उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। यह मामला सिर्फ एक सामान्य आत्महत्या का नहीं है, बल्कि इसके तार आधुनिक साइबर अपराध और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी गंभीर और डरावनी साजिशों से जुड़े हुए नजर आ रहे हैं। हाल ही में सामने आए बिजनौर सुसाइड केस ने पुलिस प्रशासन से लेकर आम जनता तक को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि साइबर ठग किस हद तक मानसिक उत्पीड़न कर सकते हैं। कोतवाली शहर क्षेत्र के फरीदपुर भोगी गांव में एक 28 वर्षीय महिला ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। शुरुआती दौर में परिजनों ने इसे एक सामान्य घरेलू विवाद या मानसिक तनाव समझकर बिना पुलिस को सूचना दिए मृतका का अंतिम संस्कार कर दिया। लेकिन कहानी में असली मोड़ तब आया जब चिता जलने के दौरान श्मशान घाट पर एक वीडियो कॉल आई और बाद में घर के कमरे से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ। आइए, इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।Read also:-RBI का करोड़ों क्रेडिट कार्ड यूजर्स को बड़ा तोहफा: ड्यू डेट मिस होने पर अब नहीं लगेगा भारी जुर्माना, मिलेगी 3 दिन की 'ग्रेस' मोहलत!
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बिजनौर सुसाइड केस: क्या है पूरा घटनाक्रम?

\r\n\r\n
बिजनौर के फरीदपुर भोगी गांव के रहने वाले रणवीर सिंह (कुछ रिपोर्टों में रणधीर) की 28 वर्षीय पत्नी मोनिका ने 27 और 28 अप्रैल की दरमियानी रात अपने घर के कमरे में दुपट्टे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के समय महिला की दो मासूम बेटियां—8 वर्षीय जिया और 11 वर्षीय नंदनी—उसी कमरे में एक चारपाई पर सो रही थीं। सुबह जब दोनों बच्चियां उठीं, तो अपनी मां को फंदे पर लटका देख उनकी चीख निकल गई। बच्चियों के रोने की आवाज सुनकर परिवार के अन्य सदस्य कमरे में दौड़े और वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
ग्रामीणों और परिवार वालों के बीच लोकलाज का डर इस कदर हावी था कि उन्होंने पुलिस को इस घटना की कोई जानकारी नहीं दी। परिवार ने आनन-फानन में मायके पक्ष को सूचना दी और शव का अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। लेकिन, इस बिजनौर सुसाइड केस की गुत्थी यहीं खत्म नहीं हुई। श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया चल ही रही थी कि मोनिका के मोबाइल फोन पर एक अनजान नंबर से लगातार कॉल आने लगीं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

श्मशान घाट पर आए वीडियो कॉल ने खोली पोल

\r\n\r\n
मृतका के भतीजे ने जब लगातार बज रहे फोन को उठाया, तो वह एक वीडियो कॉल थी। कॉल के दूसरी तरफ एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी पहने बैठा था। उस वर्दीधारी शख्स ने खुद को क्राइम ब्रांच का बड़ा अधिकारी बताते हुए रौब झाड़ना शुरू कर दिया। उसने मृतका मोनिका से बात कराने की जिद की और जब भतीजे ने कहा कि उसकी तो मौत हो चुकी है और वे श्मशान में हैं, तो कथित अधिकारी भड़क गया। उसने परिवार को गंभीर कानूनी कार्रवाई और जेल भेजने की धमकियां देनी शुरू कर दीं।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
इस संदिग्ध कॉल के बाद परिजनों का माथा ठनका। उन्हें एहसास हुआ कि मोनिका की मौत के पीछे कोई बहुत बड़ी साजिश या ब्लैकमेलिंग का खेल चल रहा है। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने के बाद जब परिजन घर लौटे, तो उन्होंने उस कमरे की सघन तलाशी ली, जहां मोनिका ने अपनी जान दी थी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

सुसाइड नोट में छिपा था खौफनाक सच

\r\n\r\n
कमरे की तलाशी के दौरान परिजनों को एक डायरी मिली, जिसके पन्नों के बीच एक सुसाइड नोट रखा हुआ था। इस पत्र ने बिजनौर सुसाइड केस को पूरी तरह से एक नया एंगल दे दिया। मोनिका ने अपने सुसाइड नोट में अपने पति रणवीर और परिवार वालों से माफी मांगते हुए लिखा था कि वह भारी मानसिक दबाव में है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
पत्र में उसने स्पष्ट रूप से जिक्र किया था कि एक अज्ञात युवक उसे लगातार फोन और मैसेज के जरिए ब्लैकमेल कर रहा है। वह उसे और उसके परिवार को बर्बाद करने की धमकियां दे रहा था। इस उत्पीड़न का जिक्र पत्र में दो बार किया गया था। सुसाइड नोट में यह भी लिखा था कि आरोपी खुद को कभी क्राइम ब्रांच का अधिकारी तो कभी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर डराता था। महिला ने यह भी लिखा कि वह यह सारी बातें अपने पति या किसी और को नहीं बता पा रही थी, क्योंकि उसे अपने परिवार और बच्चों की जान का खतरा सता रहा था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बिजनौर सुसाइड केस और 'डिजिटल अरेस्ट' का बढ़ता खौफ

\r\n\r\n
इस पूरे मामले में जो सबसे बड़ा और खतरनाक पहलू उभर कर सामने आया है, वह है 'डिजिटल अरेस्ट'। साइबर ठगों ने एक ऐसा मनोवैज्ञानिक जाल बुना, जिसमें मोनिका पूरी तरह से फंस गई। गांव में और पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में यह चर्चा आम है कि महिला को साइबर अपराधियों ने 'डिजिटल अरेस्ट' कर रखा था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
डिजिटल अरेस्ट एक नए प्रकार का साइबर अपराध है, जिसमें अपराधी पीड़ित को फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से यह विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी गंभीर अपराध में लिप्त है और पुलिस या सीबीआई उसके खिलाफ वारंट निकाल चुकी है। पीड़ित को कैमरे के सामने रहने और किसी से संपर्क न करने की हिदायत दी जाती है। इस बिजनौर सुसाइड केस में भी साइबर ठगों ने मोनिका को इसी तरह से डराकर ब्लैकमेल किया। उन्होंने न केवल उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, बल्कि पैसों की भी मांग की। डर और दहशत के कारण महिला ने अपनी जान देना ही एकमात्र रास्ता समझा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
आत्महत्या करने से कुछ घंटे पहले मोनिका ने अपने मायके में वीडियो कॉल भी की थी। उस कॉल के दौरान वह लगातार रो रही थी, लेकिन परिजनों ने इसे पति-पत्नी के बीच का कोई सामान्य विवाद समझकर इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। यदि उस वक्त परिवार ने उसके आंसुओं के पीछे का असली कारण जानने की कोशिश की होती, तो शायद आज मोनिका जिंदा होती।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

एसपी अभिषेक झा का बयान और पुलिस की त्वरित कार्रवाई

\r\n\r\n
सुसाइड नोट मिलने और श्मशान में आए वीडियो कॉल के बाद, मृतका के पति रणवीर सिंह ने शहर कोतवाली पुलिस का रुख किया। रणवीर ने पुलिस को एक लिखित तहरीर दी, जिसमें पूरी घटना का विस्तार से वर्णन था। साथ ही, उन्होंने पुलिस को वे तीन मोबाइल नंबर भी सौंपे, जिनसे मोनिका के फोन पर लगातार धमकियों और ब्लैकमेलिंग के कॉल आ रहे थे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस संवेदनशील मामले पर बात करते हुए बिजनौर के एसपी अभिषेक झा ने बताया कि पुलिस को 28 अप्रैल की सुबह महिला की आत्महत्या की कोई सूचना नहीं दी गई थी, जिस कारण परिजनों ने बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया था। एसपी ने आगे कहा, "परिजनों ने बाद में सुसाइड नोट मिलने की जानकारी दी है। पत्र में एक युवक द्वारा परेशान किए जाने का जिक्र है और परिजनों ने इस घटना में साइबर अपराध की आशंका भी जताई है। पति की तहरीर के आधार पर सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। सर्विलांस और साइबर सेल की टीमें उन सभी नंबरों की गहनता से जांच कर रही हैं। हम जल्द ही आरोपियों को ट्रेस कर सलाखों के पीछे भेजेंगे।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

इस घटना से हमें क्या सीख लेनी चाहिए?

\r\n\r\n
बिजनौर सुसाइड केस हमारे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। साइबर अपराधी अब केवल बैंक खातों से पैसे ही नहीं चुरा रहे हैं, बल्कि लोगों की जान के भी दुश्मन बन बैठे हैं। डिजिटल अरेस्ट या फोन पर पुलिस अधिकारी बनकर धमकाने वाले कॉल्स से घबराने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
यदि आपके पास ऐसा कोई कॉल आता है, तो तुरंत अपने परिवार वालों को इसकी जानकारी दें। भारत की कोई भी जांच एजेंसी (चाहे वह पुलिस हो, सीबीआई हो या क्राइम ब्रांच) कभी भी व्हाट्सएप वीडियो कॉल या स्काइप के माध्यम से किसी को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती है और न ही ऑनलाइन पैसों की मांग करती है। ऐसी धमकियां मिलने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (1930) पर कॉल करें या अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर शिकायत दर्ज कराएं।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अंत में, बिजनौर सुसाइड केस ने यह साबित कर दिया है कि साइबर ठगी और ब्लैकमेलिंग के तरीके अब बेहद खतरनाक और जानलेवा हो चुके हैं। मोनिका जैसी एक बेगुनाह महिला का डर के साये में आकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर लेना, सिस्टम और समाज दोनों के लिए एक बड़ा सवाल है। पुलिस और साइबर सेल अब इस मामले की तह तक जाने में जुटे हैं, ताकि उस वर्दीधारी बहरूपिए और उसके पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जा सके। इस घटना से यह सबक मिलता है कि हमें अपने परिवार के सदस्यों से संवाद बनाए रखना चाहिए, ताकि कोई भी मानसिक दबाव में आकर इतना खौफनाक और आत्मघाती कदम न उठाए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
बिजनौर के फरीदपुर भोगी गांव में 28 वर्षीय मोनिका ने साइबर ठगों द्वारा किए गए 'डिजिटल अरेस्ट' और लगातार मिल रही ब्लैकमेलिंग की धमकियों से तंग आकर अपनी जान दे दी। अंतिम संस्कार के समय एक फर्जी पुलिस अधिकारी की वीडियो कॉल और कमरे से मिले सुसाइड नोट ने इस रहस्य से पर्दा उठाया। फिलहाल, बिजनौर पुलिस ने मृतका के पति की तहरीर पर मामला दर्ज कर लिया है और साइबर सेल की मदद से आरोपियों की सरगर्मी से तलाश कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें