नूरपुर, 23 जून 2026: भारत वर्ष त्योहारों और विविध संस्कृतियों का देश है, जहां हर पर्व आपसी भाईचारे, प्रेम और सद्भाव का संदेश लेकर आता है। आगामी मुहर्रम पर्व को इसी गरिमा, शांति और गंगा-जमुनी तहजीब के साथ संपन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद और अलर्ट मोड पर आ गया है। इसी क्रम में आज, मंगलवार दिनांक 23 जून 2026 को, थाना नूरपुर परिसर में पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों और क्षेत्र के संभ्रांत नागरिकों के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण 'शांति समिति' (Peace Committee) की बैठक का आयोजन किया गया।READ ALSO:-शामली में बड़ा साइबर भंडाफोड़: यूट्यूब से सीखी 'ठगी की पाठशाला', कई राज्यों में बिछाया जाल; शातिर मास्टरमाइंड गिरफ्तार
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इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्री प्रकाश कुमार तथा क्षेत्राधिकारी (CO) चांदपुर द्वारा संयुक्त रूप से की गई। बैठक में क्षेत्र के विभिन्न अखाड़ों के खलीफा, जुलूस कमेटियों के पदाधिकारी, आयोजक, धर्मगुरु और दोनों समुदायों के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य मुहर्रम के दौरान निकलने वाले ताज़ियों और जुलूसों को पूरी तरह से सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराना है।
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बैठक का मुख्य एजेंडा: आपसी समन्वय और कानून-व्यवस्था

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मुहर्रम का महीना त्याग और बलिदान का प्रतीक है, और इस दौरान बड़े पैमाने पर जुलूस और ताज़िए निकाले जाते हैं। भीड़भाड़ वाले इन आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। एएसपी (ग्रामीण) श्री प्रकाश कुमार ने बैठक की शुरुआत करते हुए उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया और त्योहार के पवित्र संदेश पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस प्रशासन का मुख्य लक्ष्य किसी भी धार्मिक आयोजन में बाधा डालना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि आयोजन बिना किसी विघ्न और पूर्ण सुरक्षा के साथ संपन्न हो।
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इस बैठक में पुलिस और जनता के बीच सीधा संवाद (Direct Communication) स्थापित किया गया, ताकि आयोजकों की समस्याओं को सुना जा सके और प्रशासन की अपेक्षाओं को स्पष्ट रूप से बताया जा सके।
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एएसपी श्री प्रकाश कुमार द्वारा दिए गए सख्त और स्पष्ट निर्देश

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अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) ने जुलूस कमेटियों और आयोजकों को संबोधित करते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए:
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1. पारंपरिक मार्गों का कड़ाई से पालन: बैठक में यह सबसे स्पष्ट तौर पर निर्देशित किया गया कि मुहर्रम के सभी जुलूस और ताज़िए केवल उन्हीं रास्तों से निकाले जाएंगे जो पहले से तय हैं और जो पारंपरिक मार्ग (Traditional Routes) रहे हैं। किसी भी दशा में जुलूस के लिए कोई नया मार्ग (New Route) या नई परंपरा शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि कोई इसका उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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2. समय सीमा का ध्यान: आयोजकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे जुलूसों के उठने और समाप्त होने के समय का विशेष ध्यान रखें। निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही सभी धार्मिक औपचारिकताएं पूरी कर ली जानी चाहिए, ताकि आम जनजीवन और यातायात अधिक समय तक प्रभावित न हो।
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3. अस्त्र-शस्त्र के प्रदर्शन पर नियंत्रण: मुहर्रम के जुलूसों में अक्सर अखाड़ों द्वारा करतब दिखाए जाते हैं। एएसपी महोदय ने स्पष्ट किया कि करतब दिखाने के दौरान पूरी सावधानी बरती जाए और किसी भी प्रकार के घातक अस्त्र-शस्त्रों के ऐसे प्रदर्शन से बचा जाए जिससे भगदड़ मचने या किसी को चोट लगने की आशंका हो।
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4. डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर नियम: माननीय सर्वोच्च न्यायालय और राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जुलूस के दौरान डीजे (DJ) और लाउडस्पीकर की आवाज़ निर्धारित मानकों के भीतर ही होनी चाहिए। किसी भी प्रकार के भड़काऊ गीत, नारे या अत्यधिक शोर-शराबे पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
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सीओ चांदपुर की आयोजकों से अपील: "स्वयंसेवक (Volunteers) करें तैनात"

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बैठक को संबोधित करते हुए क्षेत्राधिकारी (सीओ) चांदपुर ने भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) पर विशेष जोर दिया। उन्होंने आयोजकों से अपील की कि पुलिस बल तो चप्पे-चप्पे पर तैनात रहेगा ही, लेकिन जुलूस कमेटियां भी अपनी जिम्मेदारी समझें।
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सीओ ने निर्देश दिए कि हर जुलूस कमेटी अपने स्तर पर कम से कम 10 से 15 युवा और समझदार स्वयंसेवकों (Volunteers) की एक टीम बनाए। इन स्वयंसेवकों को विशेष पहचान पत्र या आर्मबैंड (Armband) दिए जाएं। इनका काम जुलूस में शामिल युवाओं को नियंत्रित करना, यातायात सुचारू रखने में पुलिस की मदद करना और किसी भी बाहरी या संदिग्ध व्यक्ति को जुलूस में घुसने से रोकना होगा। प्रशासन और कमेटियों के बीच यह 'डबल लेयर सिक्योरिटी' मॉडल किसी भी अप्रिय घटना को रोकने में बेहद कारगर साबित होगा।
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सोशल मीडिया और अफवाहों पर रहेगी साइबर सेल की 'थर्ड आई'

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वर्तमान डिजिटल युग में किसी भी त्योहार के दौरान सबसे बड़ा खतरा 'अफवाहों' (Rumors) से होता है। पुलिस अधिकारियों ने बैठक में विशेष रूप से चेताया कि मुहर्रम के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर नूरपुर पुलिस और जिले की साइबर सेल (Cyber Cell) की चौबीसों घंटे पैनी नजर रहेगी।
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यदि किसी भी व्यक्ति ने कोई भ्रामक खबर, पुरानी वीडियो को नया बताकर पोस्ट करने, या सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली कोई भी पोस्ट साझा (Share) की, तो उसके खिलाफ आईटी एक्ट (IT Act) और रासुका (NSA) के तहत त्वरित और कठोर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने सभी संभ्रांत नागरिकों से अपील की कि वे अपने आस-पास के युवाओं को समझाएं कि वे किसी भी असत्यापित सूचना (Unverified Information) को फॉरवर्ड न करें। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि या भड़काऊ पोस्ट दिखे, तो तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम (112) या थाना प्रभारी को सूचित करें।
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जुलूस कमेटी और संभ्रांत नागरिकों का मिला पूर्ण आश्वासन

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पुलिस प्रशासन के इन कड़े लेकिन जरूरी निर्देशों को सुनने के बाद, बैठक में उपस्थित सभी जुलूस कमेटियों के अध्यक्षों, धर्मगुरुओं और दोनों समुदायों के गणमान्य नागरिकों ने एक स्वर में प्रशासन का समर्थन किया।
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कमेटी के पदाधिकारियों ने अधिकारियों को आश्वस्त किया कि नूरपुर और चांदपुर क्षेत्र की एक लंबी और गौरवशाली 'गंगा-जमुनी तहजीब' रही है। यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय हमेशा से एक-दूसरे के त्योहारों में बढ़-चढ़कर सहयोग करते आए हैं। उन्होंने वचन दिया कि मुहर्रम के जुलूस पूर्ण अकीदत, शांति और प्रशासन द्वारा तय की गई गाइडलाइंस के अनुसार ही निकाले जाएंगे। किसी भी असामाजिक तत्व को त्योहार का माहौल खराब करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
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शांतिपूर्ण मुहर्रम के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार

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बैठक के समापन पर एएसपी श्री प्रकाश कुमार ने सभी को अग्रिम मुहर्रम की शुभकामनाएं दीं और सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कड़े शब्दों में यह संदेश भी दिया कि 'प्रशासन शांति पसंद नागरिकों का मित्र है, लेकिन कानून तोड़ने वालों के लिए सबसे बड़ा काल है।'
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आगामी मुहर्रम पर्व के दृष्टिगत थाना नूरपुर में संपन्न हुई यह शांति समिति की बैठक इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि प्रशासन किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूर्व-नियोजित और पूरी तरह से तैयार है। रूट मार्च, ड्रोन कैमरों (Drone Cameras) से निगरानी और भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ जनता का यह सकारात्मक सहयोग निश्चित रूप से मुहर्रम 2026 को एक शांतिपूर्ण और सुरक्षित आयोजन बनाएगा।
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