बिजनौर (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने और आम जनता के मन में सुरक्षा का भाव पैदा करने के लिए पुलिस प्रशासन लगातार प्रयासरत है। 'आमजन में विश्वास और अपराधियों में खौफ' के मूल मंत्र पर काम करते हुए यूपी पुलिस इन दिनों सड़कों पर उतरकर सीधे जनता से संवाद कर रही है। इसी कड़ी में बिजनौर जिले के नूरपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण कस्बे नुमा गांव 'गोहावर' में पुलिस का सख्त और सक्रिय रूप देखने को मिला।READ ALSO:-यूपी में आउटसोर्स कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले: योगी सरकार ने लागू किए नए नियम; अब 7 दिन लगातार काम लेना गैरकानूनी, छुट्टियां और वेतन तय
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दौलतपुर चौकी इंचार्ज (Chowki Incharge) अमूल मिश्रा के नेतृत्व में भारी पुलिस बल ने गोहावर की सड़कों, चौराहों और बाजारों में पैदल गश्त किया। इस गश्त का मुख्य उद्देश्य न केवल सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेना था, बल्कि बाजार में लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण (Encroachment) रूपी कोढ़ को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक कड़ा कदम उठाना भी था। आइए इस पूरी पुलिस कार्रवाई और इसके प्रभावों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
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पैदल गश्त का रूट: गोहावर चौराहे से लेकर मुख्य बाजार तक
\r\n\r\nपुलिस की यह कार्रवाई केवल एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि इसे एक सुनियोजित रणनीति के तहत अंजाम दिया गया। गोहावर इस इलाके का एक प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है, जहां आस-पास के कई गांवों के लोग अपनी दैनिक जरूरतों का सामान खरीदने आते हैं। इस वजह से यहां हमेशा भीड़भाड़ रहती है।
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- \r\n गश्त की शुरुआत: दौलतपुर चौकी इंचार्ज अमूल मिश्रा ने अपने पुलिस दल-बल के साथ गश्त की शुरुआत इलाके के सबसे व्यस्त 'गोहावर चौराहे' से की। चौराहा वह स्थान है जहां से यातायात का सबसे अधिक दबाव होता है।\r\n \r\n
- \r\n बस स्टैंड का निरीक्षण: चौराहे से होते हुए पुलिस की यह टुकड़ी बस स्टैंड की ओर बढ़ी। बस स्टैंड के आस-पास अक्सर डग्गामार वाहनों और अस्थाई दुकानों का जमावड़ा रहता है, जिसे पुलिस ने मौके पर ही सुव्यवस्थित करवाया।\r\n \r\n
- \r\n मुख्य बाजार में फ्लैग मार्च: बस स्टैंड के बाद पुलिस बल ने गोहावर के 'मेन मार्केट' (Main Market) के अंदर प्रवेश किया। संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले इस बाजार में खाकी वर्दी की मौजूदगी ने जहां एक ओर आम नागरिकों और महिलाओं को सुरक्षा का एहसास कराया, वहीं दूसरी ओर असामाजिक तत्वों और मनमानी करने वाले दुकानदारों में हड़कंप मचा दिया।\r\n \r\n
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अतिक्रमण (Encroachment) की समस्या: गोहावर का सबसे बड़ा सिरदर्द
\r\n\r\nकिसी भी विकासशील कस्बे या गांव के बाजार की सबसे बड़ी समस्या वहां का अतिक्रमण होता है, और गोहावर भी इससे अछूता नहीं है।
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- \r\n सड़क बनी फुटपाथ: बाजार में दुकानदारों ने अपनी दुकानों का दायरा बढ़ाकर सड़क तक कर लिया है। दुकानों के बाहर टीन शेड, तिरपाल और अस्थाई काउंटर लगा दिए गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n ठेले और रेहड़ी वालों का जमावड़ा: मुख्य सड़क के दोनों किनारों पर ठेले वालों और फल-सब्जी विक्रेताओं ने इस कदर कब्जा कर लिया है कि दोपहिया वाहन तो दूर, पैदल चलने वालों के लिए भी रास्ता नहीं बचता।\r\n \r\n
- \r\n जाम और दुर्घटनाओं का खतरा: इस अतिक्रमण के कारण दिन के पीक आवर्स (Peak Hours) में भारी जाम लग जाता है। एंबुलेंस या स्कूल बस जैसी आवश्यक सेवाओं के वाहनों को भी यहां से गुजरने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है। इसके अलावा, सड़क संकरी होने के कारण हमेशा छोटी-बड़ी सड़क दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है।\r\n \r\n

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चौकी इंचार्ज अमूल मिश्रा का कड़ा रुख: "सड़क से दूर लगाएं दुकानें"
\r\n\r\nपैदल गश्त के दौरान दौलतपुर चौकी इंचार्ज अमूल मिश्रा ने बाजार की इस अराजक स्थिति को गंभीरता से लिया। उन्होंने पुलिस बल के साथ रुक-रुक कर हर उस दुकानदार से बात की, जिसने अपनी दुकान की सीमा से बाहर सड़क पर अतिक्रमण कर रखा था।
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- \r\n अतिक्रमण हटाने की सख्त हिदायत: अमूल मिश्रा ने सभी व्यापारियों और ठेले वालों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि वे अपनी दुकानें सड़क से पर्याप्त दूरी पर लगाएं। फुटपाथ और सड़क केवल राहगीरों और वाहनों के आवागमन के लिए है, न कि निजी व्यवसाय के लिए।\r\n \r\n
- \r\n दुकानदारों से सीधा संवाद: उन्होंने दुकानदारों को समझाते हुए कहा कि अतिक्रमण से केवल पुलिस या प्रशासन को ही परेशानी नहीं होती, बल्कि खुद दुकानदारों के ग्राहकों को भी जाम के कारण दिक्कत होती है। एक स्वच्छ और अतिक्रमण-मुक्त बाजार व्यापार को और अधिक बढ़ाता है।\r\n \r\n
- \r\n चेतावनी और भविष्य की कार्रवाई: पुलिस ने इसे केवल एक चेतावनी अभियान के रूप में रखा, लेकिन साथ ही यह अल्टीमेटम भी दे दिया गया कि यदि अगली बार गश्त के दौरान स्थिति में सुधार नहीं दिखा और दुकानें सड़क पर लगी मिलीं, तो नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, चालान काटे जाएंगे और सामान जब्त किया जा सकता है।\r\n \r\n
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जनता की प्रतिक्रिया: आम लोगों ने ली राहत की सांस
\r\n\r\nबिजनौर पुलिस की इस सक्रियता और अतिक्रमण के खिलाफ उठाए गए इस कदम का गोहावर के स्थानीय निवासियों ने भरपूर स्वागत किया है।
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- \r\n राहगीरों को मिली सहूलियत: पैदल गश्त के दौरान जब पुलिस ने तुरंत कुछ अस्थाई अतिक्रमण हटवाए, तो सड़क चौड़ी नजर आने लगी। राहगीरों और वाहन चालकों ने कहा कि अगर पुलिस इसी तरह नियमित रूप से कार्रवाई करे, तो गोहावर बाजार कभी जाम का शिकार नहीं होगा।\r\n \r\n
- \r\n महिलाओं में सुरक्षा का भाव: त्योहारी सीजन और शादियों के मौसम में महिलाएं बड़ी संख्या में खरीदारी के लिए बाजार निकलती हैं। पुलिस की पैदल गश्त (Foot Patrol) से छिटपुट अपराधों जैसे- मनचलों द्वारा फब्तियां कसना, चेन स्नैचिंग या जेबकतरों के हौसले पस्त होते हैं। महिलाओं ने पुलिस की इस गश्त को एक सकारात्मक कदम बताया।\r\n \r\n
- \r\n व्यापारियों से सहयोग की अपील: स्थानीय संभ्रांत नागरिकों ने भी दुकानदारों से अपील की है कि वे पुलिस और प्रशासन का सहयोग करें। एक व्यवस्थित बाजार न केवल सुंदर दिखता है, बल्कि वहां किसी भी आपात स्थिति (जैसे आग लगने पर फायर ब्रिगेड का आना) से निपटना भी आसान होता है।\r\n \r\n
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सुशासन और कानून-व्यवस्था की दिशा में एक अहम कदम
\r\n\r\nबिजनौर पुलिस द्वारा नूरपुर थाना क्षेत्र के गोहावर में चलाया गया यह पैदल गश्त अभियान उत्तर प्रदेश पुलिस की 'प्रो-एक्टिव पुलिसिंग' (Pro-active Policing) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। दौलतपुर चौकी इंचार्ज अमूल मिश्रा के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई ने यह साफ संदेश दे दिया है कि सड़कों पर अतिक्रमण और अव्यवस्था को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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पुलिस का सड़कों पर उतरना केवल अपराध नियंत्रण के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि यह नागरिक व्यवस्था (Civic Order) को बनाए रखने के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अब यह गोहावर के स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे पुलिस द्वारा दी गई इन हिदायतों का पालन करें और अपने बाजार को अतिक्रमण मुक्त, स्वच्छ और सुरक्षित बनाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। पुलिस प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह गश्त केवल एक दिन की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि आने वाले समय में इसे और अधिक नियमित व प्रभावी बनाया जाएगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.