रिपोर्टर: शकील अहमद, बिजनौर
\r\n\r\nबिजनौर: उत्तर प्रदेश का बिजनौर जिला इस समय एक ऐसी त्रासदी से जूझ रहा है जिसका खौफ अब लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। जिले में गुलदार (तेंदुए) की बढ़ती आबादी और मानव-वन्यजीव संघर्ष ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। ताजा मामला बिजनौर के रहटा बिल्लौच गांव का है, जहाँ सोमवार सुबह खेत पर काम करने गए एक किसान पर घात लगाकर बैठे गुलदार ने जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
\r\n\r\nक्या है पूरी घटना?
\r\n\r\nसोमवार की सुबह करीब 7 बजे का समय था। रहटा बिल्लौच गांव निवासी जाहिद कुरैशी, जो पेशे से किसान हैं, अपने नित्य कर्म से निवृत्त होकर अपने खेत पर पहुंचे थे। वे फसलों की देखरेख में जुटे थे, तभी पास की झाड़ियों (जिन्हें स्थानीय भाषा में 'बरेह' कहा जाता है) में दुबके बैठे एक आदमखोर तेंदुए ने उन पर अचानक हमला बोल दिया।
\r\n\r\nहमला इतना तीव्र और अचानक था कि जाहिद को संभलने का मौका तक नहीं मिला। गुलदार ने सीधे उनके सिर और गर्दन को निशाना बनाया। जाहिद ने अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष किया और जोर-जोर से शोर मचाया। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे अन्य ग्रामीण लाठी-डंडों के साथ दौड़ पड़े। भीड़ को अपनी ओर आते देख गुलदार ने जाहिद को गंभीर रूप से घायल अवस्था में छोड़ दिया और जंगल की घनी झाड़ियों में ओझल हो गया।
\r\n\r\nगंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती
\r\n\r\nहमले की सूचना मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया। परिजन और ग्रामीण घायल जाहिद को आनन-फानन में नजदीकी निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टर के अनुसार, गुलदार के पंजों और दांतों के गहरे घाव उनके सिर, गर्दन और पीठ पर हैं। काफी मात्रा में रक्तस्राव होने के कारण उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि ग्रामीणों ने समय रहते शोर नहीं मचाया होता, तो यह हमला जानलेवा साबित हो सकता था।
\r\n\r\nग्रामीणों में भारी आक्रोश, वन विभाग की लापरवाही उजागर
\r\n\r\nइस घटना के बाद से रहटा बिल्लौच और उसके आसपास के गांवों में डर का माहौल व्याप्त है। लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने और खुद खेतों पर जाने से कतरा रहे हैं। आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग पर आरोप लगाया है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद विभाग इस क्षेत्र में गुलदार की गतिविधियों पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल रहा है।
\r\n\r\nग्रामीणों का कहना है कि "यह कोई पहली घटना नहीं है। बिजनौर में आए दिन गुलदार किसी न किसी को अपना शिकार बना रहे हैं, लेकिन वन विभाग केवल आश्वासन देता है। अगर समय रहते पिंजरा लगाया गया होता, तो आज जाहिद सुरक्षित होते।" ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आदमखोर गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा नहीं लगाया गया और गश्त नहीं बढ़ाई गई, तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
\r\n\r\nमानव-वन्यजीव संघर्ष का बढ़ता संकट
\r\n\r\nबिजनौर के भौगोलिक ढांचे में गन्ने के खेत और घनी झाड़ियां गुलदारों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन गए हैं। जनपद में हर साल दर्जनों लोग गुलदार के हमलों का शिकार होते हैं। पर्यावरणविदों का मानना है कि जंगलों के सिमटने और शहरीकरण के कारण गुलदार रिहायशी इलाकों और खेतों की ओर रुख कर रहे हैं।
\r\n\r\nवन विभाग की भूमिका और जिम्मेदारी
\r\n\r\nवन विभाग ने इस घटना के बाद क्षेत्र में गश्त बढ़ाने का दावा किया है। वन रेंज अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल पर पिंजरा लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और लोगों को सचेत रहने की सलाह दी गई है। हालांकि, ग्रामीणों का मानना है कि केवल गश्त काफी नहीं है। उन्हें खेतों के रास्तों पर प्रकाश की व्यवस्था और आदमखोर हो चुके जानवरों के स्थायी विस्थापन की आवश्यकता है।
\r\n\r\nसुरक्षा के लिए क्या करें?
\r\n\r\nइस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने किसानों को कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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- अकेले न जाएं: खेतों में काम करते समय अकेले न जाएं, हमेशा समूह में रहें। \r\n
- शोर मचाते रहें: काम के दौरान आपस में बात करते रहें या रेडियो/मोबाइल पर संगीत बजाएं, जिससे गुलदार को आपकी मौजूदगी का पता चल सके। \r\n
- रोशनी: अंधेरे के समय (सुबह और शाम) खेतों पर जाने से बचें। \r\n
- सतर्कता: खेतों के किनारे झाड़ियों को साफ रखें ताकि गुलदार को छिपने की जगह न मिले। \r\n
बिजनौर के रहटा बिल्लौच में हुई यह घटना प्रशासन और वन विभाग के लिए एक और चेतावनी है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस खूंखार तेंदुए को पिंजरे में कैद कर ग्रामीणों को डर के साये से मुक्त करा पाता है।
\r\n\r\nक्या आप भी अपने क्षेत्र में बढ़ रहे गुलदार के हमलों से चिंतित हैं? नीचे कमेंट में अपनी राय साझा करें और सुरक्षित रहने के लिए प्रशासन से क्या मांग करना चाहेंगे, बताएं।
\r\n\r\nडिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी और क्षेत्र में व्याप्त स्थिति पर आधारित है। पाठकों से अनुरोध है कि जंगल या खेतों के आसपास के क्षेत्रों में सावधानी बरतें।
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