बिजनौर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश में अपराधियों और गोकशों (गौवंश का वध करने वालों) के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार और तेजी से जारी है। इसी कड़ी में बिजनौर जनपद की हीमपुर दीपा थाना पुलिस को एक बड़ी और उल्लेखनीय कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने इलाके में सक्रिय एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो अत्यंत शातिराना अंदाज में आवारा और बेसहारा गौवंशीय पशुओं को अपना शिकार बनाता था। यह गिरोह चंद रुपयों के लालच में इन बेजुबान जानवरों को पकड़कर कसाइयों के सुपुर्द कर देता था। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जो रिश्ते में पिता और पुत्र बताए जा रहे हैं।Read also:-बिजनौर में बेखौफ चोरों का आतंक: दौलतपुर चौकी के पास बरामदे में सोता रहा परिवार, ताले चटकाकर उड़ाए लाखों के जेवर और नकदी
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7 मई की वह रात और जंगल में सनसनी

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इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 7 मई 2026 को हुई थी। थाना हीमपुर दीपा पुलिस को स्थानीय मुखबिरों और ग्रामीणों के माध्यम से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाली सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना में बताया गया था कि थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम अकबरपुर तिगरी के सुनसान जंगल में एक संदिग्ध सेन्ट्रो कार (जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर DL4CS2843 है) लावारिस हालत में खड़ी है। सबसे ज्यादा विचलित करने वाली बात यह थी कि उसी कार के समीप एक गौवंशीय पशु का शव क्षत-विक्षत अवस्था में पड़ा हुआ था।
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चूंकि मामला गौवंश से जुड़ा हुआ था और ऐसे मामलों में उत्तर प्रदेश सरकार एवं पुलिस प्रशासन के निर्देश बेहद सख्त हैं, इसलिए सूचना मिलते ही थाना हीमपुर दीपा की पुलिस फोर्स बिना कोई समय गंवाए तत्काल घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ी। मौके पर पहुंचते ही पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया।
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ग्रामीणों की आहट और अपराधियों का फरार होना

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घटनास्थल का दृश्य रोंगटे खड़े करने वाला था। वहां एक बेजुबान गौवंश का शव खून से लथपथ पड़ा था। इसके साथ ही मौके पर पशु वध करने के कई धारदार उपकरण और घटना में इस्तेमाल की गई दिल्ली नंबर की सेन्ट्रो कार भी मौजूद थी। पुलिस द्वारा जब स्थानीय स्तर पर गहराई से छानबीन की गई और चश्मदीदों से पूछताछ की गई, तो यह बात सामने आई कि इस जघन्य घटना को दो व्यक्तियों ने अंजाम दिया था।
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दरअसल, घटना वाले दिन जब ये अपराधी गौकशी की घटना को अंजाम दे रहे थे, तभी वहां से गुजर रहे कुछ ग्रामीणों को भनक लग गई। ग्रामीणों की आहट सुनते ही दोनों अपराधी घबरा गए। पकड़े जाने के डर से वे अपनी सेन्ट्रो कार और पशु काटने के खौफनाक हथियारों को वहीं जंगल में छोड़कर मौके से रफूचक्कर हो गए। पुलिस ने सबसे पहले स्थिति को नियंत्रण में लेते हुए गौवंशीय पशु के शव को कब्जे में लिया। इसके बाद पूरे विधि-विधान और नियमानुसार पशु चिकित्सा अधिकारी से उसका चिकित्सीय परीक्षण (पोस्टमार्टम) कराया गया और फिर ससम्मान उसे दफनाया गया।
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इस गंभीर घटना के बाद थाना हीमपुर दीपा पर मुकदमा अपराध संख्या 37/2026 दर्ज किया गया। इसमें धारा 3/5 (क) / 8 (गौवध निवारण अधिनियम) और 11 (1) (क) (पशु क्रूरता अधिनियम) के तहत अज्ञात अपराधियों के खिलाफ केस दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी गई।
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48 घंटे के भीतर पुलिस का जबरदस्त एक्शन और गिरफ्तारी

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जनपद बिजनौर में अपराध और अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे पुलिस के विशेष अभियान के तहत उच्चाधिकारियों ने इस घटना के जल्द से जल्द खुलासे के निर्देश दिए थे। थाना प्रभारी निरीक्षक श्री जयभगवान सिंह के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया, जो दिन-रात एक कर इन अपराधियों की धरपकड़ में जुट गईं।
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इसी बीच, 9 मई 2026 को थाना हीमपुर दीपा पुलिस जब इलाके में सघन गश्त कर रही थी, तभी उनके खास मुखबिर तंत्र ने एक सटीक सूचना दी। मुखबिर ने बताया कि 7 मई को ग्राम अकबरपुर तिगरी में गौकशी की घटना को अंजाम देने वाले वही अज्ञात अपराधी आज फिर से इलाके में सक्रिय हैं। यह भी बताया गया कि ये दोनों अपराधी आज ग्राम भवानीपुर गंगरैन के जंगल में किसी अन्य आवारा पशु को पकड़कर गौकशी की एक और नई घटना को अंजाम देने की फिराक में घूम रहे हैं।
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इस पुख्ता सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम तुरंत अलर्ट मोड में आ गई। बिना पलक झपकाए पुलिस टीम ने बताई गई जगह पर दबिश दी और चारों तरफ से मजबूत घेराबंदी कर ली। पुलिस की इस अचूक रणनीति के सामने अपराधियों के मंसूबे धरे के धरे रह गए और पुलिस ने मौके से दोनों अभियुक्तों को रंगे हाथों धर दबोचा।
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पूछताछ में हुए चौंकाने वाले खुलासे: ऐसे चलता था नेक्सस

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गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने दोनों अभियुक्तों से कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया और अपने नाम 1. राजवीर उर्फ राजू (पुत्र रामेश सिंह) और 2. मनोज (पुत्र राजवीर) बताए। ये दोनों ही ग्राम लदुपुरा, थाना हीमपुर दीपा, जनपद बिजनौर के निवासी हैं। दोनों आपस में पिता और पुत्र हैं।
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इनकी पूछताछ में जो कहानी सामने आई, उसने पुलिस को भी हैरान कर दिया। अभियुक्तों ने बताया कि उनका एक संगठित गिरोह है। उनका काम सिर्फ आवारा और बेसहारा गौवंशीय पशुओं को जंगल या सुनसान इलाकों से पकड़ना था। पकड़े गए इन पशुओं को वे इलाके के एक शातिर कसाई बाबू कुरैशी (पुत्र अब्दुल हमीद, निवासी ग्राम सबदलपुर, थाना हीमपुर दीपा) और उसके अन्य साथियों को बेच देते थे। इसके एवज में बाबू कुरैशी उन्हें मोटी रकम (पैसे) देता था।
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पिता-पुत्र ने आगे बताया कि 7 मई 2026 को भी उन्होंने ग्राम अकबरपुर तिगरी के जंगल में स्थित यूकेलिप्टस (सफेदा) के खेत में एक बेसहारा गौवंश को पकड़कर बाबू कुरैशी और उसके साथियों के सुपुर्द किया था। इसके बाद बाबू कुरैशी और उसके आदमियों ने ही उस गौवंश का निर्दयता से वध किया था। लेकिन जैसे ही ग्रामीणों की भनक लगी, वे सब अपना सारा सामान और गाड़ी छोड़कर भाग गए।
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क्या-क्या हुआ बरामद?

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पुलिस की इस शानदार कार्रवाई में न केवल अपराधियों को पकड़ा गया, बल्कि उनके पास से कई अहम सुबूत भी बरामद किए गए।
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    अभियुक्तों की तलाशी लेने पर उनके पास से कुल 3500/- रुपये की नकदी बरामद हुई (जो उन्हें संभवतः पशु बेचने के बदले मिली थी)।
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    पशुओं को बांधने और फंसाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली 03 मजबूत रस्सियां भी उनके पास से मिलीं।
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    इसके अलावा, पूर्व में घटनास्थल से बरामद की गई सेन्ट्रो कार (DL4CS2843) और पशु वध के खतरनाक उपकरण को भी मामले में अहम साक्ष्य के तौर पर शामिल कर लिया गया है।
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पुलिस टीम की सतर्कता और आगे की कार्रवाई

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इस पूरे ऑपरेशन को सफल बनाने में थाना हीमपुर दीपा पुलिस टीम की भूमिका बेहद सराहनीय रही। इस टीम का नेतृत्व प्रभारी निरीक्षक श्री जयभगवान सिंह कर रहे थे। उनके साथ उप-निरीक्षक श्री मुकेश कुमार, कांस्टेबल राजकुमार (2069) और रिक्रूट कांस्टेबल उमंग राठी ने अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए इन शातिर अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने का काम किया।
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फिलहाल, गिरफ्तार किए गए दोनों अभियुक्तों (राजवीर और मनोज) के खिलाफ अन्य आवश्यक और वैधानिक कानूनी कार्रवाई पुलिस द्वारा पूरी की जा रही है। उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेजने की तैयारी है। वहीं, दूसरी ओर पुलिस अब इस पूरे रैकेट के मुख्य सरगना और मास्टरमाइंड 'बाबू कुरैशी' और उसके अन्य फरार साथियों की सरगर्मी से तलाश कर रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही बाबू कुरैशी को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा और इस पूरे नेक्सस को जड़ से खत्म कर दिया जाएगा।
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इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस गोकशी जैसे संगीन अपराधों पर पूरी तरह से लगाम कसने के लिए कटिबद्ध है और ऐसे मामलों में शामिल किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। इलाके के लोगों ने भी पुलिस की इस त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की जमकर प्रशंसा की है, जिससे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का माहौल कायम हुआ है।
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