बिजनौर (विशेष संवाददाता): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद स्थित धामपुर (Dhampur) कस्बे से इस वक्त एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। यहां आस्था के प्रमुख केंद्र माने जाने वाले 'नासिर बाबा की ज़ियारत' (Nasir Baba Ziyarat) के रास्ते को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विवाद इतना गहरा गया है कि प्रशासन को हालात संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा है।READ ALSO:-बिजनौर का खौफनाक सच: प्यार, बगावत और मौत! रामगंगा नहर में कूदे प्रेमी युगल, 72 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मिला 24 वर्षीय बिलाल का शव
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अतिक्रमण और रास्ते के दावों को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनातनी के बाद, अब उत्तर प्रदेश सरकार का प्रसिद्ध 'बुलडोज़र एक्शन' (Bulldozer Action) देखने को मिल सकता है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और अवैध कब्जों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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क्या है पूरा विवाद? (नासिर बाबा की ज़ियारत का रास्ता)

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धामपुर कस्बे में स्थित नासिर बाबा की ज़ियारत पर अकीदतमंदों (श्रद्धालुओं) की भारी भीड़ उमड़ती है। यह स्थान स्थानीय लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है। जानकारी के अनुसार, यह विवाद अचानक नहीं पनपा है, बल्कि रास्ते पर अतिक्रमण और मालिकाना हक को लेकर सुगबुगाहट पहले से चल रही थी।
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विवाद के मुख्य बिंदु:

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    रास्ते पर अतिक्रमण का आरोप: स्थानीय श्रद्धालुओं और एक पक्ष का आरोप है कि ज़ियारत तक पहुंचने वाले मुख्य मार्ग पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर लिया गया है, जिससे वहां आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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    मालिकाना हक का दावा: वहीं, दूसरे पक्ष का दावा है कि संबंधित जमीन उनकी निजी संपत्ति (खतौनी की जमीन) है और वहां कोई सार्वजनिक रास्ता नहीं था।
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    अचानक बढ़ी तनातनी: मंगलवार को जब कुछ लोगों ने इस रास्ते का इस्तेमाल करने या उसे साफ करने का प्रयास किया, तो दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। देखते ही देखते विवाद ने बड़ा रूप ले लिया और मौके पर भीड़ जमा हो गई।
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पुलिस-प्रशासन अलर्ट: पूरा इलाका 'पुलिस छावनी' में तब्दील

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विवाद की भनक लगते ही पुलिस और प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। धार्मिक स्थल से जुड़ा मामला होने के कारण प्रशासन ने बिना कोई जोखिम उठाए तुरंत भारी पुलिस बल (Police Force) को मौके पर रवाना कर दिया।
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    सीओ और कोतवाल का मोर्चा: धामपुर के क्षेत्राधिकारी (CO) और स्थानीय थाना प्रभारी (Kotwal) अपनी पूरी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए हैं। पुलिस अधिकारियों ने तुरंत दोनों पक्षों को अलग किया और मौके पर भीड़ को तितर-बितर किया।
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    दंगा नियंत्रण उपकरण: मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी हेलमेट, डंडे और अन्य दंगा नियंत्रण उपकरणों (Riot control gear) से लैस हैं, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति या पथराव जैसी घटना से तुरंत निपटा जा सके।
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    पीएसी (PAC) की तैनाती: स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए एहतियातन पीएसी के जवानों को भी तैनात कर दिया गया है। पूरे इलाके में चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा है।
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पुलिस के आला अधिकारी लगातार लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से शांति बनाए रखने और अपने घरों में लौटने की अपील कर रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी ने भी कानून अपने हाथ में लेने की कोशिश की, तो उसके खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे सीधा जेल भेजा जाएगा।
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राजस्व विभाग की टीम सक्रिय: चल रही है पैमाइश (Land Measurement)

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इस पूरे विवाद की जड़ जमीन और रास्ता है, इसलिए इस मामले को सुलझाने के लिए राजस्व विभाग (Revenue Department) की टीम को तत्काल प्रभाव से मौके पर बुला लिया गया है।
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उपजिलाधिकारी (SDM) के निर्देश पर तहसीलदार और क्षेत्रीय लेखपाल अपनी राजस्व टीम के साथ घटनास्थल पर मौजूद हैं।
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    नक्शा और खतौनी की जांच: राजस्व विभाग की टीम जमीन के पुराने नक्शे (शजरा) और खतौनी के दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि वह विवादित जमीन सरकारी रास्ते (चकरोड) में दर्ज है या किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति है।
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    निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन: अधिकारियों ने दोनों पक्षों के जिम्मेदार लोगों को बुलाकर उनके दस्तावेज भी तलब किए हैं। प्रशासन का कहना है कि राजस्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर ही अगली कार्रवाई तय की जाएगी।
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'बुलडोज़र' का इंतज़ार: अतिक्रमणकारियों में मचा हड़कंप

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इस पूरी घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा 'बुलडोज़र' की हो रही है। उत्तर प्रदेश शासन की जीरो टॉलरेंस नीति (Zero Tolerance Policy) के तहत, प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के लिए भारी-भरकम जेसीबी मशीन (बुलडोज़र) को स्टैंडबाय (Standby) पर रखा हुआ है।
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प्रशासन का एक्शन प्लान
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विवरण
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पहला कदम
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राजस्व टीम द्वारा सरकारी दस्तावेजों से रास्ते की पैमाइश और पुष्टि।
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दूसरा कदम
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अगर अतिक्रमण साबित हुआ, तो संबंधित लोगों को तुरंत हटने की चेतावनी।
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तीसरा और अंतिम कदम
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चेतावनी न मानने पर पुलिस बल की मौजूदगी में 'बुलडोज़र' द्वारा अतिक्रमण का ध्वस्तीकरण।
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बुलडोज़र मंगाए जाने की सूचना मिलते ही उन लोगों में भारी हड़कंप मच गया है, जिन पर अवैध कब्जे का आरोप है। स्थानीय लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राजस्व विभाग की रिपोर्ट क्या आती है और क्या प्रशासन वाकई बुलडोज़र चलाकर रास्ते को कब्जामुक्त कराएगा?
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शांति समिति की बैठक और आगे की रणनीति

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तनाव को कम करने के लिए प्रशासन ने धामपुर के संभ्रांत नागरिकों, दोनों समुदायों के धर्मगुरुओं और जनप्रतिनिधियों के साथ मौके पर ही एक शांति वार्ता (Peace Meeting) भी आयोजित की है। सीओ और कोतवाल ने सभी से अपील की है कि वे अफवाहों पर बिल्कुल भी ध्यान न दें और सोशल मीडिया पर कोई भी भ्रामक पोस्ट शेयर न करें।
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अधिकारियों का सख्त संदेश:

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मौके पर मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा है, "स्थिति पूरी तरह से हमारे नियंत्रण में है। राजस्व विभाग अपना काम कर रहा है। नासिर बाबा की ज़ियारत के रास्ते पर अगर किसी भी प्रकार का कोई अवैध अतिक्रमण पाया गया, तो उसे सख्ती से हटाया जाएगा। कानून व्यवस्था सर्वोच्च है और इसके साथ समझौता नहीं किया जाएगा।"
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फिलहाल, धामपुर के इस इलाके में सन्नाटा पसरा है और लोगों में भारी उत्सुकता है। पुलिस की गाड़ियां लगातार गश्त कर रही हैं और राजस्व विभाग की रिपोर्ट के साथ ही बुलडोज़र के एक्शन का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले कुछ घंटे धामपुर की स्थिति के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं। प्रशासन की मुस्तैदी ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि स्थिति किसी भी कीमत पर बिगड़ने नहीं दी जाएगी।
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