बिजनौर/नूरपुर। उत्तर प्रदेश में आर्थिक अपराधों और टैक्स चोरी के खिलाफ चलाए जा रहे कड़े अभियानों के बीच जनपद बिजनौर की नूरपुर थाना पुलिस को एक बड़ी और अहम कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने माल की वास्तविक आपूर्ति (Actual Supply) किए बिना, केवल कागजों पर फर्जी बिलिंग के जरिए वस्तु एवं सेवा कर (GST) की चोरी करने वाले एक शातिर अंतर-जनपदीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाने की नीयत से फर्जी 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' (ITC) क्लेम करने के इस संगीन मामले में पुलिस ने मुरादाबाद जिले के रहने वाले दो मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है।READ ALSO:-दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर पर बड़ा बदलाव: पीक ऑवर्स में चलेंगी 8 अतिरिक्त ट्रेनें, रोजाना सफर कर रहे 1 लाख से ज्यादा यात्री
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इस पूरी कार्रवाई ने टैक्स चोरों और शेल (फर्जी) कंपनियां बनाकर रातों-रात अमीर बनने का ख्वाब देखने वाले सफेदपोश अपराधियों में हड़कंप मचा दिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पुलिस और साइबर सेल की टीमें लगातार पूछताछ कर रही हैं, ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य सफेदपोश चेहरों और मास्टरमाइंड को भी बेनकाब किया जा सके।
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कैसे शुरू हुई जांच: राज्य कर विभाग ने दर्ज कराई थी FIR

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इस बड़े आर्थिक घोटाले की शुरुआत और इसके खुलासे की कहानी बेहद दिलचस्प है। इस पूरे फर्जीवाड़े की सुगबुगाहट वाणिज्य कर या राज्य कर (State Tax) विभाग के रडार पर पिछले साल के अंत में ही आ गई थी।
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विभागीय डेटा एनालिटिक्स और ई-वे बिल (E-way Bill) पोर्टल की गहन जांच के दौरान अधिकारियों को एक फर्म के लेनदेन में भारी विसंगतियां नजर आईं। इसके बाद, दिनांक 23 दिसंबर 2025 को राज्य कर बिजनौर रेंज के उपायुक्त कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायक श्री आकाश कुमार ने थाना नूरपुर पुलिस को एक विस्तृत लिखित तहरीर (शिकायत) सौंपी।
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इस तहरीर में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया था कि एक फर्म जिसका नाम 'रॉयल एंटरप्राइजेज' (Royal Enterprises) है, उसके द्वारा सुनियोजित तरीके से भारी जीएसटी चोरी की जा रही है। जांच में सामने आया कि इस फर्म का घोषित स्वामी (मालिक) साहिम पुत्र नवाब है, जो मलिहाबाद, लखनऊ, उत्तर प्रदेश का निवासी है। इस फर्म ने बिना कोई वास्तविक व्यापार किए, धोखाधड़ी के उद्देश्य से सरकार से फर्जी ITC (Input Tax Credit) क्लेम कर लिया था।
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शिकायत की गंभीरता और सरकारी खजाने को होने वाले नुकसान को देखते हुए, नूरपुर पुलिस ने तत्काल एक्शन लेते हुए मुख्य आरोपी साहिम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धारा 318 (4) (धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति का परिदान उत्प्रेरित करना) के तहत मुकदमा अपराध संख्या 426/25 पंजीकृत कर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी थी।
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जांच में आए नए नाम: मुरादाबाद के 2 शातिरों तक पहुंची पुलिस

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दर्ज मुकदमे की विवेचना (Investigation) जब नूरपुर पुलिस और अपराध शाखा (Crime Branch) ने संयुक्त रूप से आगे बढ़ाई, तो इस केस की परतें खुलती चली गईं। पुलिस को पता चला कि 'रॉयल एंटरप्राइजेज' केवल एक मुखौटा (Front) थी, जबकि इस पूरे फर्जी कागजी जाल (Fake Billing Network) को बुनने और ऑपरेट करने वाले असल खिलाड़ी कोई और ही थे।
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सर्विलांस, कॉल डिटेल्स और तकनीकी साक्ष्यों (Digital Evidences) का गहराई से विश्लेषण करने के बाद पुलिस की जांच का सुई मुरादाबाद जनपद की ओर घूमी। इस दौरान दो नए और बेहद अहम नाम प्रकाश में आए, जो पर्दे के पीछे से इस पूरे सिंडिकेट को तकनीकी सहायता और फर्जी दस्तावेज मुहैया करा रहे थे।
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ठोस साक्ष्यों की प्राप्ति के बाद, पुलिस ने दर्ज मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़ा धाराओं— 336(3), 338, 340(2) और 61(2) की भी वृद्धि कर दी। ये धाराएं मुख्य रूप से कूटकरण (Forgery), फर्जी दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने और आपराधिक साजिश रचने से संबंधित हैं, जो इस अपराध की गंभीरता को कई गुना बढ़ा देती हैं।
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21 मई 2026: नूरपुर पुलिस का निर्णायक एक्शन और गिरफ्तारी

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पुलिस टीम पिछले कई दिनों से इन नामजद आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थी। अंततः सटीक मुखबिर तंत्र और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से, दिनांक 21 मई 2026 (गुरुवार) को थाना नूरपुर पुलिस ने एक सफल घेराबंदी करते हुए इस अभियोग से संबंधित दोनों वांछित अभियुक्तों को धर दबोचा।
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गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण:

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    इल्यास (पुत्र साहिद हुसैन) – निवासी: ग्राम नानपुर, थाना कुन्दरकी, जनपद मुरादाबाद।
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    मौ. जैद (पुत्र मौ. रफी) – निवासी: मोहल्ला लाजपतनगर (निकट लाजपतनगर पुलिस चौकी), थाना कटघर, जनपद मुरादाबाद।
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क्या-क्या हुआ बरामद? (Details of Recoveries)

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इन दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी केवल शारीरिक रूप से पकड़ में आना नहीं है, बल्कि पुलिस के हाथ वह 'कागजी और डिजिटल खजाना' भी लगा है जो इस फर्जीवाड़े की पूरी पोल खोलता है। पुलिस ने जामा तलाशी के दौरान आरोपियों के कब्जे से निम्नलिखित महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए हैं:
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    दो टैक्स इनवॉइस (Two Tax Invoices): ये वो जाली बिल हैं जिन्हें जनरेट करके बिना माल भेजे ही करोड़ों का लेनदेन दिखाया जाता था और सरकार से इनपुट टैक्स क्रेडिट की मांग की जाती थी।
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    दो ई-वे-बिल (Two E-Way Bills): माल के परिवहन (Transportation) को कागजों पर असली साबित करने के लिए बनाए गए ये फर्जी ई-वे बिल इस रैकेट के सबसे अहम सबूत हैं।
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    एक मोबाइल (सैमसंग कंपनी): पुलिस के अनुसार, इस स्मार्टफोन में कई अन्य फर्जी कंपनियों, व्हाट्सएप चैट्स, बैंक ट्रांजैक्शन और सिंडिकेट के अन्य सदस्यों के संपर्क नंबर मौजूद हो सकते हैं। इसे विस्तृत जांच के लिए साइबर फोरेंसिक लैब भेजा जा रहा है।
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क्या होता है 'फर्जी ITC क्लेम' और कैसे होती है यह धोखाधड़ी?

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आम जनता के मन में यह सवाल जरूर आता है कि आखिर यह फर्जी ITC क्लेम है क्या, जिसे लेकर पुलिस और जीएसटी विभाग इतने सख्त हैं?
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सरल शब्दों में समझें तो, वस्तु एवं सेवा कर (GST) प्रणाली में, जब कोई कारोबारी अपना कच्चा माल खरीदता है, तो वह उस पर टैक्स चुकाता है। माल बेचते समय उसे इस चुकाए गए टैक्स की छूट मिलती है, जिसे 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' (ITC) कहा जाता है। आर्थिक अपराधी इसी नियम का दुरुपयोग करते हैं। वे कागजों पर फर्जी (Shell) कंपनियां बनाते हैं। वे असल में कोई माल न तो खरीदते हैं और न ही बेचते हैं। वे सिर्फ एक-दूसरे को कागजी बिल (Tax Invoices) जारी करते हैं। इन फर्जी बिलों के आधार पर वे सरकार के पोर्टल पर दिखाते हैं कि उन्होंने टैक्स चुका दिया है और फिर चालाकी से सरकार से ITC रिफंड या क्रेडिट क्लेम कर लेते हैं। यह सीधे तौर पर देश के राजस्व (सरकारी खजाने) पर एक बड़ा डाका है, जिससे विकास कार्यों को नुकसान पहुंचता है।
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गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम की भूमिका

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इस जटिल आर्थिक अपराध को सुलझाने और आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में जनपद बिजनौर की पुलिस टीम ने शानदार समन्वय और पेशेवर कार्यप्रणाली (Professionalism) का परिचय दिया है। इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में निम्नलिखित अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे:
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    श्री अजीत प्रताप सिंह (निरीक्षक, अपराध शाखा, जनपद बिजनौर) - जिनके नेतृत्व में तकनीकी विश्लेषण किया गया।
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    श्री श्रीकान्त सत्यार्थी (उप-निरीक्षक, थाना नूरपुर, जनपद बिजनौर) - जिन्होंने जमीनी स्तर पर टीम का नेतृत्व किया।
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    पवन कुमार (कांस्टेबल, थाना नूरपुर)
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    किशनपाल सिंह (रिक्रूट कांस्टेबल, थाना नूरपुर)
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इन अधिकारियों की मुस्तैदी के कारण ही मुरादाबाद के ये शातिर आरोपी बिजनौर पुलिस के हत्थे चढ़ सके।
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आगे क्या? (Future Course of Action)

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फिलहाल नूरपुर थाना पुलिस ने दोनों गिरफ्तार आरोपियों— इल्यास और मौ. जैद को न्यायालय में पेश कर जेल भेजने की कार्रवाई (अन्य आवश्यक कार्यवाही प्रचलित है) शुरू कर दी है। इसके साथ ही, पुलिस और राज्य कर विभाग (State Tax Department) की संयुक्त टीम अब बरामद किए गए सैमसंग मोबाइल फोन और टैक्स इनवॉइस का गहराई से ऑडिट कर रही है।
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यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि 'रॉयल एंटरप्राइजेज' के नाम पर अब तक कितने करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया जा चुका है और इस अवैध पैसे को किन-किन बैंक खातों में डाइवर्ट किया गया है। माना जा रहा है कि इस मामले में अभी लखनऊ के घोषित फर्म स्वामी 'साहिम' सहित कुछ और सफेदपोश लोगों की गिरफ्तारियां हो सकती हैं। बिजनौर पुलिस का यह एक्शन यह साफ संदेश देता है कि नए आपराधिक कानूनों (BNS) के लागू होने के बाद, आर्थिक अपराध और टैक्स चोरी जैसे मामलों में प्रशासन की 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति और भी अधिक सख्त हो गई है।
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