वर्ष के बीच आंकी गई है।
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उन्होंने बताया कि फिलहाल तेंदुए को सुरक्षित रूप से वन रेंज कार्यालय ले जाया गया है। वहां पशु चिकित्सकों की एक विशेष टीम द्वारा तेंदुए का विस्तृत मेडिकल परीक्षण (Medical Examination) किया जाएगा। अगर वह पूरी तरह से स्वस्थ पाया जाता है, तो उच्च अधिकारियों के निर्देशों का पालन करते हुए उसे मानव आबादी से दूर किसी घने जंगल (जैसे अमानगढ़ टाइगर रिजर्व या शिवालिक वन प्रभाग) में सुरक्षित छोड़ दिया जाएगा, ताकि वह अपने प्राकृतिक आवास में रह सके।
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बिजनौर में मानव-वन्यजीव संघर्ष: एक बढ़ती हुई चिंता

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यह कोई पहला मौका नहीं है जब बिजनौर जिले (Bijnor News) में कोई तेंदुआ पकड़ा गया हो। दरअसल, बिजनौर जिले की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह गंगा नदी के तराई क्षेत्र में बसा है और यहां गन्ने की खेती भारी मात्रा में होती है। गन्ने के घने खेत इन जंगली जानवरों, विशेषकर तेंदुओं के लिए छिपने और प्रजनन करने के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह का काम करते हैं।
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अक्सर भोजन और पानी की तलाश में ये जानवर गन्ने के खेतों से निकलकर रिहायशी इलाकों और गांवों की तरफ रुख कर लेते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आती हैं। पिछले कुछ सालों में बिजनौर में तेंदुओं के हमलों में कई ग्रामीणों और बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
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वन विभाग की अपील: सतर्क और जागरूक रहें ग्रामीण

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इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद वन विभाग ने इस्माइलपुर सहित जिले के सभी ग्रामीणों से अपील की है कि वे अभी भी पूरी तरह से सतर्क रहें। विभाग का कहना है कि एक तेंदुए के पकड़े जाने का मतलब यह नहीं है कि इलाके में अन्य वन्यजीवों का खतरा पूरी तरह समाप्त हो गया है।
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अधिकारियों ने ग्रामीणों को सलाह दी है कि रात के समय अकेले खेतों में न जाएं, हमेशा अपने साथ एक डंडा या टॉर्च रखें, और समूह में ही बाहर निकलें। यदि किसी को भी इलाके में कोई भी संदिग्ध जंगली जानवर दिखाई देता है, तो वह खुद कोई कदम उठाने के बजाय तुरंत वन विभाग के हेल्पलाइन नंबरों पर सूचना दे।
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डायट परिसर से तेंदुए के पकड़े जाने के बाद अब इलाके में जीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है और छात्रों से लेकर किसानों तक सभी ने राहत की सांस ली है।
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