उत्तर प्रदेश के बिजनौर में गंगा एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित रूट को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों ने एक्सप्रेसवे के संरेखण (रूट) का कड़ा विरोध करते हुए जिलाधिकारी (DM) को एक ज्ञापन सौंपा है।
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किसानों का साफ कहना है कि वर्तमान प्रस्तावित रूट उनकी उपजाऊ कृषि भूमि से होकर गुजर रहा है। इससे हजारों किसानों की आजीविका पर सीधा और गहरा संकट मंडरा रहा है। प्रशासन से इस प्रस्तावित रूट को बदलने की लगातार मांग की जा रही है।
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क्या है गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना?
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में गंगा एक्सप्रेसवे का नाम सबसे ऊपर आता है। यह विशाल एक्सप्रेसवे राज्य के कई प्रमुख जिलों को आपस में जोड़ने का काम करेगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n@Shakeel57767846 बिजनौर में गंगा एक्सप्रेस-वे के प्रस्तावित रूट का किसानों ने कड़ा विरोध किया है। उपजाऊ भूमि बचाने के लिए डीएम को ज्ञापन सौंपकर वैकल्पिक रूट की मांग उठाई गई। pic.twitter.com/AvhMGUtLwP
\r\n— MK Vashisth (@vadhisth) June 24, 2026
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हाल ही में इस परियोजना का विस्तार करते हुए इसे अमरोहा से हरिद्वार तक ले जाने की योजना पर काम चल रहा है। इसी विस्तार वाले हिस्से के प्रस्तावित रूट को लेकर बिजनौर क्षेत्र में यह विवाद खड़ा हो गया है।
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सरकार का उद्देश्य इस एक्सप्रेसवे के जरिए यात्रा के समय को कम करना और व्यापार को बढ़ावा देना है। हालांकि, जमीन अधिग्रहण को लेकर स्थानीय किसानों की चिंताएं भी अपनी जगह पूरी तरह जायज हैं।
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उपजाऊ कृषि भूमि छिनने का सता रहा है डर
\r\n\r\nनाराज किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि अमरोहा से हरिद्वार तक जाने वाला यह नया रूट बिजनौर के कई गांवों के लिए बेहद नुकसानदायक साबित होगा।
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यह नया प्रस्तावित रूट ग्राम सालमाबाद, भरैरा, भोगी, नसीरी, पेदा, कच्छपुरा, नया गांव, गजरौला अचपल, गजरौला शिव और बगीची जैसे कई गांवों से होकर गुजरने वाला है।
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इन सभी गांवों की प्रथम श्रेणी की अत्यंत उपजाऊ कृषि भूमि इस सड़क परियोजना में चली जाएगी। किसानों का कहना है कि खेती की जमीन छिनने से उनकी आजीविका पूरी तरह से खत्म हो जाएगी और कृषि उत्पादन भी प्रभावित होगा।
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गंगा एक्सप्रेसवे के लिए किसानों ने सुझाया वैकल्पिक रूट
\r\n\r\nकिसानों ने इस परियोजना का केवल विरोध ही नहीं किया है, बल्कि प्रशासन को एक बेहतर समाधान भी सुझाया है। ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने गंगा एक्सप्रेसवे के लिए एक नए और वैकल्पिक रूट की मांग की है।
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उनका सुझाव है कि एक्सप्रेसवे का रूट बिजनौर की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को जोड़ते हुए बनाया जाना चाहिए। इससे किसानों की उपजाऊ जमीन भी बच जाएगी और परियोजना भी पूरी हो जाएगी।
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किसानों का दावा है कि इस नए रूट से न सिर्फ खेती सुरक्षित रहेगी, बल्कि इस पूरे क्षेत्र का चौमुखी विकास भी काफी तेजी से हो सकेगा।
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धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ने की मांग
\r\n\r\nकिसानों का तर्क है कि अगर इस एक्सप्रेसवे को बिजनौर की शान 'महात्मा विदुर जी की कुटी' से जोड़ा जाए, तो यह काफी फायदेमंद कदम होगा।
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इसके अलावा, महर्षि कण्व आश्रम और कलखा देवी मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को भी इस एक्सप्रेसवे के मार्ग से जोड़ने की पुरजोर मांग की गई है।
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अगर सरकार ऐसा करती है, तो क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भारी बढ़ावा मिलेगा। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु आसानी से इन ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन कर सकेंगे। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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सरकारी जमीन के उपयोग से सरकार और किसान दोनों को फायदा
\r\n\r\nकिसानों ने प्रशासन को यह भी बताया कि उनके द्वारा सुझाए गए वैकल्पिक रूट में अधिकतर भूमि सरकारी है। इस रूट पर जिस भी जमीन का अधिग्रहण करना पड़ेगा, वह वर्तमान रूट के मुकाबले काफी कम उपजाऊ है।
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साथ ही, उस वैकल्पिक भूमि का आर्थिक मूल्य भी अपेक्षाकृत कम होगा। इससे सरकार को भी भूमि अधिग्रहण में कम मुआवजा देना पड़ेगा और सरकारी खजाने पर बोझ घटेगा।
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दूसरी ओर, किसानों को भी अपनी कीमती जमीन खोने का भारी नुकसान नहीं झेलना पड़ेगा। कुल मिलाकर, इस वैकल्पिक रूट से यह पूरी परियोजना बिना किसी बड़े विवाद के सुगमता से पूरी की जा सकेगी।
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प्रशासन से सकारात्मक कार्रवाई की अपील
\r\n\r\nबिजनौर के इन प्रभावित क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि वे जनहित में उनकी इस जायज मांग पर जल्द सकारात्मक निर्णय लें। किसानों को उम्मीद है कि डीएम उनकी इस समस्या को शासन तक जरूर पहुंचाएंगे।
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रिपोर्टर शकील अहमद की जानकारी के अनुसार, ग्रामीण विकास कार्यों या इस परियोजना के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे सिर्फ अपनी आजीविका बचाना चाहते हैं।
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किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन उनकी मांग स्वीकार कर लेता है, तो क्षेत्र के हजारों ग्रामीण इस बर्बादी से बच जाएंगे। इसके बदले में वे इस विकास कार्य के लिए सरकार के प्रति अपना आभार व्यक्त करेंगे।
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निष्कर्ष के तौर पर, बिजनौर में गंगा एक्सप्रेसवे का रूट विवाद अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। किसानों द्वारा सुझाया गया वैकल्पिक रूट पर्यटन, अर्थव्यवस्था और कृषि संरक्षण, तीनों के लिए लाभदायक प्रतीत हो रहा है। अब यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार जनहित को ध्यान में रखते हुए इस मामले पर आगे क्या फैसला लेते हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.