बिजनौर (शकील अहमद ब्यूरो चीफ बिजनौर): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से सरकारी तंत्र की पोल खोलता एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामला नजीबाबाद क्षेत्र के रायपुर सादाद (Raipur Sadat) का बताया जा रहा है, जहां एक व्यक्ति खुद को डाकिया बताकर पासपोर्ट डिलीवरी करने पहुंचता है, लेकिन दस्तावेज सौंपने से पहले वह खुलेआम 'सुविधा शुल्क' की मांग करता नजर आ रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि स्थानीय सूत्रों के अनुसार, वीडियो में दिख रहा शख्स डाक विभाग का नियमित कर्मचारी (Permanent Employee) है ही नहीं। इस खुलासे ने पासपोर्ट जैसे अति-संवेदनशील दस्तावेजों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।READ ALSO:-बिजनौर में रफ्तार का कहर: रॉन्ग साइड ड्राइविंग पड़ी भारी, रोडवेज बस से सीधी भिड़ंत के बाद हाईवे पर हवा में उछलकर पलटी बोलेरो; ठेकेदार गंभीर घायल
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क्या है वायरल वीडियो में? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में एक शख्स हाथ में पासपोर्ट और कुछ अन्य डाक लेकर खड़ा है। जब वह पासपोर्ट धारक के पास पहुंचता है, तो दस्तावेज देने के एवज में 100 रुपये की मांग करता है। वीडियो में उसे यह कहते हुए सुना जा सकता है कि यह उसका "हक" या "चाय-पानी" है। जब सामने वाला व्यक्ति (संभवतः पासपोर्ट धारक या उसका परिजन) पैसे देने में आनाकानी करता है और सवाल पूछता है, तो कथित डाकिया पासपोर्ट न देने और उसे वापस ले जाने की बात कहता है। उसकी भाव-भंगिमा से साफ है कि उसे किसी कार्यवाही का डर नहीं है।
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'फर्जी' डाकिया और असली खतरा इस प्रकरण का सबसे गंभीर पहलू रिश्वतखोरी से ज्यादा 'सुरक्षा चूक' का है। स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि वीडियो में रिश्वत मांग रहा व्यक्ति डाक विभाग का अधिकृत पोस्टमैन नहीं है।
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    बड़ा सवाल: यदि यह व्यक्ति विभाग का कर्मचारी नहीं है, तो भारत सरकार द्वारा जारी किया गया पासपोर्ट जैसा महत्वपूर्ण दस्तावेज उसके हाथ में कैसे आया?
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    गोपनीयता का हनन: पासपोर्ट में नागरिक की निजी जानकारी, बायोमेट्रिक्स का लिंक और यात्रा विवरण होते हैं। ऐसे दस्तावेजों को किसी अनाधिकृत व्यक्ति (Unauthorized Person) के हाथों में सौंपना डाक विभाग की घोर लापरवाही को दर्शाता है। क्या विभाग ने अपने काम का 'आउटसोर्सिंग' किसी प्राइवेट हाथों में कर दिया है?
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नियम क्या कहते हैं? भारतीय डाक विभाग (India Post) और विदेश मंत्रालय (MEA) के सख्त निर्देश हैं कि पासपोर्ट केवल अधिकृत पोस्टमैन द्वारा सीधे आवेदक (Addressee) या उसके अधिकृत प्रतिनिधि को ही सौंपा जाना चाहिए। इसके लिए पहचान पत्र की जांच करना अनिवार्य होता है। किसी भी तरह की डिलीवरी फीस या रिश्वत मांगना गैरकानूनी है। बावजूद इसके, बिजनौर के इस वीडियो में नियमों की धज्जियां उड़ती साफ दिखाई दे रही हैं।
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सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय नागरिकों में भारी रोष है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग इसे शेयर करते हुए डाक विभाग और जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "अगर पासपोर्ट जैसा दस्तावेज सुरक्षित हाथों में नहीं है, तो फिर आम चिट्ठियों का क्या हाल होगा?" वहीं, अन्य लोगों ने इसे भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा बताया है।
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अधिकारियों की चुप्पी खबर लिखे जाने तक डाक विभाग के स्थानीय अधिकारियों की तरफ से इस वीडियो पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह जांच का विषय है कि क्या यह व्यक्ति किसी पोस्टमैन का सहयोगी है जिसे अवैध रूप से काम पर रखा गया है, या फिर पूरा मामला कुछ और है। प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि वह वीडियो का संज्ञान लेकर आरोपी की पहचान करेगा और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिराएगा।
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यह घटना केवल 100 रुपये की नहीं, बल्कि सिस्टम पर भरोसे की है। अगर अनाधिकृत लोग सरकारी दस्तावेजों की डिलीवरी करेंगे, तो देश की आंतरिक सुरक्षा और नागरिकों की निजता हमेशा खतरे में रहेगी।
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ब्यूरो रिपोर्ट, बिजनौर (वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन इसने सिस्टम की खामियों को उजागर जरूर कर दिया है।)
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