बिजनौर (Social & Local News Desk): भारत की असली पहचान उसकी 'गंगा-जमुनी तहज़ीब' और अनेकता में एकता है। वर्तमान समय में जब समाज में दूरियां बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं, तब आपसी भाईचारे और सौहार्द को मजबूत करने की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ जाती है। इसी नेक और पवित्र उद्देश्य को लेकर रविवार दोपहर बिजनौर शहर के काज़ी पाड़ा स्थित जमीयत उलेमा जिला बिजनौर के कार्यालय में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।READ ALSO:-जुलाई के महीने में आसमान से 'गायब' हुआ मॉनसून! IMD का बड़ा अलर्ट- 17 जुलाई तक नहीं होगी बारिश, सताएगी 'अप्रैल' जैसी झुलसाने वाली गर्मी
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यहाँ जमीयत के तत्वावधान में नवगठित 'सद्भावना मंच' (Sadbhavana Manch) की एक विस्तृत परिचय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य विषय (Theme) 'भारत संवाद' रखा गया था, जिसका सीधा अर्थ है— देश के नागरिकों के बीच दिलों की दूरियां मिटाकर एक सकारात्मक और प्रेमपूर्ण संवाद स्थापित करना। कार्यक्रम में हिंदू-मुस्लिम समाज के कई गणमान्य लोगों, उलेमाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक मंच पर आकर देश की तरक्की और सामाजिक बुराइयों को जड़ से मिटाने का संकल्प लिया।
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कुरआन की तिलावत और नात-ए-रसूल से हुई पवित्र शुरुआत

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किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत ईश्वर के स्मरण से होती है। इस ऐतिहासिक परिचय बैठक का शुभारंभ भी बेहद रूहानी और शांतिपूर्ण माहौल में कुरआन शरीफ की तिलावत (पाठ) के साथ किया गया। इसके पश्चात् पैगंबर मोहम्मद (स.) की शान में नात-ए-रसूल पेश की गई, जिसने वहां मौजूद सभी धर्मों के लोगों के दिलों में एक आध्यात्मिक ऊर्जा और सुकून का संचार किया।
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कार्यक्रम के शुरुआती चरण में मंच के मुख्य ऑर्गेनाइज़र मौलाना मोहम्मद कलीमुज़्ज़माँ क़ासमी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने वहां उपस्थित सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और 'सद्भावना मंच' की स्थापना के मूल उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। मौलाना क़ासमी ने मंच के विजन को स्पष्ट करते हुए नवगठित जिला समिति के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों का औपचारिक परिचय कराया, ताकि संगठन की रूपरेखा और कार्यप्रणाली सभी के सामने स्पष्ट हो सके।
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मानव सेवा और शांति है जमीयत उलेमा-ए-हिंद का इतिहास

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बैठक को संबोधित करते हुए जमीयत उलेमा जिला बिजनौर के मुख्य सचिव मुफ़्ती शम्सुद्दीन क़ासमी ने एक बेहद प्रभावशाली और सारगर्भित भाषण दिया। उन्होंने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कहा कि यह संगठन स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक हमेशा देश की भलाई के लिए खड़ा रहा है।
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मुफ़्ती शम्सुद्दीन क़ासमी ने कहा, "जमीयत उलेमा-ए-हिंद का इतिहास इस बात का गवाह है कि हमने हमेशा देश में शांति, भाईचारे, राष्ट्रीय एकता और बिना किसी भेदभाव के मानव सेवा (Humanity) के लिए कार्य किया है। आज समाज में फैली गलतफहमियों को दूर करने के लिए 'सद्भावना मंच' का गठन किया गया है। यह मंच इसी विचारधारा को समाज के हर वर्ग और हर घर तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।" उन्होंने जोर देकर कहा कि नफरत का जवाब नफरत नहीं, बल्कि सिर्फ मोहब्बत हो सकती है।
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'सरल हिंदी भाषा' में जन-जन तक पहुंचेगा पैगाम

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इस परिचय बैठक के मुख्य वक्ता एवं उत्तर प्रदेश सद्भावना मंच के प्रांतीय संयोजक मौलाना मोहम्मद मूसा ने मंच की भावी गतिविधियों, दीर्घकालिक उद्देश्यों और संगठनात्मक कार्यप्रणाली की जानकारी साझा की। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से पूरे जोश और लगन के साथ इस शांति मिशन को जन-जन तक पहुंचाने का जोरदार आह्वान किया।
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इसी बीच, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सचिव मौलाना मोहम्मद तैय्यब क़ासमी सैढ़वी ने एक बेहद व्यावहारिक और महत्वपूर्ण सुझाव मंच के सामने रखा। उन्होंने कहा कि अक्सर उर्दू या अरबी के कठिन शब्दों के कारण बहुसंख्यक समाज तक संगठन का असली संदेश नहीं पहुंच पाता। इसलिए, उन्होंने सुझाव दिया कि "सद्भावना मंच के उद्देश्यों, साहित्य और संदेशों को 'सरल और आम बोलचाल की हिंदी भाषा' में तैयार किया जाए।" इससे समाज का हर तबका—चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो— आसानी से इस मंच की विचारधारा को समझ सकेगा और इससे जुड़ सकेगा। इस सुझाव का उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि से स्वागत किया।
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पूर्व सांसद ने की सराहना: 'मानव सेवा का सच्चा मंच'

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इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नगीना लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद (Ex-MP) यशवीर सिंह धोबी ने शिरकत की। एक गैर-मुस्लिम राजनीतिक और सामाजिक चेहरे के रूप में उनकी उपस्थिति ने 'सद्भावना मंच' के धर्मनिरपेक्ष (Secular) स्वरूप को और भी मजबूत किया।
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पूर्व सांसद यशवीर सिंह ने अपने संबोधन में सद्भावना मंच की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा, "आज के दौर में ऐसे मंचों की सख्त जरूरत है। यह मंच न केवल प्रेम और भाईचारे की बात कर रहा है, बल्कि नशामुक्ति (De-addiction), स्वच्छता अभियान, सामाजिक समरसता और शिक्षा के क्षेत्र में जो ब्लूप्रिंट तैयार कर रहा है, वह बेहद सराहनीय है।" उन्होंने खुले मंच से आश्वासन दिया कि सामाजिक भलाई के इस महायज्ञ में वे और उनके समर्थक सद्भावना मंच को हरसंभव तन-मन-धन से सहयोग प्रदान करेंगे।
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सामाजिक जागरूकता और नशामुक्ति का लिया गया संकल्प

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'भारत संवाद' की यह बैठक केवल भाषणों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई सदस्यों ने अपने जमीनी विचार बेबाकी से रखे।
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बैठक में राजकुमार उर्फ राजू, गुलशन कुमार, विजेंद्र कुमार, वेद सोलंकी, आदेश कुमार, साहिल मेहरा, उदित राज शर्मा, मौलाना शहाबुद्दीन मज़ाहिरी और बिजनौर के पूर्व चेयरमैन शहज़ाद सहित कई प्रमुख वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। इन सभी वक्ताओं के भाषणों का मुख्य सार एक ही था— 'सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एकजुटता।'
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सभी ने एक स्वर में कहा कि आज हमारे युवाओं को नशा खोखला कर रहा है, शिक्षा का स्तर गिर रहा है और बेवजह की नफरत समाज को बांट रही है। इसे रोकने के लिए सद्भावना मंच को गांव-गांव और मोहल्ले-मोहल्ले जाकर सक्रिय होना होगा। शिक्षा के प्रति जागरूकता, नशामुक्ति अभियान और आपसी भाईचारे (Communal Harmony) को मजबूत करना ही इस मंच का प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए।
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ईमानदारी और सेवा भावना: अध्यक्ष का अंतिम संदेश

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कार्यक्रम के अंतिम चरण में बैठक की अध्यक्षता कर रहे जमीयत उलेमा जिला बिजनौर के अध्यक्ष मुफ़्ती ओवैस अकरम ने अपना अध्यक्षीय भाषण (Presidential Address) दिया।
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उन्होंने पूरी बैठक के सार को समेटते हुए सभी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और उलेमाओं से अपील की कि वे पूरी ईमानदारी, अटूट एकता और निस्वार्थ सेवा भावना के साथ समाजहित में जुट जाएं। उन्होंने कहा कि "जब नीयत साफ हो और मकसद इंसानियत की भलाई हो, तो खुदा भी उस काम में बरकत देता है।"
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अंत में देश की तरक्की, अमन-चैन और विश्व शांति के लिए सामूहिक दुआ (प्रार्थना) के साथ इस भव्य 'भारत संवाद' परिचय बैठक का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम में संगठन के तमाम पदाधिकारियों, उलेमा-ए-कराम, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शहर के गणमान्य नागरिकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि बिजनौर की अवाम आज भी शांति, सद्भाव और आपसी भाईचारे की ही पक्षधर है।
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