उत्तर प्रदेश में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस प्रशासन लगातार सख्त कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में आज की सबसे बड़ी बिजनौर न्यूज सामने आई है। जिले की नूरपुर पुलिस ने 'साइ-वज्र' (Cy-Vajra) अभियान के तहत एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर अपराधी गिरोह का पर्दाफाश किया है।READ ALSO:-बिजनौर में तेज रफ्तार का कहर: नगीना रोड टोल प्लाजा के पास रोडवेज बस ने कार को मारी जोरदार टक्कर, मची चीख-पुकार
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यह शातिर गिरोह वाहनों की हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) की बुकिंग के नाम पर भोले-भाले नागरिकों से ऑनलाइन ठगी कर रहा था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में 7 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर एक बड़ी सफलता हासिल की है। यह कार्रवाई साइबर क्राइम को रोकने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
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साइ-वज्र अभियान के तहत नूरपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

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बिजनौर जिले में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए पुलिस ने 'साइ-वज्र' (Cy-Vajra) नाम से एक विशेष अभियान चलाया हुआ है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य डिजिटल धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों को जड़ से खत्म करना है।
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इसी अभियान के अंतर्गत नूरपुर पुलिस को एक बड़ी सूचना मिली थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 09 जुलाई 2026 को एक गुप्त ठिकाने पर छापेमारी की। इस सघन कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से गिरोह के 7 सदस्यों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
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फर्जी HSRP वेबसाइट और AI टूल्स से ऐसे करते थे ठगी

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यह गिरोह लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए बेहद तकनीकी और शातिर तरीका अपनाता था। बिजनौर न्यूज के स्थानीय अपडेट्स के अनुसार, अपराधियों ने bookkhsrplate.com और bookmyhsrp.com नाम से पूरी तरह से फर्जी वेबसाइटें बना रखी थीं।
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ये फर्जी पोर्टल दिखने में बिल्कुल असली और आधिकारिक सरकारी वेबसाइट जैसे ही लगते थे। आम नागरिक आसानी से इन वेबसाइटों को सरकारी पोर्टल समझकर अपनी गाड़ी की डिटेल्स और पैसे जमा कर देते थे।
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पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि वेबसाइट बनाने के लिए GoDaddy के जरिए डोमेन और होस्टिंग खरीदी गई थी। वेबसाइट को बिल्कुल असली जैसा लुक देने के लिए आरोपियों ने ChatGPT जैसे एडवांस AI टूल्स और अन्य आधुनिक तकनीकी संसाधनों का भरपूर इस्तेमाल किया था।
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बैंक खातों में मंगाया जाता था ठगी का पैसा

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भोले-भाले लोगों से बुकिंग के नाम पर ऐंठी गई धनराशि सीधे आरोपियों के बैंक खातों में ट्रांसफर होती थी। जांच में सामने आया है कि ठगी का यह पैसा मुख्य रूप से मोहित कुमार, अनस, प्रशांत कुमार और मोहम्मद फैजान नामक आरोपियों के खातों में मंगवाया जाता था।
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जब पैसा इन खातों में आ जाता था, तो गिरोह के सभी सदस्य इसे आपस में बराबर बांट लेते थे। इतना ही नहीं, जो लोग ठगी के पैसे मंगाने के लिए अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे, उन्हें भी मुनाफे में से कमीशन के तौर पर एक तय हिस्सा दिया जाता था।
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15 राज्यों से 29 शिकायतों के बाद हुआ भंडाफोड़

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इस गिरोह का नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं था, बल्कि यह पूरे देश में फैला हुआ था। पुलिस को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के माध्यम से लगातार ऐसी ठगी की शिकायतें मिल रही थीं।
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अधिकारियों ने जब इन शिकायतों का गहराई से विश्लेषण किया, तो पता चला कि देश भर के 15 अलग-अलग राज्यों से कुल 29 शिकायतें सिर्फ इसी गिरोह के खिलाफ दर्ज थीं। इसके बाद नूरपुर थाने में मुकदमा दर्ज कर डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए इन आरोपियों की लोकेशन निकाली गई।
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बिजनौर न्यूज: 11 मोबाइल, लैपटॉप और नकदी बरामद

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गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने आरोपियों के ठिकाने की तलाशी ली, तो वहां से साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण उपकरण बरामद हुए। बिजनौर न्यूज के इस मामले में पुलिस ने मौके से कुल 11 स्मार्ट मोबाइल फोन जब्त किए हैं।
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बरामद किए गए मोबाइलों में सैमसंग, ओप्पो, मोटोरोला, वनप्लस, आईफोन और रीयलमी जैसी महंगी कंपनियों के स्मार्टफोन शामिल हैं। इसके अलावा, ठगी के मुख्य काम में इस्तेमाल होने वाला 1 लैपटॉप (चार्जर सहित) और 12,300 रुपये की नकद राशि भी बरामद की गई है।
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मुख्य आरोपी तुषार शर्मा का पुराना आपराधिक इतिहास

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पुलिस की शुरुआती जांच में गिरोह के मुख्य सरगना की पहचान तुषार शर्मा के रूप में हुई है। पूछताछ और रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला है कि तुषार शर्मा का पहले से ही एक लंबा आपराधिक इतिहास रहा है।
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उसके खिलाफ पूर्व में भी बिजनौर के नूरपुर थाने में गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज मुकदमा भी शामिल है। पुलिस अब इन सभी आरोपियों के अन्य संबंधित बैंक खातों और संपत्तियों की विस्तृत जांच कर रही है।
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निष्कर्ष के तौर पर, नूरपुर पुलिस द्वारा किए गए इस भंडाफोड़ ने कई राज्यों में फैले साइबर जाल को तोड़ा है। बिजनौर न्यूज की यह रिपोर्ट साबित करती है कि इंटरनेट पर किसी भी सरकारी सेवा का उपयोग करते समय आधिकारिक लिंक की पुष्टि करना कितना आवश्यक है। पुलिस की यह 'साइ-वज्र' कार्रवाई भविष्य में साइबर अपराधियों के लिए एक सख्त चेतावनी साबित होगी।
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