बिजनौर (09 मई, 2026): न्याय के मंदिर में जब आपसी सुलह और समझौते का मार्ग प्रशस्त होता है, तो न केवल मुकदमों का बोझ कम होता है, बल्कि समाज में शांति और सौहार्द की स्थापना भी होती है। इसी परिकल्पना को साकार करते हुए आज बिजनौर जनपद न्यायालय परिसर में 'राष्ट्रीय लोक अदालत' का भव्य और ऐतिहासिक आयोजन किया गया। यह लोक अदालत न केवल वादों की विशाल संख्या के लिहाज से, बल्कि पीड़ित पक्षकारों को मिले त्वरित और सुलभ न्याय के दृष्टिकोण से भी एक बड़ी उपलब्धि बनकर उभरी है।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर में रिश्तों का कत्ल: 'पत्नी पर रखता था गंदी नजर, मांगता था हिस्सा...', छोटे भाई ने नशे में धुत्त बड़े भाई को ईंट से कूचकर उतारा मौत के घाट
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दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ

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माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UPSLSA), लखनऊ के दिशा-निर्देशों के कड़े और प्रभावी अनुपालन में इस राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। शनिवार की सुबह जनपद न्यायालय बिजनौर परिसर में माननीय जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिजनौर, श्री संजय कुमार-VII के कर कमलों द्वारा दीप प्रज्वलित कर इस महा-आयोजन का विधिवत शुभारंभ किया गया।
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इस वृहद स्तर के कार्यक्रम का सफल आयोजन माननीय जनपद न्यायाधीश श्री संजय कुमार-VII के कुशल मार्गदर्शन और दूरदर्शी सोच का परिणाम रहा। सम्पूर्ण लोक अदालत के समन्वय और सुचारू संचालन का महत्वपूर्ण दायित्व लोक अदालत के नोडल अधिकारी तथा अपर जनपद न्यायाधीश, बिजनौर श्री लोकेश नागर द्वारा बेहद जिम्मेदारी और सतर्कता के साथ निभाया गया। उनके अथक प्रयासों से न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, वादकारियों, पुलिस प्रशासन और बैंक अधिकारियों के बीच एक बेहतरीन तालमेल देखने को मिला।
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आंकड़ों की जुबानी: न्याय का विशाल स्वरूप

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आज की लोक अदालत के आंकड़े अपने आप में एक गौरवशाली गाथा प्रस्तुत करते हैं। न्यायालयों में लंबित वादों (Pending Cases) और न्यायालय पहुंचने से पूर्व के मामलों (Pre-litigation Cases) को मिलाकर कुल 74,269 वादों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया। अगर केवल न्यायालय स्तर के मुकदमों की बात करें, तो विभिन्न न्यायालयों द्वारा कुल 13,952 लंबित वादों को आपसी समझौते और सुलभ न्याय की प्रक्रिया के तहत सुलझाया गया।
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इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सरकारी राजस्व और पीड़ितों के हक के रूप में बड़ी धनराशि का भी निस्तारण हुआ। न्यायालयों द्वारा कुल 98,06,150/- (अट्ठानवे लाख छह हजार एक सौ पचास) रुपये की धनराशि जुर्माने (Fine) के रूप में वसूल की गई। वहीं, विभिन्न दावों और मुकदमों में पक्षकारों के मध्य कुल 13,88,37,168/- (तेरह करोड़ अठासी लाख सैंतीस हजार एक सौ अड़सठ) रुपये की विशाल समझौता धनराशि (Settlement Amount) दिलाई गई। यह धनराशि चेक बाउंस, मोटर दुर्घटना दावों, पारिवारिक विवादों और बैंक रिकवरी जैसे मामलों से संबंधित है, जिसने सैकड़ों परिवारों को वर्षों की कानूनी उलझन और आर्थिक मानसिक तनाव से एक ही दिन में मुक्ति दिला दी।
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न्यायालयों और पीठासीन अधिकारियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन

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इस महा-आयोजन में जनपद के विभिन्न न्यायिक अधिकारियों ने अपने-अपने न्यायालयों में मुकदमों के निस्तारण में उल्लेखनीय योगदान दिया। इस पूरी प्रक्रिया का विस्तृत विश्लेषण इस प्रकार है:
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शीर्ष न्यायालय व परिवार न्यायालय: माननीय जनपद न्यायाधीश श्री संजय कुमार-VII द्वारा स्वयं 02 महत्वपूर्ण वादों को चिन्हित करते हुए 01 वाद का अंतिम रूप से निस्तारण किया गया। पारिवारिक विवादों को सुलझाने में परिवार न्यायालयों की भूमिका बेहद अहम रही। प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय श्री सुधीर कुमार ने 83 वादों को चिन्हित कर 21 मामलों में परिवारों को टूटने से बचाया और उनका निस्तारण किया। इसी क्रम में अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय बिजनौर श्री संजय कुमार-II ने भी 28 वादों को चिन्हित कर 19 मामलों को आपसी सुलह से समाप्त करवाया।
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मोटर दुर्घटना दावे और एन०आई० एक्ट (चेक बाउंस) मामले: सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के मामले में पीठासीन अधिकारी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण श्री ज्ञान प्रकाश सिंह ने 09 वादों का निस्तारण किया और पीड़ितों को 49,65,000/- रुपये की बड़ी समझौता धनराशि दिलवाई। स्थायी लोक अदालत अध्यक्ष श्रीमति किरन बाला द्वारा 02 वादों का निस्तारण कर 2,00,000/- रुपये का समझौता कराया गया। वहीं, अतिरिक्त न्यायालय 138 एन०आई०एक्ट (चेक बाउंस मामलों की विशेष अदालत) बिजनौर के पीठासीन अधिकारी श्री सुन्दर लाल ने 17 महत्वपूर्ण मामलों का निपटारा करते हुए 92,74,000/- रुपये की भारी जुर्माना धनराशि वसूल की। यह चेक बाउंस के मामलों में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
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अपर जनपद न्यायाधीश एवं विशेष न्यायालय: गंभीर और विशेष प्रकृति के मामलों में भी सुलह-समझौते योग्य मामलों को प्राथमिकता दी गई।
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    अपर जनपद न्यायाधीश, नगीना श्री मौ० शारिक सिद्दीकी ने 04 वादों का निस्तारण कर 1,500/- रुपये जुर्माना वसूला।
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    अपर जनपद न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट श्रीमति कल्पना पाण्डे द्वारा 03 वादों का निस्तारण कर 1,500/- रुपये जुर्माना।
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    अपर जनपद न्यायाधीश (अति० पोक्सो कोर्ट) व नोडल अधिकारी श्री लोकेश नागर द्वारा 12 वादों का निस्तारण कर 1,00,000/- रुपये की समझौता धनराशि व 33,500/- रुपये जुर्माना वसूला गया।
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    स्पेशल जज ई०सी० एक्ट श्रीमति सीमा वर्मा ने सर्वाधिक सक्रियता दिखाते हुए 294 वादों का सफल निस्तारण किया।
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    अपर जनपद न्यायाधीश त्वरित न्यायालय कोर्ट सं० 1 द्वारा 01 वाद (500/- रुपये जुर्माना) और त्वरित न्यायालय कोर्ट सं० 2 द्वारा 21 वादों का निस्तारण करते हुए 1,000/- रुपये जुर्माना वसूला गया।
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    लघुवाद न्यायाधीश श्री संजीव कुमार त्रिपाठी ने 04 वादों को निपटाया।
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मजिस्ट्रेट और सिविल न्यायालयों की अभूतपूर्व कार्यक्षमता: छोटे अपराधों, चालानों और सिविल प्रकृति के मामलों के निस्तारण में मजिस्ट्रेट अदालतों ने संख्याबल के मामले में रिकॉर्ड कायम किया।
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    मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) बिजनौर सुश्री प्रीति चौधरी द्वारा सर्वाधिक 3,365 वादों का निस्तारण किया गया और 30,700/- रुपये जुर्माना वसूला गया।
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    अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्री नरेन्द्र कुमार ने 2,660 वादों का निस्तारण किया और 52,100/- रुपये की जुर्माना राशि प्राप्त की।
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    अपर सिविल जज सी०डि० श्री शांतनु त्यागी ने 1,295 वादों में 63,000/- रुपये जुर्माना वसूला।
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    अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट सं 2 श्रीमती स्वाति चंद्रा ने 784 वाद (73,600/- जुर्माना)।
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    अपर सिविल जज सि०डि० कोर्ट सं० 2 श्री अजय कुमार-IV ने 1,100 वादों का निस्तारण कर 26,700/- रुपये का जुर्माना वसूल किया।
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    सिविल जज सी०डि० श्री नितेश कुमार सिन्हा ने 09 वादों में सुलह कराते हुए 18,03,435/- रुपये की समझौता राशि पक्षकारों को दिलवाई।
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तहसील स्तरीय और ग्राम न्यायालयों की भागीदारी: न्याय को आम जनमानस के दरवाजे तक पहुंचाने के उद्देश्य से बाहरी अदालतों का प्रदर्शन भी उत्कृष्ट रहा। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, नगीना श्रीमती वर्तिका शुभानन्द (470 वाद, 23,710/- जुर्माना), सिविल जज सि०डी०/एफटीसी श्री देवेश त्रिपाठी (315 वाद, 41,400/- जुर्माना), सिविल जज जू०डी० श्रीमति स्वाति वर्मा (329 वाद, 21,530/- जुर्माना), अपर सिविल जज जू०डि० श्री मयंक कुमार (623 वाद, 52,500/- जुर्माना), और अपर सिविल जज जू०डी०/एफटीसी श्री यतेन्द्र पाल सिंह (315 वाद, 49,400/- जुर्माना) ने बेहतरीन योगदान दिया।
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चान्दपुर से सिविल जज जू०डि० श्री अरूण कुमार राणा ने 481 वादों का निस्तारण कर 4,950/- रुपये जुर्माना वसूला। नगीना से सिविल जज जू०डि० श्रीमति नेहा राजन ने 225 वाद (10,100/- जुर्माना) और अपर सिविल जज जू०डि० श्री सुभाष ने 221 वाद (2,150/- जुर्माना) निपटाए। नजीबाबाद में सिविल जज जू०डि० श्री अरूण सिह राठौर ने 1,241 वादों का निस्तारण करते हुए 41,310/- रुपये जुर्माना धनराशि प्राप्त की। ग्राम न्यायालय धामपुर की न्यायाधिकारी सुश्री नूतन ने भी 109 वादों का निस्तारण कर 1,000/- रुपये जुर्माना वसूला।
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प्री-लिटिगेशन: विवाद को अदालत की चौखट से पहले ही सुलझाना

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लोक अदालत का सबसे सशक्त पहलू प्री-लिटिगेशन (Pre-Litigation) स्तर के मामले होते हैं। ये वे मामले हैं जो अभी तक न्यायालय में आधिकारिक रूप से मुकदमे के तौर पर दर्ज नहीं हुए हैं, जैसे बैंक ऋण की वसूली, टेलीफोन/बिजली के बिल संबंधी विवाद आदि। बिजनौर लोक अदालत ने इस मोर्चे पर अभूतपूर्व सफलता अर्जित की है। आज कुल 60,317 प्री-लिटिगेशन मामलों का निस्तारण आपसी सहमति से किया गया।
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इस प्रक्रिया में कुल 12,14,86,733/- (बारह करोड़ चौदह लाख छियासी हजार सात सौ तैंतीस) रुपये की भारी-भरकम समझौता धनराशि दिलाई गई। बैंक अधिकारियों, बीमा कंपनियों और आम जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित कर इन मामलों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया। इससे न केवल जनता का समय और पैसा बचा है, बल्कि भविष्य में अदालतों पर पड़ने वाले मुकदमों के बोझ में भी भारी कमी आएगी।
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"ना कोई जीता, ना कोई हारा"

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राष्ट्रीय लोक अदालत की मूल भावना 'ना कोई जीता, ना कोई हारा' के सिद्धांत पर आधारित है। 09 मई 2026 को बिजनौर जनपद न्यायालय द्वारा आयोजित इस लोक अदालत ने इसी सिद्धांत को पूरी तरह से चरितार्थ किया है। एक ही दिन में 74 हजार से अधिक मुकदमों का निस्तारण कोई सामान्य उपलब्धि नहीं है; यह भारतीय न्याय व्यवस्था में आम जनता के विश्वास को मजबूत करने वाला एक ऐतिहासिक कदम है।
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इस अपार सफलता का श्रेय माननीय जनपद न्यायाधीश के कुशल नेतृत्व, नोडल अधिकारी की सटीक कार्यप्रयोजना, सभी सम्मानित न्यायाधीशों की कर्मठता, अधिवक्ता संघ के पूर्ण सहयोग और न्यायालय कर्मियों की अथक मेहनत को जाता है। इस लोक अदालत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यदि सही मंच और माहौल उपलब्ध कराया जाए, तो वर्षों पुराने और जटिल विवाद भी बातचीत और आपसी सौहार्द से चुटकियों में सुलझाए जा सकते हैं। बिजनौर न्यायपालिका का यह कदम पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन गया है।
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