बिजनौर (Khabreelal News Desk): उत्तर प्रदेश का बिजनौर जिला इन दिनों केवल अपनी खेती या नदियों के लिए ही नहीं, बल्कि 'गुलदार' (Leopard) के बढ़ते आतंक के लिए भी पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। बिजनौर के ग्रामीण इलाकों में गुलदार का खौफ इस कदर हावी हो चुका है कि अब लोग शाम ढलते ही अपने घरों के दरवाजे बंद करने को मजबूर हैं। इसी खौफ को और भी ज्यादा गहरा करने वाली एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना बिजनौर के कोतवाली देहात क्षेत्र से सामने आई है, जहां एक गुलदार किसी जंगली इलाके में नहीं, बल्कि इंसानी बस्ती के बीचों-बीच, गली के किसी आवारा कुत्ते की तरह बेखौफ घूमता हुआ दिखाई दिया है। यह पूरी खौफनाक घटना इलाके में लगे एक सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में कैद हो गई है, जिसका वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है।READ ALSO:-बिजनौर में कांग्रेस का बड़ा हल्ला बोल: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के खिलाफ निकाली 'सद्बुद्धि यात्रा', पुलिस ने रोका तो सड़क पर गाए भजन
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इस घटना ने प्रशासन और वन विभाग (Forest Department) की नींद उड़ा दी है, वहीं स्थानीय ग्रामीणों के दिलों में मौत का खौफ पैदा कर दिया है। 'Khabreelal' की टीम ने इस पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर बिजनौर में गुलदार का यह आतंक कब और कैसे थमेगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n@Shakeel57767846 बिजनौर के थाना कोतवाली देहात के बरुकी इलाके में एक गुलदार स्ट्रीट डॉग की तरह घूमता दिखा। CCTV वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों में दहशत। वन विभाग अलर्ट। pic.twitter.com/YUBJHIlnXQ
\r\n— MK Vashisth (@vadhisth) July 7, 2026
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गली में 'कुत्ते' की तरह चहलकदमी, CCTV ने खोला राज
\r\n\r\nप्राप्त जानकारी के अनुसार, यह खौफनाक घटना बिजनौर जिले के थाना कोतवाली देहात के अंतर्गत आने वाले ग्राम 'बरुकी' की है। आम दिनों की तरह गांव के लोग रात को अपने घरों में सो रहे थे। गली में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ था। इसी दौरान रात के अंधेरे में गांव की संकरी गलियों में एक भारी-भरकम साया दाखिल होता है।
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शुरुआत में अगर कोई इस फुटेज को दूर से देखे, तो उसे लगेगा कि शायद कोई बड़ा आवारा कुत्ता गली में घूम रहा है। लेकिन जब सीसीटीवी कैमरे (CCTV Camera) की फुटेज को ध्यान से जूम करके देखा गया, तो लोगों की आंखें फटी की फटी रह गईं। वह कोई कुत्ता नहीं, बल्कि एक पूर्ण वयस्क और खूंखार गुलदार था। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि गुलदार बिना किसी डर या झिझक के रिहायशी मकानों के ठीक सामने से गुजर रहा है। उसकी चाल में कोई घबराहट नहीं है, जो यह दर्शाता है कि यह वन्यजीव अब इंसानी बस्तियों के माहौल का आदी होता जा रहा है। वह कुछ देर तक गली में घूमता है, इधर-उधर सूंघता है (शायद किसी शिकार की तलाश में) और फिर अंधेरे में ओझल हो जाता है।
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सुबह फुटेज देखते ही उड़े ग्रामीणों के होश, मची भारी दहशत
\r\n\r\nरात में तो किसी को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि मौत उनके दरवाजे से होकर गुजरी है। लेकिन अगली सुबह, जब गांव के ही एक व्यक्ति ने सुरक्षा कारणों से अपने घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग चेक की, तो स्क्रीन पर गुलदार को देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
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कुछ ही मिनटों में यह खबर और सीसीटीवी फुटेज पूरे बरुकी गांव और आसपास के इलाकों में जंगल की आग की तरह फैल गई। जिस रास्ते से बच्चे सुबह स्कूल जाते हैं, जिस चौपाल पर बुजुर्ग बैठकर हुक्का पीते हैं, उसी जगह पर गुलदार के पैरों के निशान देखकर गांव वालों में भारी दहशत फैल गई है। महिलाओं ने बच्चों को घर से बाहर निकलने पर सख्त पाबंदी लगा दी है। किसानों का खेतों में जाना दूभर हो गया है। गांव के एक बुजुर्ग ग्रामीण ने खौफजदा होते हुए कहा, "साहब! अब तो ऐसा लगता है कि हम अपने ही घरों में पिंजरे में बंद हो गए हैं और गुलदार बाहर खुले में घूम रहा है। अगर रात में कोई गलती से भी बाहर निकल आता, तो यह जानवर उसे जिंदा नहीं छोड़ता।"
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वन विभाग को दी गई सूचना, पिंजरा लगाने की उठी मांग
\r\n\r\nगुलदार की इस खौफनाक दस्तक के बाद, बरुकी गांव के ग्राम प्रधान और अन्य जिम्मेदार ग्रामीणों ने बिना कोई देरी किए तुरंत स्थानीय पुलिस और वन विभाग (Forest Department) के अधिकारियों को इस घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की एक टीम मौके पर पहुंची।
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टीम ने सीसीटीवी फुटेज को कब्जे में लेकर उसकी जांच की और गांव की गलियों व आसपास के खेतों में गुलदार के पगमार्क (पैरों के निशान) तलाशने का काम शुरू किया। वन विभाग के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि फुटेज में दिखने वाला जानवर गुलदार ही है। ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों का घेराव करते हुए मांग की है कि जल्द से जल्द गांव के चारों तरफ पिंजरे (Cages) लगाए जाएं और ड्रोन (Drones) की मदद से इस गुलदार को ट्रेस करके जंगल में वापस खदेड़ा जाए या रेस्क्यू कर चिड़ियाघर भेजा जाए।
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बिजनौर और गुलदार: गन्ने के खेत बन रहे हैं सुरक्षित पनाहगाह
\r\n\r\nआखिर बिजनौर में ही गुलदार इतने ज्यादा क्यों दिखाई दे रहे हैं? यह एक बड़ा सवाल है। दरअसल, बिजनौर जिला गंगा नदी के तराई क्षेत्र में बसा है और इसके एक बड़े हिस्से की सीमा 'अमानगढ़ टाइगर रिजर्व' (Amangarh Tiger Reserve) और कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटी हुई है। इसके अलावा, बिजनौर उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख गन्ना उत्पादक (Sugarcane Belt) जिला है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि गन्ने के घने और ऊंचे खेत इन गुलदारों के लिए एक 'कृत्रिम जंगल' का काम करते हैं। मादा गुलदार गन्ने के खेतों को अपने शावकों (बच्चों) को जन्म देने और छिपाने के लिए सबसे सुरक्षित जगह मानती हैं। यही कारण है कि ये जानवर जंगलों से निकलकर इंसानी बस्तियों के करीब आ गए हैं। जब इन्हें प्राकृतिक शिकार (हिरण, जंगली सुअर) नहीं मिलता, तो ये गांवों में घुसकर कुत्तों, बकरियों और यहां तक कि छोटे बच्चों को भी अपना शिकार बना लेते हैं। बिजनौर में पिछले कुछ वर्षों में गुलदार के हमले में दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है।
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वन विभाग की अहम अपील: कैसे करें गुलदार से अपना बचाव?
\r\n\r\nबरुकी गांव की इस घटना के बाद वन विभाग ने पूरे जिले के लिए एक विशेष एडवाइजरी (Advisory) और बचाव के उपाय जारी किए हैं। 'Khabreelal' जनहित में इन उपायों को आपसे साझा कर रहा है:
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- \r\n अकेले न निकलें: सुबह जल्दी और शाम ढलने के बाद खेतों या सुनसान रास्तों पर बिल्कुल अकेले न जाएं। हमेशा 4-5 लोगों के समूह (Group) में ही निकलें।\r\n \r\n
- \r\n शोर मचाते हुए चलें: गुलदार स्वभाव से शर्मीला जानवर होता है और इंसानों के शोर से दूर भागता है। इसलिए खेतों में जाते समय जोर-जोर से बातें करें, हाथों में डंडा रखें और उसे जमीन पर ठोकते हुए चलें।\r\n \r\n
- \r\n मोबाइल पर गाना बजाएं: रात के समय अगर बाहर निकलना जरूरी हो, तो अपने मोबाइल फोन में तेज आवाज में कोई गाना या शोर बजाकर चलें और हाथों में टॉर्च जरूर रखें।\r\n \r\n
- \r\n बच्चों का विशेष ध्यान रखें: छोटे बच्चों को किसी भी कीमत पर अकेला न छोड़ें, खासकर शाम के समय। गुलदार अक्सर छोटे और कमजोर शिकार को ही अपना निशाना बनाता है।\r\n \r\n
- \r\n घर के बाहर रोशनी रखें: अपने घरों और पशुशालाओं (जहां गाय-भैंस बंधती हैं) के बाहर पर्याप्त लाइट जलाकर रखें।\r\n \r\n
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फिलहाल, बरुकी गांव में वन विभाग की टीम लगातार गश्त कर रही है। यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस आदमखोर होते जा रहे गुलदार को पकड़ने में कब तक कामयाबी हासिल करता है। तब तक के लिए, 'Khabreelal' की अपने सभी पाठकों से अपील है कि सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और किसी भी जंगली जानवर के दिखने पर तुरंत डायल 112 या वन विभाग के टोल-फ्री नंबर पर कॉल करें।
Sabse pehle comment karne wale banein.