रिपोर्टर: शकील अहमद | बिजनौर / धामपुर
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बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद स्थित धामपुर में सोमवार का दिन भारी राजनीतिक सरगर्मी और गहमागहमी के नाम रहा। देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले ऐतिहासिक 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (Women's Reservation Bill) के विरोध को लेकर स्थानीय राजनीति पूरी तरह से गरमा गई है। इस कानून का विरोध करने वाले नेताओं के खिलाफ अब महिलाओं ने ही मोर्चा खोल दिया है।READ ALSO:-बिजनौर की महिलाओं के लिए 'न्याय का दिन': 14 मई को विकास भवन में सजेगा महिला आयोग का दरबार, पीड़ितों को मिलेगा ऑन-द-स्पॉट इंसाफ!
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इसी कड़ी में सोमवार को बिजनौर के धामपुर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के महिला मोर्चा का गुस्सा खुलकर सड़कों पर आ गया। बड़ी संख्या में उग्र महिला कार्यकर्ताओं ने नगीना लोकसभा सीट से सांसद एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद (MP Chandrashekhar Azad) के आवास का घेराव कर जोरदार और अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। महिलाओं के इस उग्र रूप और भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल गए और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
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सांसद आवास पर भारी तनाव, बंद करने पड़े मुख्य गेट

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सोमवार सुबह से ही धामपुर की सड़कों पर भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं का हुजूम जुटना शुरू हो गया था। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए, 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के समर्थन में जोरदार नारेबाजी करती हुई ये महिलाएं सीधा सांसद चंद्रशेखर आजाद के आवास की ओर कूच कर गईं।
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महिलाओं का आक्रोश इस कदर था कि वे सांसद आवास के मुख्य द्वार तक जा पहुंचीं। स्थिति की गंभीरता और संभावित टकराव को भांपते हुए प्रशासन ने तुरंत सांसद आवास का मुख्य गेट अंदर से बंद करवा दिया। सुरक्षा के मद्देनजर सांसद के घर के बाहर और आस-पास के पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। चप्पे-चप्पे पर पुलिस के जवान और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी, ताकि प्रदर्शनकारी महिलाएं आवास के अंदर प्रवेश न कर सकें। इस दौरान महिला कार्यकर्ताओं और पुलिस प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। पूरा इलाका "नारी शक्ति जिंदाबाद" और सांसद के विरोध में लगाए जा रहे नारों से गूंज उठा।
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"राजनीतिक जमीन खिसकने के डर से कर रहे हैं विरोध" - रश्मि रावल

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इस उग्र प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा, उत्तर प्रदेश की प्रदेश महामंत्री श्रीमती रश्मि रावल ने सांसद और विपक्षी नेताओं पर जमकर तीखे प्रहार किए। प्रदर्शन स्थल पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' कोई साधारण कानून नहीं है, बल्कि यह सदियों से हाशिए पर रखी गई महिलाओं को मुख्यधारा की राजनीति में लाने और उन्हें उनका जायज हक दिलाने वाला एक ऐतिहासिक कदम है।
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रश्मि रावल ने कड़े शब्दों में आरोप लगाते हुए कहा, "महिलाओं को राजनीतिक हिस्सेदारी देने वाले इस ऐतिहासिक कानून का विरोध करना सीधे तौर पर महिला सम्मान और उनके अधिकारों के खिलाफ है। जो लोग आज खुद को वंचितों का नेता कहते हैं, वही लोग आज महिलाओं के हकों पर डाका डालना चाहते हैं। असल सच्चाई यह है कि कुछ नेताओं को यह डर सता रहा है कि अगर महिलाएं राजनीति में सशक्त होकर आगे आ गईं, तो उनकी खुद की राजनीतिक जमीन खिसक जाएगी। इसी डर और बौखलाहट में वे संसद से लेकर सड़क तक महिला आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, जिसे देश और प्रदेश की महिलाएं किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगी।" (बाईट संलग्न)
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"यह महिलाओं के अधिकार और सम्मान की लड़ाई है" - लीना सिंघल

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प्रदर्शन में शामिल पूर्व चेयरमैन और भाजपा की कद्दावर नेत्री लीना सिंघल ने भी इस मौके पर अपनी बुलंद आवाज दर्ज कराई। उन्होंने आक्रोशित भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि आज की महिला अब चुप बैठने वाली नहीं है।
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लीना सिंघल ने कहा, "महिला आरक्षण कोई खैरात नहीं है, यह हमारे अधिकारों और हमारे आत्मसम्मान की लड़ाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने जो साहस दिखाते हुए इस बिल को पास कराया है, वह भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। लेकिन यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे ही क्षेत्र के जनप्रतिनिधि इस प्रगतिशील कानून की राह में रोड़ा अटकाने का प्रयास कर रहे हैं। हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि महिला सम्मान और उनके राजनीतिक अधिकारों का विरोध किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि सांसद महोदय ने अपना जनविरोधी और महिला विरोधी रुख नहीं बदला, तो हमारा यह आंदोलन और अधिक उग्र होगा।"
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पुलिस प्रशासन रहा पूरी तरह मुस्तैद, खुफिया विभाग भी सतर्क

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धामपुर में हुए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रशासन की भूमिका बेहद चुनौतीपूर्ण रही। भाजपा महिला मोर्चे की भीड़ और उनके आक्रोश को देखते हुए स्थानीय थाने की पुलिस के अलावा अतिरिक्त पुलिस बल भी बुला लिया गया था।
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महिला पुलिसकर्मियों की एक बड़ी टुकड़ी ने प्रदर्शनकारी महिलाओं को सांसद आवास के मुख्य गेट से दूर रखने के लिए मानव श्रृंखला (Human Chain) बना रखी थी। घंटों चले इस प्रदर्शन के दौरान कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की नौबत भी आई, लेकिन पुलिस ने संयम बरतते हुए स्थिति को नियंत्रण से बाहर नहीं जाने दिया। स्थानीय खुफिया विभाग (LIU) भी मौके पर मौजूद रहकर पल-पल की रिपोर्ट आला अधिकारियों को भेजता रहा।
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क्या हैं इस राजनीतिक संग्राम के मायने?

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बिजनौर और आस-पास के राजनीतिक समीकरणों (Political Dynamics of Bijnor) के लिहाज से यह प्रदर्शन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद अपनी आक्रामक राजनीति के लिए जाने जाते हैं, लेकिन महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर भाजपा ने उन्हें उन्हीं के गढ़ (धामपुर) में घेरने की जो यह रणनीति बनाई है, वह आने वाले समय में जिले की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है।
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भाजपा महिला मोर्चा ने इस प्रदर्शन के जरिए न केवल अपनी सांगठनिक ताकत का अहसास कराया है, बल्कि यह संदेश भी स्पष्ट रूप से दे दिया है कि 'नारी शक्ति' के मुद्दे पर भाजपा पूरी तरह से आक्रामक मोड (Aggressive Mode) में है और विपक्ष को बैकफुट पर धकेलने के लिए तैयार है। फिलहाल, धामपुर में सांसद आवास के बाहर हुआ यह प्रदर्शन पूरे जनपद में चर्चा का विषय बना हुआ है और राजनीतिक गलियारों में इसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देने वाली है।
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