उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) जिले से एक बेहद सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली आपराधिक घटना सामने आई है। दोस्ती के नाम पर धोखे और कत्ल की इस वारदात ने पूरे स्योहारा (Seohara) क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। एक पिता पिछले छह दिनों से दर-दर भटक कर अपने 22 साल के जवान बेटे को तलाश रहा था, लेकिन बुधवार की सुबह उसकी उम्मीदें तब हमेशा के लिए टूट गईं, जब बेटे की लाश बेरखेड़ा के जंगलों में लावारिस हालत में पड़ी मिली। पुलिस ने इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आइए जानते हैं कि 17 अप्रैल की सुबह से लेकर शव मिलने तक आखिर क्या-क्या हुआ।READ ALSO:-दिल्ली के पॉश इलाके में खौफनाक वारदात: पूर्व नौकर ने IRS अफसर की बेटी का किया रेप और मर्डर, 8 घंटे पहले अलवर में भी की थी दरिंदगी
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17 अप्रैल की वो मनहूस सुबह: जब घर से निकला था मोनू

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पुलिस में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट और परिजनों के बयानों के अनुसार, यह पूरी खौफनाक कहानी 17 अप्रैल से शुरू होती है। स्योहारा क्षेत्र के ग्राम निवासी सुरेन्द्र सिंह का 22 वर्षीय बेटा मनोज कुमार, जिसे प्यार से सभी 'मोनू' बुलाते थे, एक बेहद सीधा-सादा और होनहार युवक था।
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17 अप्रैल की सुबह करीब 10 बजे वह अपनी काले रंग की स्प्लेंडर बाइक (Splendor Bike) पर सवार होकर घर से किसी काम के लिए स्योहारा कस्बे की तरफ निकला था। जाते वक्त उसने परिवार को जल्द लौटने की बात कही थी। लेकिन जब दोपहर से शाम और शाम से रात हो गई, तो घर वालों की चिंता बढ़ने लगी। मोनू का मोबाइल फोन भी लगातार 'स्विच ऑफ' या पहुंच से बाहर (Out of Reach) बता रहा था। परिजनों ने अपने स्तर पर रिश्तेदारों और दोस्तों के यहां काफी खोजबीन की, लेकिन मोनू का कोई सुराग नहीं मिला। अनहोनी की आशंका से घबराए परिवार ने पुलिस थाने जाकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
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रामगंगा पुल और परचून की दुकान: वो 'आखिरी सुराग'

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थाना स्योहारा पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जब तफ्तीश शुरू की, तो सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय लोगों की पूछताछ में एक बेहद अहम सुराग हाथ लगा।
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जांच में यह बात साफ हुई कि मनोज उर्फ मोनू को आखिरी बार ठाकुरद्वारा रोड पर स्थित 'रामगंगा पुल' के पास एक परचून (किराने) की दुकान पर देखा गया था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह थी कि वह वहां अकेला नहीं था। दुकान के आसपास मौजूद चश्मदीदों ने बताया कि मोनू के साथ दो और अज्ञात युवक मौजूद थे। जब उन युवकों के बारे में पूछताछ की गई, तो पता चला कि वे दोनों खुद को मोनू का बहुत करीबी 'दोस्त' बता रहे थे। वे आपस में बातचीत कर रहे थे और इसके बाद से ही मोनू अपनी बाइक समेत रहस्यमयी परिस्थितियों में गायब हो गया था। पुलिस का शक अब यकीन में बदलने लगा था कि मोनू के गायब होने के पीछे इन्हीं तथाकथित दोस्तों का हाथ है।
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गुमशुदगी बनी 'संगठित अपराध', और फिर मिला शव

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जैसे-जैसे दिन बीत रहे थे, पुलिस का दबाव बढ़ता जा रहा था। मामले के सुरागों को जोड़ते हुए स्योहारा पुलिस ने इस गुमशुदगी को हल्के में लेने के बजाय 'संगठित अपराध' (Organized Crime) की धाराओं में तब्दील कर दिया और अपनी कई टीमें जंगल और आसपास के संदिग्ध ठिकानों पर लगा दीं।
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बुधवार की सुबह स्योहारा इलाके में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब स्थानीय ग्रामीणों ने बेरखेड़ा के जंगलों में एक सड़ी-गली और संदिग्ध अवस्था में लाश पड़ी देखी। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस टीम और फोरेंसिक विशेषज्ञों ने जब शव की शिनाख्त कराई, तो परिवार की चीखें निकल पड़ीं। वह शव 17 अप्रैल से लापता उसी मनोज उर्फ मोनू का था। शव को देखकर साफ लग रहा था कि उसकी बेरहमी से हत्या की गई है और सुबूत मिटाने के मकसद से लाश को जंगल के सन्नाटे में फेंक दिया गया था।
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पुलिस का त्वरित एक्शन: 2 'कातिल दोस्त' गिरफ्तार

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शव मिलने के बाद बिजनौर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले का जल्द से जल्द खुलासा करने के निर्देश दिए। रामगंगा पुल के पास मिले सुराग और सर्विलांस टीम की मदद से पुलिस ने कातिलों के गिरेबान तक हाथ डाल ही दिया।
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पुलिस ने त्वरित कार्रवाई (Quick Action) करते हुए इस नृशंस हत्याकांड में शामिल दो मुख्य आरोपियों को धर दबोचा है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
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    अर्जुन: निवासी - शरीफपुर (थाना स्योहारा क्षेत्र)
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    नितिन: निवासी - खुर्द नवादा (थाना स्योहारा क्षेत्र)
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पुलिस की शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूलने के संकेत दिए हैं। पुलिस ने पंचनामा भरकर मनोज के शव को पोस्टमार्टम (Postmortem) के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है, ताकि हत्या के सही समय और तरीके (गला घोंटा गया या किसी हथियार से वार किया गया) की सटीक मेडिकल पुष्टि हो सके।
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अनसुलझे सवाल: आखिर हत्या की वजह क्या थी?
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यद्यपि पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन पूरे स्योहारा कस्बे में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि आखिर 22 साल के मोनू की हत्या क्यों की गई? क्या यह हत्या पुरानी रंजिश का नतीजा है? क्या स्प्लेंडर बाइक और पैसों की लूट के इरादे से दोस्तों ने ही गद्दारी की? या इसके पीछे कोई लेन-देन या त्रिकोणीय प्रेम प्रसंग (Love Triangle) का मामला है? पुलिस इस समय इन सभी एंगल्स (Angles) पर अर्जुन और नितिन से कड़ाई से पूछताछ कर रही है। उम्मीद है कि जल्द ही बिजनौर पुलिस एक प्रेस कॉन्फ्रेंस (Press Conference) करके इस हत्याकांड के पीछे की असली और खौफनाक वजह का बड़ा खुलासा करेगी।
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परिवार में कोहराम, गांव में पसरा मातम और आक्रोश
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इस दर्दनाक घटना ने सुरेन्द्र सिंह के परिवार को पूरी तरह से तोड़ कर रख दिया है। जवान बेटे की लाश देखकर मां बेसुध हो गई है और परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव बेरखेड़ा और आसपास के क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है।
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शोक के साथ-साथ ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में हत्यारों के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों की मांग है कि आरोपियों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Fast-track Court) में मुकदमा चलाकर उन्हें फांसी की सजा दी जाए। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आज के दौर में सिर्फ पहचान होने पर किसी पर भी अंधा भरोसा करना कितना जानलेवा साबित हो सकता है। पुलिस ने इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियातन अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है और मामले की गहराई से तहकीकात जारी है।
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