अपराधियों पर बिजनौर पुलिस का महा-क्रैकडाउन: पुलिस टीम पर जान से मारने की नियत से की थी फायरिंग, आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई में दबोचे गए शातिर गोतस्कर; भारी मात्रा में अवैध असलहा और गोवंश वध के क्रूर उपकरण बरामद।
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उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) नीति के तहत अपराधियों और गोतस्करों के खिलाफ चौतरफा शिकंजा कसा जा रहा है। इसी क्रम में जनपद बिजनौर की थाना हीमपुर दीपा पुलिस को एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। 16 मई 2026 की दोपहर को पुलिस और शातिर गोतस्करों के बीच हुई एक भीषण और रोमांचक मुठभेड़ में दो वांछित अभियुक्त पुलिस की जवाबी फायरिंग में पैर में गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने दोनों को इलाज के लिए अभिरक्षा में लेकर अस्पताल भिजवाया है और उनके पास से भारी मात्रा में अवैध हथियार, जिंदा व खोखा कारतूस, एक मोटरसाइकिल और गौकशी में इस्तेमाल होने वाले क्रूर उपकरण बरामद किए हैं।
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मुखबिर की सटीक सूचना पर घेराबंदी: स्याऊ छाछरी रोड पर थर्राई गोलियों की गूंज

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विस्तृत विवरण के अनुसार, थाना हीमपुर दीपा के प्रभारी निरीक्षक जयभगवान सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम क्षेत्र में अपराध एवं अपराधियों की रोकथाम, संदिग्ध व्यक्तियों की जांच, वाहन चेकिंग तथा शांति व कानून-व्यवस्था सुदृढ़ बनाए रखने हेतु निरंतर गश्त पर थी। इसी दौरान पुलिस टीम को एक विश्वसनीय मुखबिर से बेहद पुख्ता और गोपनीय सूचना प्राप्त हुई। मुखबिर ने बताया कि कुछ दिन पूर्व ग्राम अकबरपुर तिगरी के जंगल में हुई सनसनीखेज गौकशी की वारदात से जुड़े दो मुख्य और शातिर आरोपी एक मोटरसाइकिल पर सवार होकर किसी नई आपराधिक घटना को अंजाम देने या क्षेत्र से भागने की फिराक में स्याऊ छाछरी रोड से गुजरने वाले हैं।
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इस महत्वपूर्ण इनपुट पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने बिना समय गंवाए ग्राम पीपली जट के जंगल के पास स्याऊ छाछरी रोड पर रणनीतिक रूप से घेराबंदी और सघन चेकिंग अभियान शुरू कर दिया। दोपहर के करीब 02:20 बजे पुलिस टीम को स्याऊ छाछरी रोड की तरफ से तेज गति में एक मोटरसाइकिल आती हुई दिखाई दी, जिस पर दो संदिग्ध व्यक्ति सवार थे। पुलिस टीम ने जब अदम्य साहस दिखाते हुए मोटरसाइकिल को रुकने का इशारा किया, तो पुलिस को सामने देखकर बदमाशों के होश उड़ गए। खुद को चौतरफा घिरा पाकर और कानून के शिकंजे से बचने की हताशा में मोटरसाइकिल सवार बदमाशों ने मोटरसाइकिल को मोड़ने का प्रयास किया, लेकिन नाकाम रहने पर उन्होंने पुलिस टीम को जान से मारने की नियत से सीधे अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। बदमाशों द्वारा चलाई गई गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा जंगली इलाका गूंज उठा।
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पुलिस की आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई: दोनों बदमाशों के पैरों में लगी गोली

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बदमाशों द्वारा अचानक की गई इस दुस्साहसिक गोलीबारी के बीच पुलिस टीम ने बेहद सूझबूझ, त्वरित निर्णय क्षमता और अदम्य वीरता का परिचय दिया। पुलिसकर्मियों ने तत्काल जमीन पर लेटकर और पेड़ों की ओट लेकर खुद का बचाव किया। इसके बाद, अपराधियों को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी गई, लेकिन बदमाशों की तरफ से लगातार फायरिंग जारी रही।
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स्थिति की गंभीरता और अपनी जान पर आए संकट को देखते हुए पुलिस टीम ने आत्मरक्षार्थ (Self-Defense) नियंत्रित और सटीक जवाबी फायरिंग की। पुलिस की तरफ से हुई इस सटीक जवाबी कार्रवाई में दोनों बदमाशों के पैरों में गोलियां लगीं, जिससे वे लहुलूहान होकर चीखते हुए मोटरसाइकिल सहित जमीन पर गिर पड़े। बदमाशों के गिरते ही पुलिस टीम ने बिना एक पल गंवाए बहादुरी से आगे बढ़कर दोनों को अपनी अभिरक्षा में ले लिया। पुलिस ने जब उनकी शिनाख्त और प्राथमिक जांच की, तो पता चला कि दोनों के पैरों से अत्यधिक खून बह रहा था। मानवीय दृष्टिकोण और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए पुलिस ने तत्काल दोनों घायल अभियुक्तों को पुलिस सुरक्षा के घेरे में नजदीकी राजकीय चिकित्सालय में उपचार हेतु भिजवाया, जहां उनका इलाज जारी है।
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कौन हैं ये घायल अभियुक्त? चांदपुर के हिस्ट्रीशीटर का खुला काला चिट्ठा

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पुलिस अभिरक्षा में उपचार करा रहे घायल अपराधियों से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उन्होंने सहमे हुए लहजे में अपने नाम और पते उगले। पकड़े गए पहले अभियुक्त ने अपना नाम शाहिद पुत्र मुस्तफा तथा दूसरे ने अपना नाम फुरकान पुत्र हसन बताया। ये दोनों ही अपराधी ग्राम राजोपुर बहमन, थाना चांदपुर, जनपद बिजनौर के मूल निवासी हैं।
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जब हीमपुर दीपा पुलिस ने अपराधियों का आपराधिक इतिहास (Criminal History) खंगालने के लिए जिला पुलिस के डेटाबेस और थाना चांदपुर के रिकॉर्ड की जांच की, तो बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। गिरफ्तार किया गया मुख्य अभियुक्त शाहिद कोई आम अपराधी नहीं है, बल्कि वह थाना चांदपुर का एक कुख्यात और घोषित हिस्ट्रीशीटर (हिस्ट्रीशीट संख्या- 164 (ए)) है। शाहिद इलाके में लंबे समय से गोतस्करी, लूटपाट, रंगदारी और डराने-धमकाने जैसी संगीन वारदातों को अंजाम देकर खौफ का पर्याय बना हुआ था। उस पर जनपद के विभिन्न थानों में रंगदारी, आपराधिक साजिश (धारा 120बी, 384 भादवि), चोरी, लूट (धारा 392 भादवि), आर्म्स एक्ट और गौवध निवारण अधिनियम के तहत कुल 7 संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
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वहीं, उसका दूसरा साथी फुरकान भी अपराध की दुनिया का कोई नया खिलाड़ी नहीं है। वह भी शाहिद के साथ मिलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में आपराधिक नेटवर्क चला रहा था। फुरकान के खिलाफ भी थाना चांदपुर और हीमपुर दीपा में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत कुल 4 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
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7 मई की वो खौफनाक वारदात: सेंट्रो कार और गौकशी का पूरा कनेक्शन

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इस सनसनीखेज मुठभेड़ की कड़ियां दरअसल दिनांक 07 मई 2026 को हुई एक बेहद घिनौनी वारदात से जुड़ी हुई हैं। उस दिन थाना हीमपुर दीपा पुलिस को मुखबिर के माध्यम से सूचना मिली थी कि ग्राम अकबरपुर तिगरी के घने जंगल में एक संदिग्ध दिल्ली नंबर की सेंट्रो कार (रजिस्ट्रेशन संख्या- DL4CS2843) लावारिस परिस्थितियों में खड़ी है।
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पुलिस जब मौके पर पहुंची तो वहां का नजारा विचलित करने वाला था। कार के बिल्कुल पास में ही एक बेजुबान गोवंशीय पशु का शव पड़ा हुआ था और चारों तरफ खून बिखरा था। मौके पर भारी मात्रा में पशु वध करने के धारदार और क्रूर उपकरण जैसे छुरियां, रस्सियां और चापड़ बिखरे पड़े थे। जांच-पड़ताल में पता चला कि आरोपी गोवंश को काट ही रहे थे कि तभी कुछ ग्रामीणों की आहट हो गई। पकड़े जाने के डर से अपराधी अपनी सेंट्रो कार और औजार छोड़कर जंगल के रास्ते भाग निकले। इस मामले में अज्ञात अभियुक्तों के खिलाफ मु0अ0सं0 37/2026 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था।
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कड़ियों से कड़ियां जुड़ीं: तीन आरोपी पहले ही जा चुके हैं जेल

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अकबरपुर तिगरी के जंगलों में हुई इस वारदात ने पुलिस प्रशासन को हिलाकर रख दिया था। सर्विलांस और खुफिया तंत्र की मदद से पुलिस को पहली बड़ी सफलता दिनांक 09 मई 2026 को मिली, जब पुलिस ने मुठभेड़ के बाद इस घटना से सीधे जुड़े दो स्थानीय अभियुक्तों (राजवीर उर्फ राजू और मनोज) को दबोच लिया। इसके बाद 11 मई 2026 को एक और मुख्य मददगार बाबू कुरैशी को भी पुलिस ने जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया।
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आज हुई पूछताछ में घायल अभियुक्तों शाहिद और फुरकान ने स्वीकार किया कि वे दोनों ही उस दिन मुख्य रूप से गोवंश को काटने का काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि पहले गिरफ्तार हुए राजवीर और मनोज ही सुनसान ठिकानों पर गोवंश को लाकर बांधते थे, जिसे वे काटते थे।
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हथियारों का जखीरा और पुलिस की भारी बरामदगी

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पुलिस और बदमाशों के बीच हुई इस आमने-सामने की मुठभेड़ के बाद घटना स्थल और अभियुक्तों की जामा तलाशी के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में अवैध असलहा और गोवंश वध से जुड़े उपकरण बरामद करने में सफलता मिली है। बरामदगी की सूची इस प्रकार है:
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    02 अवैध देसी तमंचे (315 बोर)
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    01 खोखा कारतूस (पुलिस पर फायर किया गया)
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    01 मिस कारतूस (315 बोर)
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    01 लोहे का भारी चापड़ (पाठल) और 01 अत्यंत धारदार छुरी (गोवंश काटने के लिए)
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    01 मजबूत नायलॉन की रस्सी
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    01 मोटर साइकिल संख्या UP20-BZ-4763 (घटना में प्रयुक्त)
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पुलिस पर जानलेवा हमला करने के इस दुस्साहसिक कृत्य के लिए दोनों अभियुक्तों के खिलाफ थाना हीमपुर दीपा पर एक नया मुकदमा मु0अ0सं0 43/2026, धारा 109 (1) भारतीय न्याय संहिता (BNS) और धारा 3/25/27 आर्म्स एक्ट के तहत पंजीकृत किया गया है।
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साहसिक ऑपरेशन को अंजाम देने वाली जांबाज पुलिस टीम

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इस अत्यंत खतरनाक मुठभेड़ में अपनी जान की परवाह न करते हुए अपराधियों को घुटने टेकने पर मजबूर करने वाली थाना हीमपुर दीपा की पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक जयभगवान सिंह, व0उ0नि0 कर्मवीर सिंह तालान, उ0नि0 मुकेश कुमार, उ0नि0 रजत चौधरी, कांस्टेबल यशपाल, हेड कांस्टेबल अमित वर्मा, कांस्टेबल अनुज कुमार, सचिन सार्थक और कुश कुमार शामिल रहे। उच्चाधिकारियों ने टीम के इस अदम्य साहस की भूरी-भूरी प्रशंसा की है।
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बिजनौर पुलिस का साफ संदेश: जनपद में कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले और गोवंश के प्रति क्रूरता बरतने वाले अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। या तो अपराधी अपराध का रास्ता छोड़ दें, अन्यथा उनके लिए जेल की सलाखें या पुलिस की गोलियां ही उनका मुकद्दर बनेंगी।
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