बिजनौर (22 अगस्त): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नया मुकाम हासिल किया है। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने और आम जनमानस तक बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से शनिवार को कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा विदुर सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी जसजीत कौर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में स्वास्थ्य विभाग की प्रगति की न केवल विस्तृत समीक्षा की गई, बल्कि भविष्य के लिए कई कड़े और आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए गए। बैठक में सबसे बड़ी खुशखबरी यह रही कि 'एनीमिया मुक्त भारत अभियान' में बिजनौर ने पूरे उत्तर प्रदेश में पांचवां स्थान प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है।Read also:-बिजनौर में पुलिस महकमे का नया अध्याय: तेजतर्रार IPS कृष्ण कुमार विश्नोई ने संभाली SP की कमान, बोले- 'अपराधियों पर कसेगा शिकंजा'
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एनीमिया मुक्त भारत में बिजनौर का शानदार प्रदर्शन

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बैठक के दौरान परिवार कल्याण कार्यक्रम और पोषण अभियानों की समीक्षा की गई। इस दौरान यह तथ्य उभरकर सामने आया कि 'एनीमिया मुक्त भारत अभियान' के तहत जनपद बिजनौर ने अभूतपूर्व कार्य किया है और प्रदेश भर में पांचवां स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एनीमिया (खून की कमी) महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती रही है।
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जिलाधिकारी जसजीत कौर ने इस शानदार उपलब्धि पर स्वास्थ्य विभाग की टीम की सराहना की। साथ ही, उन्होंने इस अभियान को और अधिक प्रभावी व जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि एनीमिया की रोकथाम और उपचार के लिए आयरन की गोलियों का वितरण, पोषण जागरूकता और आवश्यक गतिविधियां नियमित रूप से बिना किसी रुकावट के संचालित की जानी चाहिए, ताकि जिले को इस सूची में प्रथम स्थान पर लाया जा सके।
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थैलेसीमिया रोगियों के लिए संजीवनी: रक्त की न हो कोई कमी

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स्वास्थ्य समिति की इस उच्च स्तरीय बैठक में थैलेसीमिया (Thalassemia) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के प्रति विशेष संवेदनशीलता दिखाई गई। थैलेसीमिया एक ऐसा आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें रोगी के शरीर में पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता और उन्हें बार-बार खून चढ़ाने (Blood Transfusion) की आवश्यकता होती है।
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डीएम जसजीत कौर ने कड़े निर्देश देते हुए कहा कि ब्लड बैंकों के माध्यम से थैलेसीमिया रोगियों को रक्त उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की कोताही या समस्या बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सीएमओ और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले भर में नियमित रूप से बड़े पैमाने पर 'रक्तदान शिविरों' का आयोजन किया जाए। इससे ब्लड बैंकों में हमेशा रक्त की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित रहेगी और किसी भी आपात स्थिति में मरीजों की जान बचाई जा सकेगी।
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मानसून का अलर्ट: जलभराव वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग रहेगा मुस्तैद

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बारिश के मौसम में संक्रामक रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने जनपद में जलभराव (Water-logging) वाले क्षेत्रों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
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उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया है कि:

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    जिन-जिन इलाकों में जलभराव की समस्या है, वहां तत्काल प्रभाव से विशेष स्वास्थ्य कैंप लगाए जाएं।
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    मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए बड़े स्तर पर फॉगिंग (Fogging) कराई जाए।
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    रुके हुए पानी में मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए नियमित रूप से एंटी-लार्वा (Anti-larva) रसायनों का छिड़काव सुनिश्चित किया जाए।
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मानसिक स्वास्थ्य के लिए 'टेली मानस' (Toll-Free: 14416)

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आज के भागदौड़ भरे जीवन में मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। बैठक में 'टेली मानस पोर्टल' की समीक्षा के दौरान बताया गया कि मस्तिष्क संबंधी बीमारियों, अवसाद (Depression) एवं अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता के लिए सरकार द्वारा एक विशेष टोल फ्री नंबर 14416 संचालित किया जा रहा है।
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जिलाधिकारी ने इस सुविधा का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने पर जोर दिया। उनका मानना है कि ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों के लोगों को इस टोल फ्री नंबर के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति जो मानसिक तनाव से गुजर रहा हो, वह घर बैठे विशेषज्ञ डॉक्टरों और काउंसलर्स से मुफ्त परामर्श ले सके।
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बाल स्वास्थ्य और कुपोषण पर सीधा प्रहार: संभव अभियान

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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) की समीक्षा के उपरांत, जिलाधिकारी ने उन मेडिकल टीमों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जिन्होंने बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार में उत्कृष्ट कार्य किया है।
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बैठक में विशेष रूप से गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM - Severe Acute Malnutrition) से ग्रसित बच्चों को चिन्हित करने के लिए चलाए जा रहे 'संभव अभियान' (Sambhav Abhiyan) की प्रगति पर भी चर्चा हुई। डीएम ने निर्देश दिए कि अभियान के तहत पात्र कुपोषित बच्चों की समय रहते पहचान की जाए, उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) भेजा जाए और उनके स्वास्थ्य में सुधार तक उनका नियमित फॉलोअप (Follow-up) किया जाए। वर्तमान में जिले के पोषण पुनर्वास केंद्रों में बेड ऑक्यूपेंसी दर 75 प्रतिशत पाई गई है, जिसे और बेहतर करने की गुंजाइश है।
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जननी सुरक्षा और परिवार कल्याण में प्रगति

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मातृत्व स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाली जननी सुरक्षा योजना (JSY) की समीक्षा में पाया गया कि जिले में कुल 6,511 डिलीवरी के सापेक्ष 4,918 लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जा चुका है। यह कुल लक्ष्य का 75.33 प्रतिशत है। डीएम ने कड़े शब्दों में कहा कि जो भी लाभार्थी शेष हैं, उन्हें नियमानुसार बिना किसी देरी के शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
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वहीं, परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक पुरुष नसबंदी के 07 तथा महिला नसबंदी के 729 मामले सामने आए हैं, जिसे लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
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एक नज़र में: स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख आंकड़े (2026)

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योजना / कार्यक्रम
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वर्तमान आंकड़े / प्रगति प्रतिशत
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एचपीवी टीकाकरण (19 अगस्त 2026 तक)
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77% उपलब्धि
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पूर्ण टीकाकरण (अप्रैल - जुलाई 2026)
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93% उपलब्धि
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उपचाराधीन क्षय (टीबी) रोगी
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8,189 रोगी
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निक्षय मित्र द्वारा गोद लिए गए रोगी
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7,506 रोगी
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जननी सुरक्षा योजना भुगतान
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75.33% (4,918 लाभार्थी)
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पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) ऑक्यूपेंसी
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75%
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टीबी उन्मूलन: निक्षय मित्रों का शानदार योगदान

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राष्ट्रीय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (टीबी मुक्त भारत) की समीक्षा करते हुए बताया गया कि वर्ष 2026 में अब तक 8,189 क्षय (TB) रोगियों का जिले में सफल उपचार चल रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें से 7,506 क्षय रोगियों को विभिन्न 'निश्चय मित्र' संस्थाओं, समाजसेवियों और अधिकारियों द्वारा गोद लिया गया है, जो उन्हें पोषण किट और मानसिक संबल प्रदान कर रहे हैं। डीएम ने निक्षय मित्र कार्यक्रम को और अधिक विस्तारित करने पर जोर दिया ताकि 100% मरीजों को इस योजना का लाभ मिल सके।
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डिजिटल फीडिंग से आएगी पारदर्शिता

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बैठक के अंत में, मुख्य विकास अधिकारी (CDO) ने सभी उपस्थित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा धरातल पर किए जा रहे सभी उत्कृष्ट कार्यों और डेटा की प्रगति को समय रहते ऑनलाइन पोर्टल्स पर फीड किया जाए। अक्सर जमीनी स्तर पर काम होता है, लेकिन ऑनलाइन फीडिंग न होने के कारण योजनाओं की वास्तविक प्रगति रिपोर्ट में नहीं दिखती। समय पर डेटा फीडिंग से विभागीय प्रगति प्रतिशत में अभूतपूर्व सुधार होगा।
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इस अहम बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. कौशलेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS), समस्त एमओआईसी (MOIC) और स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न नोडल अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
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