बिजनौर/जालौन (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध, माफियाओं और अवैध कारोबारियों के खिलाफ योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) नीति का असर एक बार फिर बड़े पैमाने पर देखने को मिला है। प्रदेश में अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर और कुर्की की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई करते हुए जालौन जिला प्रशासन ने बिजनौर (Bijnor) जिले के स्योहारा थाना क्षेत्र में स्थित अतीक अहमद की लगभग 1.68 अरब रुपये (1 अरब 68 करोड़ 13 लाख 32 हजार 600 रुपये) की बेतहाशा संपत्ति को कुर्क करने का सख्त आदेश पारित किया है।READ ALSO:-1 जून से बदलेगा मौसम का मिजाज: देश के 19 राज्यों में 90 Kmph के तूफान और भारी बारिश का 'हाई अलर्ट', IMD ने जारी की भयंकर चेतावनी
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यह कार्रवाई अपराध की दुनिया से काली कमाई अर्जित करने वाले सफेदपोश माफियाओं के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। यह मामला सिर्फ अवैध संपत्ति का नहीं है, बल्कि 'फिश फूड' (मछली के चारे) के नाम पर बड़े पैमाने पर की जा रही गोमांस (Beef Smuggling) की अंतर्राज्यीय तस्करी से भी जुड़ा हुआ है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि यह पूरा नेटवर्क कैसे काम कर रहा था, कुर्क होने वाली संपत्ति का पूरा ब्यौरा क्या है, और जालौन से लेकर बिजनौर तक पुलिस ने इस सिंडिकेट का भंडाफोड़ कैसे किया।
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क्या है पूरा मामला और कुर्क होने वाली संपत्ति का विवरण?

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जालौन के जिला मजिस्ट्रेट (DM) श्री राजेश कुमार पाण्डेय द्वारा गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम-1986 (यूपी गैंगस्टर एक्ट) की धारा-14 के अंतर्गत यह बेहद कड़ा आदेश जारी किया गया है। यह आदेश स्पष्ट करता है कि अपराध से अर्जित की गई किसी भी संपत्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
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संपत्ति की चौंकाने वाली कीमत: पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, कुर्क की जाने वाली संपत्ति की कुल कीमत 1,68,13,32,600.00 रुपये (एक अरब अड़सठ करोड़ तेरह लाख बत्तीस हजार छह सौ रुपये) आंकी गई है। इतनी बड़ी कीमत की कुर्की की कार्रवाई उत्तर प्रदेश के हालिया इतिहास की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।
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कुर्क होने वाली संपत्तियों में क्या-क्या शामिल है? जिलाधिकारी के आदेश के अनुसार, बिजनौर जनपद के थाना स्योहारा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम याकूबपुर में स्थित संपत्तियों पर यह कार्रवाई होनी है।
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    जमीन के कई गाटा (प्लॉट): ग्राम याकूबपुर की कुल 10 गाटा संख्याओं की विस्तृत भूमि को कुर्क किया जाएगा, जिसे अपराध की काली कमाई से खरीदा गया था।
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    ओमर इन्टरनेशनल स्लाटर हाउस: गाटा संख्या 46, 102, 40, 52, 54, और 47 पर एक बेहद विशाल और आधुनिक ओमर इन्टरनेशनल स्लाटर हाउस (Omar International Slaughter House) का पूरा भवन और परिसर निर्मित है। इस पूरे स्लॉटर हाउस को सील कर प्रशासन अपने कब्जे में लेगा।
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15 दिन का सख्त अल्टीमेटम और SDM धामपुर बने 'रिसीवर'

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जिला मजिस्ट्रेट जालौन के आदेश के अनुपालन में जालौन के पुलिस अधीक्षक (SP) ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस आदेश को जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जाए। प्रशासन ने इस पूरी कुर्की की प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए मात्र 15 दिनों की समय-सीमा तय की है। 15 दिन के भीतर पुलिस और राजस्व विभाग को मिलकर इस संपत्ति को कुर्क करना है और उसकी पूर्ण रिपोर्ट तथा अनुपालन आख्या माननीय न्यायालय को उपलब्ध करानी है।
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इसके साथ ही, इस पूरी 1.68 अरब की संपत्ति की देखरेख और प्रशासनिक नियंत्रण के लिए उप जिलाधिकारी (SDM) धामपुर, जिला बिजनौर को संपत्ति का आधिकारिक 'रिसीवर' (Receiver) नियुक्त किया गया है। रिसीवर की नियुक्ति का अर्थ यह है कि अब इस संपत्ति का कोई भी क्रय-विक्रय (खरीद-फरोख्त), हस्तांतरण या इसका व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा। इसका पूरा प्रशासनिक अधिकार अब सरकार के पास होगा।
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गैंगस्टर अतीक अहमद: कौन है यह सफेदपोश तस्कर?

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इस अरबों रुपये की संपत्ति के पीछे जो मुख्य मास्टरमाइंड है, उसका नाम अतीक अहमद (पुत्र मो० उमर) है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अतीक अहमद मूल रूप से नई दिल्ली का निवासी है, लेकिन उसका मुख्य ठिकाना बिजनौर के थाना स्योहरा अंतर्गत कस्बा सहसपुर में है।
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अतीक कोई मामूली अपराधी नहीं है। पुलिस की विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) के अनुसार, अतीक अहमद एक बड़े और खूंखार गैंग लीडर गुलजार के साथ मिलकर एक अत्यंत संगठित अंतरजनपदीय (Inter-district) और अंतर्राज्जीय (Inter-state) गिरोह का संचालन करता था। इस गिरोह का मुख्य पेशा समाज विरोधी गतिविधियों में लिप्त होना, अवैध धन अर्जित करना और एक बहुत बड़ा तस्करी का रैकेट चलाना था।
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'फिश फूड' का धोखा और गोमांस की तस्करी: कैसे खुला राज?

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अतीक और गुलजार का यह सिंडिकेट कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक बेहद शातिर 'मोडस ऑपरेंडी' (Modus Operandi) का इस्तेमाल करता था। यह गिरोह ओमर इन्टरनेशनल स्लाटर हाउस के नाम की आड़ में और फर्जी (कूटरचित) दस्तावेजों के माध्यम से बड़े पैमाने पर मांस की तस्करी करता था।
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सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस की चेकिंग से बचने के लिए ट्रकों और कंटेनरों पर लदे माल को कागजों में 'फिश फूड' (मछली का चारा) दर्शाया जाता था। जब पुलिस को इस बात की भनक लगी और जालौन पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत इनके वाहनों को पकड़ा, तो जो सच सामने आया उसने प्रशासन के होश उड़ा दिए।
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जब पकड़े गए वाहनों में लदे 'फिश फूड' के डिब्बों के सैंपल्स को जांच के लिए फोरेंसिक लैब मथुरा (Forensic Science Laboratory, Mathura) भेजा गया, तो लैब की आधिकारिक जांच रिपोर्ट ने इस बात की शत-प्रतिशत पुष्टि कर दी कि डिब्बों के अंदर मछली का चारा नहीं, बल्कि गौ-मांस (Cow Meat) भरा हुआ था।
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उत्तर प्रदेश में गौ-हत्या और गोमांस की तस्करी एक बेहद संगीन और संज्ञेय अपराध है (उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम के तहत)। फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद जालौन और बिजनौर पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क के खिलाफ कमर कस ली। अभियुक्त अतीक अहमद और उसके साथियों के विरुद्ध जनपद बिजनौर के थाना स्योहारा और जनपद जालौन में कई गंभीर आपराधिक मामले (FIR) पंजीकृत किए गए, जिसके आधार पर अंततः यह गैंगस्टर की कार्रवाई अमल में लाई गई है।
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अंतरजनपदीय समन्वय (Inter-District Coordination) की मिसाल

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यह कार्रवाई इस बात का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि जब उत्तर प्रदेश पुलिस के दो अलग-अलग जिले आपस में सटीक समन्वय (Coordination) स्थापित करते हैं, तो बड़े से बड़े माफिया का साम्राज्य कैसे ताश के पत्तों की तरह ढह जाता है।
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अपराध जालौन क्षेत्र में भी फैला हुआ था और इसकी जड़ें बिजनौर के स्योहारा स्थित स्लाटर हाउस तक जा रही थीं। जालौन के डीएम और एसपी ने बिजनौर प्रशासन के साथ मिलकर न केवल दस्तावेजों की कड़ियों को जोड़ा, बल्कि फोरेंसिक साक्ष्यों को आधार बनाकर एक ऐसा मजबूत कानूनी ड्राफ्ट तैयार किया, जिससे 1.68 अरब की इतनी विशाल संपत्ति को कुर्क करने का आदेश सफलतापूर्वक पारित हो सका।
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माफियाओं को कड़ा संदेश

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बिजनौर के ओमर इन्टरनेशनल स्लाटर हाउस पर हुई यह 1.68 अरब रुपये की कुर्की की कार्रवाई उत्तर प्रदेश के उन सभी आपराधिक गिरोहों के लिए एक खुला और कड़ा संदेश है, जो सोचते हैं कि वे फर्जी कंपनियों, सफेदपोश कारोबार या फर्जी दस्तावेजों की आड़ में कानून की पकड़ से बच जाएंगे।
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योगी सरकार और यूपी पुलिस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अपराध से कमाए गए एक-एक पैसे का हिसाब लिया जाएगा। आने वाले 15 दिनों के भीतर जब बिजनौर प्रशासन भारी पुलिस बल के साथ याकूबपुर गांव में इस स्लॉटर हाउस और जमीनों को सरकारी कब्जे (कुर्की) में लेगा, तो वह पल इस क्षेत्र के आपराधिक नेटवर्कों की कमर तोड़ने वाला साबित होगा। फिलहाल, प्रशासन की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई की स्थानीय स्तर से लेकर शासन तक भारी प्रशंसा की जा रही है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य गुर्गों और उनके स्लीपर सेल्स की भी तलाश कर रही है।
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