बिजनौर न्यूज (Bijnor News): उत्तर प्रदेश के बिजनौर लोकसभा क्षेत्र से राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के लोकप्रिय सांसद आदरणीय चंदन चौहान लगातार अपनी सक्रियता और जनसेवा के लिए सुर्खियों में हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को बिजनौर राष्ट्रीय लोकदल कार्यालय पर एक अहम मासिक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में क्षेत्र के विकास और पार्टी की रणनीतियों पर चर्चा की गई। लेकिन एक जनप्रतिनिधि के रूप में सांसद की असली परीक्षा तब होती है जब वह धरातल पर जनता के बीच मौजूद होते हैं। मासिक बैठक के उपरांत, बिजनौर न्यूज के हवाले से यह बड़ी खबर सामने आई कि माननीय सांसद चंदन चौहान तपती और भीषण गर्मी की परवाह किए बिना सीधे ग्राम झलरा पहुंचे। वहां उन्होंने ग्रामवासियों की एक गंभीर और पुरानी समस्या का संज्ञान लिया, जो रेलवे विभाग द्वारा रास्ता बंद किए जाने से उत्पन्न हुई थी।Read also:-अगले 15 घंटे 20 राज्यों पर भारी! आसमान से बरसेगी आफत, IMD ने जारी किया 60km/h की रफ्तार वाले तूफान और वज्रपात का 'महा-अलर्ट
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बिजनौर न्यूज: क्या है झलरा गांव में रेलवे रास्ते का पूरा विवाद?

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ग्राम झलरा बिजनौर के अहम ग्रामीण इलाकों में से एक है, जहां की बड़ी आबादी पूरी तरह से कृषि और पशुपालन पर निर्भर है। पिछले लगभग तीन महीनों से यहां के ग्रामीण एक बड़ी मुसीबत का सामना कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, रेलवे विभाग ने सुरक्षा कारणों या निर्माण कार्यों का हवाला देते हुए गांव का मुख्य रास्ता पूरी तरह से बंद कर दिया था। इस मुख्य मार्ग के अलावा मोहल्ले और गांव के लोगों के पास आवागमन का कोई दूसरा सुरक्षित और सुलभ विकल्प नहीं है।
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ग्रामीणों ने बताया कि उनकी लगातार शिकायतों और मांगों के बाद, रेलवे विभाग ने करीब 15 दिन पहले केवल पैदल यात्रियों के लिए एक छोटा रास्ता खोल दिया। लेकिन गांव के किसानों के लिए असली समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। कृषि प्रधान क्षेत्र होने के कारण किसानों को हर दिन अपने खेतों तक ट्रैक्टर, बुग्गी और अन्य कृषि वाहन ले जाने होते हैं। साथ ही, पशुओं के लिए भारी मात्रा में चारा भी लाना पड़ता है। वर्तमान स्थिति यह है कि किसान अपनी भैंसा-बुग्गी को रेलवे लाइन के दूसरी तरफ खड़ी करते हैं और सिर पर भारी चारे का बोझ उठाकर खतरनाक तरीके से रेलवे लाइन पार करने को मजबूर हैं। 
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अधिकारियों से सख्त वार्ता और स्थायी समाधान का आश्वासन

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तपती दोपहरी में जब सांसद चंदन चौहान झलरा गांव पहुंचे, तो ग्रामीणों में एक नई उम्मीद जगी। ग्राम प्रधान गुलशेर, शौकीन अहमद, अब्दुल खालिद, अब्दुल्ला खान, अब्दुल रहमान और अजीजुर्रहमान सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने सांसद का स्वागत किया और अपनी पीड़ा उनके सामने रखी। सांसद ने मौके पर ही स्थिति का बारीकी से मुआयना किया और देखा कि किस प्रकार किसान और महिलाएं जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार कर रहे हैं।
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बिना समय गंवाए, चंदन चौहान ने तुरंत रेलवे विभाग और स्थानीय प्रशासन के उच्च अधिकारियों से फोन पर कड़े शब्दों में वार्ता की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास या सुरक्षा के नाम पर किसानों और आम जनता के जीवन को नरक नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने रेलवे अधिकारियों से जल्द से जल्द एक ऐसा व्यवहारिक हल निकालने को कहा जिससे ट्रेनों का सुरक्षित संचालन भी हो और किसानों के कृषि वाहनों और पशुओं के चारे के लिए एक सुरक्षित क्रॉसिंग या अंडरपास/ओवरपास की व्यवस्था भी हो सके। सांसद ने ग्रामीणों को पूर्ण आश्वासन दिया कि जब तक इस समस्या का कोई स्थायी और सुरक्षित समाधान नहीं निकल जाता, वह चैन से नहीं बैठेंगे और आवश्यकता पड़ने पर रेल मंत्रालय तक इस बात को उठाएंगे। 
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रालोद पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का मिला भरपूर साथ

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सांसद चंदन चौहान के इस जनसंपर्क अभियान और ग्राउंड जीरो पर उतरकर समस्या सुलझाने के इस प्रयास में राष्ट्रीय लोकदल के कई युवा और कर्मठ पदाधिकारी भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आए। इस अवसर पर विशेष रूप से रालोद छात्र सभा के जिलाध्यक्ष परितोष चंदेल उपस्थित रहे, जो लगातार युवाओं और छात्रों के मुद्दों को उठाते रहते हैं। उनके साथ जिला महासचिव छात्र सभा फहीम अहमद, जिला सचिव अरुण कुमार, धनगर पियूष चंदेल, मुफीज आलम, और कैफ राणा सहित कई अन्य गणमान्य कार्यकर्ता भी मौजूद थे। इन सभी कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि रालोद पार्टी हमेशा किसान, मजदूर और आम आदमी के हकों की लड़ाई लड़ती आई है और आगे भी लड़ती रहेगी।
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रेलवे क्रॉसिंग पर हादसों का खतरा और बुनियादी ढांचे की जरूरत

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झलरा गांव की यह समस्या कोई इकलौती घटना नहीं है। पूरे देश में, विशेषकर उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में, रेलवे लाइनों के विस्तार और आधुनिकीकरण के दौरान अक्सर स्थानीय निवासियों की आवाजाही को नजरअंदाज कर दिया जाता है। सिर पर चारे का भारी गट्ठर लेकर रेलवे ट्रैक पार करना किसी भी दिन एक बड़े और जानलेवा हादसे का कारण बन सकता है। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि रेलवे प्रशासन किसी भी पुराने रास्ते को बंद करने से पहले ग्रामीणों के लिए एक सुलभ वैकल्पिक मार्ग (जैसे अंडरब्रिज या सर्विस रोड) का निर्माण सुनिश्चित करे।
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सांसद चंदन चौहान ने हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा सत्र में भी बिजनौर और पश्चिमी यूपी के विकास से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए थे। उन्होंने संसद में रेलवे से जुड़ी कई मांगों को प्रमुखता से रखा है। एक युवा और शिक्षित नेता के रूप में चंदन चौहान समझते हैं कि ढांचागत विकास (Infrastructure Development) का असली अर्थ तभी है जब उससे आम जनता को सहूलियत मिले, न कि उनके रोजमर्रा के जीवन में बाधा उत्पन्न हो।
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जनता के प्रति जवाबदेही का उत्कृष्ट उदाहरण

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आज के समय में जब कई राजनेता केवल वातानुकूलित कमरों में बैठकर राजनीति करना पसंद करते हैं, ऐसे में भयंकर गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच एक सांसद का अपनी जनता के बीच जाना और एक-एक व्यक्ति की बात को धैर्यपूर्वक सुनना एक सकारात्मक राजनीतिक बदलाव का संकेत है। चंदन चौहान की यह कार्यशैली यह दर्शाती है कि वह अपनी राजनीतिक विरासत (उनके दादा चौधरी नारायण सिंह यूपी के पहले उपमुख्यमंत्री थे) को पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। बिजनौर की जनता ने उन्हें जिस विश्वास के साथ संसद भेजा है, झलरा गांव का यह दौरा उसी विश्वास को और मजबूत करने का काम करता है।
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अंत में, ग्राम झलरा का यह पूरा घटनाक्रम इस बात का प्रमाण है कि यदि जनप्रतिनिधि जागरूक और सक्रिय हो, तो प्रशासन को भी जनता के हित में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। बिजनौर न्यूज के इस विशेष कवरेज से यह स्पष्ट है कि सांसद चंदन चौहान ने न केवल ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से सुना, बल्कि रेलवे अधिकारियों पर दबाव बनाकर इसके त्वरित समाधान की दिशा में एक ठोस कदम भी उठाया है। अब झलरा के ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही उनके कृषि वाहनों और पशुओं के चारे के लिए एक सुरक्षित और सुगम रास्ता उपलब्ध होगा, जिससे उनके जीवन का एक बड़ा संघर्ष खत्म हो सकेगा। बिजनौर प्रशासन और रेलवे विभाग को भी इस मामले में तत्परता दिखाते हुए बिना किसी देरी के जनहित में उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
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