उत्तर प्रदेश में अपराधियों की कमर तोड़ने के लिए चलाया जा रहा पुलिस का 'ऑपरेशन क्लीन' अब अपने चरम पर है। पुलिस का संदेश बिल्कुल साफ है—"अपराध से कमाया गया एक-एक पैसा और उससे बनाई गई ईंट-ईंट का हिसाब लिया जाएगा।" इसी कड़ी में रविवार, 07 जून 2026 को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अंडरवर्ल्ड में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बिजनौर और सम्भल पुलिस की सायरन बजाती गाड़ियां सम्भल के ग्राम हरथला में दाखिल हुईं।READ ALSO:-नशे के काले कारोबार का भंडाफोड़: बिजनौर में 1.5 लाख की स्मैक और 88 हजार कैश के साथ दो महिला तस्कर गिरफ्तार, जानें 'ऑपरेशन' की पूरी इनसाइड स्टोरी
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पुलिस अधीक्षक (SP) बिजनौर के सख्त निर्देशों पर यह बड़ी कार्रवाई की गई है। जिनका कभी इन इलाकों में सिक्का चलता था, आज वे अपराधी पुलिस के खौफ से या तो जेल की सलाखों के पीछे हैं या फरार हैं। पुलिस ने इन अपराधियों द्वारा खून-पसीने की गाढ़ी कमाई लूटकर बनाए गए आलीशान घरों को गैंगस्टर एक्ट के तहत सील कर दिया है, जिससे पूरे क्षेत्र में कानून के राज का एक कड़ा संदेश गया है।
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ऑपरेशन की इनसाइड स्टोरी: कैसे बुना गया जाल?

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इस महा-ऑपरेशन की पटकथा कई हफ्तों की गहरी तफ्तीश और कानूनी दांव-पेंच के बाद तैयार की गई थी। दरअसल, बिजनौर पुलिस को लंबे समय से इन अपराधियों की अवैध संपत्तियों की तलाश थी।
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    ज्वाइंट ऑपरेशन: थाना शेरकोट (जनपद बिजनौर) की पुलिस ने थाना असमोली (जनपद सम्भल) की पुलिस और स्थानीय राजस्व विभाग (तहसीलदार) के साथ मिलकर एक फुलप्रूफ प्लान बनाया।
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    मुनादी और सीलिंग: भारी पुलिस बल के साथ टीम मौके पर पहुंची। सबसे पहले पूरे गांव में ढोल बजाकर मुनादी कराई गई, जिसमें ग्रामीणों को बताया गया कि यह संपत्ति अब राज्य सरकार के अधीन है और इसका किसी भी प्रकार का क्रय-विक्रय (खरीद-फरोख्त) गैरकानूनी होगा।
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रडार पर आए ये 3 कुख्यात 'हिस्ट्रीशीटर'

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इस पूरी कार्रवाई में जिन तीन अपराधियों के आशियानों को निशाना बनाया गया है, वे कोई मामूली गुंडे नहीं हैं। ये तीनों थाना असमोली के लिस्टेड हिस्ट्रीशीटर हैं और एक सुसंगठित गिरोह (Gang) के रूप में काम करते थे।
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अभियुक्तों का विवरण:

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    इस्तकार उर्फ इस्तखार (पुत्र बुद्धा)
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    खुर्शीद (पुत्र फिदा हुसैन)
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    शादाब (पुत्र सुलेमान) (सभी निवासी- ग्राम हरथला, थाना असमोली, जिला सम्भल)
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इन तीनों ने पश्चिमी यूपी के कई जिलों में आतंक का ऐसा नेटवर्क तैयार किया था, जिसे भेदना पुलिस के लिए एक चुनौती बन गया था।
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कुर्क की गई संपत्ति का पूरा ब्यौरा (31.38 लाख का सीज एक्शन)

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इन अपराधियों ने चोरी, डकैती और लूट के पैसों से अपने घरों को न सिर्फ आलीशान बनाया था, बल्कि उनका जमकर विस्तारीकरण और सौंदर्यीकरण भी किया था। पुलिस और राजस्व विभाग के मूल्यांकन के आधार पर इनकी कुल कुर्क की गई संपत्ति की कीमत 31,38,808 रुपये आंकी गई है।
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1. इस्तकार उर्फ इस्तखार का 'महल':

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    विवरण: ग्राम हरथला में दो बड़े आवासीय मकान (100 वर्ग गज और 70 वर्ग गज)।
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    कुल क्षेत्रफल: 170 वर्ग गज।
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    सरकारी कीमत: 11,00,922/- रुपये।
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2. अभियुक्त खुर्शीद का आशियाना:

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    विवरण: ग्राम हरथला में एक सुसज्जित आवासीय मकान और भूमि।
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    कुल क्षेत्रफल: 150 वर्ग गज।
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    सरकारी कीमत: 10,21,443/- रुपये।
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3. अभियुक्त शादाब की कोठी:

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    विवरण: ग्राम हरथला में आवासीय मकान और भूमि, जिसे हाल ही में रेनोवेट कराया गया था।
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    कुल क्षेत्रफल: 150 वर्ग गज।
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    सरकारी कीमत: 10,16,443/- रुपये।
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क्राइम सिंडिकेट का मास्टरमाइंड: इस्तखार के 27 मुकदमों की खौफनाक 'क्राइम कुंडली'

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इस पूरे गिरोह का सरगना इस्तकार उर्फ इस्तखार है। जब पुलिस ने इसका आपराधिक इतिहास खंगाला, तो अधिकारी भी हैरान रह गए। इसके खिलाफ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न थानों में कुल 27 संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
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कहाँ-कहाँ फैला था नेटवर्क?

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    बिजनौर (थाना अफजलगढ़): हाल ही में इसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट (अवैध हथियार) के तहत 4 नए मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
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    अमरोहा (थाना देहात व डिडौली): यहां इस्तखार के खिलाफ चोरी, घर में घुसकर सेंधमारी और गैंगस्टर एक्ट के सबसे ज्यादा 10 मामले दर्ज हैं।
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    मुरादाबाद (थाना मैनाठेर व कुन्दरकी): वर्ष 2015 से ही यह मुरादाबाद पुलिस के रडार पर था। यहां इसके खिलाफ 5 संगीन मुकदमे पंजीकृत हैं।
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    सम्भल (थाना असमोली व हयातगनर): अपने गृह जनपद में भी इसने 6 वारदातों को अंजाम दिया।
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    उत्तराखंड (उधमसिंहनगर): यूपी पुलिस की सख्ती से बचने के लिए इसने उत्तराखंड के जसपुर और आईटीआई थानों के क्षेत्रों में भी अपराध किए, जहां इस पर 2 मुकदमे दर्ज हैं।
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गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1): अपराधियों का सबसे बड़ा काल

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यह पूरी कार्रवाई उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1986 की धारा 14(1) के तहत की गई है। अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, पुलिस का यह 'ब्रह्मास्त्र' अपराधियों को जेल से भी ज्यादा डराता है।
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क्यों है यह कानून इतना सख्त?

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    आर्थिक कमर तोड़ना: जेल जाने पर अपराधी जमानत पर बाहर आ जाते हैं, लेकिन जब धारा 14(1) के तहत उनकी संपत्ति कुर्क होती है, तो उनके पास केस लड़ने और अपना गिरोह चलाने के लिए पैसा नहीं बचता।
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    समाज में संदेश: जब पूरे गांव के सामने मुनादी करके घर सील किया जाता है, तो अपराधी का सामाजिक रुतबा और खौफ हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
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सुशासन और कानून का राज

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जनपद बिजनौर की शेरकोट पुलिस और सम्भल प्रशासन की यह संयुक्त कार्रवाई केवल तीन मकानों की कुर्की नहीं है; यह एक मजबूत और सुरक्षित समाज की ओर बढ़ाया गया एक बड़ा कदम है। पुलिस ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे किसी भी जिले में छिपें या अपनी संपत्ति किसी भी गांव में बनाएं, कानून के लंबे हाथ उन तक पहुंच ही जाएंगे।
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इस कड़ी कार्रवाई से न केवल आम जनता का पुलिस प्रशासन में विश्वास बढ़ा है, बल्कि उन भटके हुए युवाओं को भी एक सख्त चेतावनी मिली है जो अपराध को सफलता का शॉर्टकट मानते हैं। पुलिस अधीक्षक बिजनौर ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी ऐसे माफियाओं और गैंगस्टरों को चिन्हित कर उनकी संपत्तियों पर कानूनी बुलडोजर और कुर्की की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।
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