उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के किरतपुर और नगीना क्षेत्र के पास एक बेहद दर्दनाक और हृदयविदारक बिजनौर नदी हादसा सामने आया है। यहां नदी में नहाने गए दो किशोर अचानक गहरे पानी में चले गए और तेज बहाव की चपेट में आकर डूब गए। इस दुखद घटना ने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी है। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। शनिवार सुबह तक चले सघन तलाशी अभियान के बाद, गोताखोरों की टीम ने एक किशोर का शव घटनास्थल से करीब 300 मीटर की दूरी से बरामद कर लिया है, जबकि दूसरे किशोर की तलाश के लिए पीएसी (PAC) और स्थानीय गोताखोरों का अभियान अभी भी युद्ध स्तर पर जारी है।READ ALSO:-मुरादाबाद में खौफनाक कदम: बुलेट खड़ी की, हाथ पकड़ा और रामगंगा नदी में कूद गए प्रेमी-प्रेमिका; ताऊ को भेजा मौत का मैसेज
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प्रशासनिक अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर डटे हुए हैं। यह बिजनौर नदी हादसा स्थानीय प्रशासन और आम जनता के लिए मानसून के दौरान नदियों के बढ़ते जलस्तर और उससे जुड़े खतरों को लेकर एक गंभीर चेतावनी भी है।
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रेस्क्यू ऑपरेशन: रात भर की बेचैनी और सुबह की सघन तलाश
\r\n\r\nघटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने समय बर्बाद किए बिना तत्काल स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों की मदद से नदी में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कराया। गोताखोरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर उफनती नदी में किशोरों की तलाश की। हालांकि, नदी के तेज बहाव और गहराई के कारण शुक्रवार देर शाम तक दोनों किशोरों का कोई सुराग नहीं मिल पाया था। जैसे-जैसे रात गहरी हो रही थी, परिजनों की उम्मीदें और चिंताएं बढ़ती जा रही थीं।
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शनिवार की सुबह होते ही प्रशासन ने अपनी रणनीति बदली और अभियान को और तेज कर दिया। एक बार फिर करीब 50 अनुभवी स्थानीय गोताखोरों की एक बड़ी टीम और पीएसी (Provincial Armed Constabulary) की फ्लड यूनिट ने संयुक्त रूप से नदी के चप्पे-चप्पे को खंगालना शुरू किया। गोताखोरों ने नदी के बहाव की दिशा में जाल डालकर और मोटर बोट्स का इस्तेमाल करके अपनी तलाश का दायरा बढ़ाया।
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300 मीटर की दूरी पर मिला एक किशोर का शव
\r\n\r\nइस महा-अभियान के दौरान, शनिवार को गोताखोरों की टीम को आंशिक सफलता मिली। घटना स्थल से बहाव की दिशा में लगभग 300 मीटर आगे एक किशोर का शव पानी में उतराता हुआ बरामद कर लिया गया। शव मिलते ही मौके पर मौजूद परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने तुरंत शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरवाया और उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है।
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हालांकि, इस भयानक बिजनौर नदी हादसा में लापता हुए दूसरे किशोर की तलाश अभी भी जारी है। पीएसी और पुलिस के जवान नदी के और आगे के हिस्सों में कॉम्बिंग कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब तक दूसरे किशोर का पता नहीं चल जाता, यह रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा।
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मौके पर पहुंचे जनप्रतिनिधि: विधायक और चेयरमैन ने बंधाया ढांढस
\r\n\r\nइस बिजनौर नदी हादसा की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ राजनीतिक हस्तियां भी मौके पर पहुंच गई हैं। घटना की सूचना मिलने पर नगीना से विधायक मनोज पारस और किरतपुर नगर पालिका अध्यक्ष अब्दुल मन्नान सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल पर मौजूद हैं।
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विधायक मनोज पारस ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उन्हें इस दुख की घड़ी में हर संभव सरकारी मदद दिलाने का आश्वासन दिया। उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे अधिकारियों को निर्देश दिए कि संसाधनों की कोई कमी नहीं होनी चाहिए और दूसरे किशोर को जल्द से जल्द ढूंढने के लिए हर तकनीकी उपाय का इस्तेमाल किया जाए। किरतपुर अध्यक्ष अब्दुल मन्नान ने भी स्थानीय गोताखोरों की हौसला अफजाई की और भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस प्रशासन का सहयोग किया।
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थाना अध्यक्ष का बयान और आगे की कार्रवाई
\r\n\r\nकानून व्यवस्था और रेस्क्यू अभियान की कमान संभाल रहे स्थानीय थाना अध्यक्ष पुष्पेंद्र कुमार लगातार अपनी टीम के साथ नदी किनारे कैंप किए हुए हैं। थाना अध्यक्ष पुष्पेंद्र कुमार का स्पष्ट कहना है कि, "पुलिस की तत्परता से एक किशोर का शव बरामद कर लिया गया है। दूसरे की तलाश के लिए पीएसी और 50 से अधिक गोताखोरों का अभियान लगातार जारी है। हम नदी के बहाव और संभावित क्षेत्रों की मैपिंग करके तलाश कर रहे हैं।"
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मानसूनी नदियां और सुरक्षा की अनदेखी: एक बड़ा सवाल
\r\n\r\nयह बिजनौर नदी हादसा कोई इकलौती घटना नहीं है। हर साल मानसून और बरसात के मौसम में उत्तर प्रदेश की नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है। ऐसे में युवा और बच्चे अक्सर नहाने या रील (Reel) बनाने के चक्कर में नदी के किनारों पर जाते हैं और हादसों का शिकार हो जाते हैं। बिजनौर क्षेत्र गंगा, रामगंगा और मालन जैसी नदियों से घिरा हुआ है, जहां अक्सर तेज बहाव और भंवर बनते हैं।
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प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे संवेदनशील घाटों और नदी किनारों पर चेतावनी वाले साइनबोर्ड (Warning Boards) लगाए। इसके अलावा, जिन स्थानों पर गहराई अधिक है, वहां बैरिकेडिंग की जानी चाहिए ताकि बच्चे आसानी से पानी तक न पहुंच सकें। स्कूलों और ग्रामीण स्तर पर भी बच्चों को नदी के खतरों के बारे में जागरूक करने की सख्त जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह के बिजनौर नदी हादसा की पुनरावृत्ति न हो।
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नगीना और किरतपुर के बीच हुआ यह बिजनौर नदी हादसा समाज और प्रशासन दोनों के लिए एक दर्दनाक सबक है। एक परिवार ने अपना चिराग खो दिया है, जबकि दूसरा परिवार अभी भी नदी किनारे आस लगाए बैठा है कि उनके बच्चे का कुछ सुराग मिल सके। थाना अध्यक्ष पुष्पेंद्र कुमार के नेतृत्व में 50 गोताखोरों और पीएसी की टीम का समर्पण यह सुनिश्चित कर रहा है कि कोई कसर न छूटे। ऐसे हादसों को रोकने के लिए सिर्फ प्रशासन की सख्ती ही काफी नहीं है, बल्कि अभिभावकों को भी अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखनी होगी। उम्मीद है कि दूसरे किशोर का जल्द ही पता चल जाएगा और पीड़ित परिवारों को प्रशासन द्वारा उचित मुआवजा और सहायता प्रदान की जाएगी।
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बिजनौर जिले के किरतपुर-नगीना मार्ग स्थित नदी में नहाते समय दो किशोर गहरे पानी में डूब गए। पुलिस, पीएसी और 50 गोताखोरों के सघन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शनिवार सुबह घटनास्थल से 300 मीटर दूर एक किशोर का शव बरामद कर लिया गया है, जबकि दूसरे की तलाश जारी है। मौके पर नगीना विधायक मनोज पारस, किरतपुर अध्यक्ष अब्दुल मन्नान और थाना अध्यक्ष पुष्पेंद्र कुमार सहित भारी भीड़ मौजूद है। प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है।
Sabse pehle comment karne wale banein.