उत्तर प्रदेश के बिजनौर से साइबर अपराध को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। पुलिस टीम ने बिजनौर साइबर ठगी के एक बड़े और संगठित नेटवर्क का सफलतापूर्वक खुलासा किया है। राज्य स्तर पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह अहम कार्रवाई की गई है।READ ALSO:-चीन के महाविनाशकारी 'मेदोग डैम' से भारत पर मंडराया 'महाप्रलय' का खतरा: 5 करोड़ जिंदगियां दांव पर, 8 राज्य डूबने की कगार पर
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पुलिस महानिदेशक (DGP) के निर्देश पर चल रहे 'ऑपरेशन CY-Vajra' के अंतर्गत साइबर थाना पुलिस ने दो शातिर आरोपियों को धर दबोचा है। इन गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने 41 हजार रुपये से अधिक की नकदी और ठगी में प्रयुक्त मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
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क्या है पूरा बिजनौर साइबर ठगी मामला?

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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के डाटा का नियमित रूप से बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा था। इसी जांच के दौरान एक संगठित साइबर ठगी गिरोह की जानकारी पुलिस के सामने आई।
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जांच में यह साफ हुआ कि एसबीआई (SBI) बैंक की चांदपुर शाखा के एक खाते से पांच लाख रुपये चेक के माध्यम से निकाले गए थे। जांच अधिकारियों ने पुष्टि की कि यह पूरी राशि एक बड़े बिजनौर साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़ी हुई थी।
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ऑपरेशन CY-Vajra के तहत दर्ज हुई थी FIR

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इस गंभीर वित्तीय अपराध के प्रकाश में आने के बाद, बिजनौर पुलिस ने तत्काल प्रभाव से अपनी कार्रवाई शुरू कर दी। बैंक से सभी आवश्यक डाटा और ट्रांजैक्शन की पूरी जानकारी प्राप्त की गई, ताकि मुख्य आरोपियों तक आसानी से पहुंचा जा सके।
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पुलिस ने पुख्ता सबूतों के आधार पर उत्कर्ष तोमर नाम के संदिग्ध के खिलाफ मामला दर्ज किया। साइबर थाने में मु.अ.सं. 14/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (4) और आईटी एक्ट की धारा 66 (D) में मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना शुरू की गई थी।
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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान और बरामदगी

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विवेचना के दौरान पुलिस को इस रैकेट में शामिल अन्य साथियों के नाम भी पता चले। 12 जुलाई 2026 को साइबर क्राइम पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी उत्कर्ष तोमर (निवासी हुसैनपुर कला, शिवाला कला, जनपद बिजनौर) को गिरफ्तार कर लिया।
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इस बिजनौर साइबर ठगी मामले में उसके दूसरे साथी प्रवेन्द्र सिंह को भी हिरासत में लिया गया। प्रवेन्द्र मूल रूप से आगरा का निवासी है, जो वर्तमान में लक्सर, हरिद्वार में रह रहा था। इनके कब्जे से घटना में इस्तेमाल 02 मोबाइल फोन और 41,030 रुपये नकद बरामद हुए हैं।
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टेलीग्राम और गेमिंग ऐप से कैसे होती थी ठगी?

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पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि हरिद्वार निवासी उनका एक साथी निशान्त इस पूरे खेल का मुख्य सूत्रधार था। निशान्त ने ही उन्हें गेमिंग के जरिए हुई ठगी की रकम को बैंक खातों में मंगाकर लाभ कमाने का लालच दिया था।
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आरोपियों ने यह स्वीकार किया है कि वे ठगी के पैसे अपने और अन्य परिचित लोगों के खातों में मंगाते थे। इसके बाद बैंक से पैसे निकालकर अपना कमीशन काटते थे और बची हुई रकम निशान्त के माध्यम से टेलीग्राम पर जुड़े एक अज्ञात व्यक्ति तक पहुंचा देते थे।
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लालच में आकर दिया अपराध को अंजाम

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गिरफ्तार हुए दोनों आरोपियों को इस बात की पूरी जानकारी थी कि उनके खातों में आने वाला पैसा साइबर ठगी का है। पुलिस की कड़ी पूछताछ में उन्होंने कुबूल किया कि अधिक मुनाफे और कमीशन के लालच में उन्होंने इस बिजनौर साइबर ठगी की घटना को अंजाम दिया।
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मामले को सुलझाने वाली पुलिस टीम की भूमिका

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इस जटिल साइबर अपराध का पर्दाफाश करने में बिजनौर थाना साइबर क्राइम पुलिस टीम की भूमिका बेहद सराहनीय रही। इस धरपकड़ अभियान का नेतृत्व प्रभारी निरीक्षक श्रीमती पुष्पा देवी और निरीक्षक अरफान अली ने संयुक्त रूप से किया।
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उनके साथ उप-निरीक्षक शुऐब खान, हेड कांस्टेबल सचिन तोमर, प्रदीप कुमार, शहजाद और योगेश कुमार ने भी इस पूरी जांच और गिरफ्तारी अभियान में अपनी महत्वपूर्ण और सक्रिय भूमिका निभाई।
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'ऑपरेशन CY-Vajra' के तहत मिली यह सफलता बिजनौर पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इस बिजनौर साइबर ठगी मामले के खुलासे से स्पष्ट है कि पुलिस साइबर अपराधियों पर नकेल कसने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। फिलहाल पुलिस इस रैकेट के फरार आरोपी निशान्त और टेलीग्राम पर जुड़े अज्ञात मास्टरमाइंड की सरगर्मी से तलाश कर रही है, जिसके बाद और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
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यह समाचार लेख बिजनौर पुलिस द्वारा दिनांक 12.07.2026 को जारी की गई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति (प्रेस नोट) और तथ्यों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सटीक और तथ्यात्मक सूचना प्रदान करना है। पुलिस मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है। किसी भी व्यक्ति का दोष सिद्ध करना माननीय न्यायालय के अधीन है।
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