उत्तर प्रदेश के बिजनौर में अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन ने एक बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद खनन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने शिवाला कला थाना क्षेत्र में अचानक छापेमारी की। इस दौरान टीम ने मौके से मिट्टी से भरे दो लोडर ट्रैक्टर जब्त किए हैं। हालांकि, अधिकारियों को आता देख माफिया जंगल की ओर भागने में सफल रहे। पुलिस और प्रशासन इस पूरे मामले की गहनता से जांच में जुट गए हैं।READ ALSO:-बिजनौर में सनसनीखेज वारदात: पारिवारिक विवाद में जीजा ने की साले की हत्या, आरोपी गिरफ्तार
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फर्जी रिपोर्ट के आधार पर चल रहा था काला कारोबार
\r\n\r\nइस पूरे मामले की जांच में एक बड़ा और हैरान करने वाला खुलासा सामने आया है। जानकारी के अनुसार, बिजनौर में अवैध खनन का यह खेल पूरी तरह से एक सुनियोजित फर्जीवाड़े पर आधारित था। खनन माफियाओं ने प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक गहरी साजिश रची थी।
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बताया जा रहा है कि इन माफियाओं ने एक क्षेत्रीय लेखपाल की फर्जी रिपोर्ट तैयार करवाई थी। इसी फर्जी रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने खनन विभाग से मिट्टी उठाने की आधिकारिक परमिशन हासिल कर ली थी। इस कागजी परमिशन की आड़ में बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से मिट्टी का खनन किया जा रहा था।
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शिकायत के बाद खनन अधिकारी ने लिया संज्ञान
\r\n\r\nशिवाला कला थाना क्षेत्र के रतनगढ़ इलाके में रात-दिन ट्रैक्टर और लोडर दौड़ रहे थे। इससे स्थानीय ग्रामीण काफी परेशान थे और लगातार प्रशासन से इसकी मौखिक व लिखित शिकायत कर रहे थे। जब यह मामला तूल पकड़ने लगा, तो जिला खनन अधिकारी ने इसका कड़ा संज्ञान लिया।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n@Shakeel57767846 यूपी के बिजनौर में अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। शिवाला कला के रतनगढ़ में छापेमारी कर 2 ट्रैक्टर जब्त किए गए, जबकि माफिया फरार हो गए। pic.twitter.com/JnjrauV6GL
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शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला खनन अधिकारी ने तुरंत एक विशेष संयुक्त टीम का गठन किया। इस टीम को गुप्त तरीके से रतनगढ़ के जंगल में भेजा गया, ताकि बिजनौर में अवैध खनन कर रहे लोगों को रंगे हाथों पकड़ा जा सके और उनके नेटवर्क का भंडाफोड़ हो सके।
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रतनगढ़ के जंगल में छापेमारी और ट्रैक्टर जब्त
\r\n\r\nजैसे ही खनन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम रतनगढ़ के जंगल में पहुंची, वहां खनन स्थल पर हड़कंप मच गया। टीम ने देखा कि वहां बड़े पैमाने पर अवैध रूप से मिट्टी खोदी जा रही थी और उसे ट्रैक्टरों में भरा जा रहा था। टीम ने तुरंत मौके पर घेराबंदी शुरू कर दी।
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इस त्वरित कार्रवाई के दौरान संयुक्त टीम ने मौके से 2 लोडर ट्रैक्टरों को पकड़ लिया। ये दोनों ट्रैक्टर पूरी तरह से अवैध खनन सामग्री से भरे हुए थे। प्रशासन ने बिना कोई देरी किए दोनों वाहनों को सीज कर दिया है और उन्हें थाने भिजवा दिया है।
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अधिकारियों को देखते ही भागे खनन माफिया
\r\n\r\nहालांकि प्रशासन की यह छापेमारी काफी गुप्त थी, लेकिन जंगल के रास्ते खुले होने का फायदा खनन माफियाओं को मिल गया। जैसे ही उन्होंने दूर से पुलिस और खनन विभाग के अधिकारियों की गाड़ियों को आते देखा, वे अपने वाहन छोड़कर वहां से भाग खड़े हुए।
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बिजनौर में अवैध खनन करने वाले ये लोग घने जंगल और झाड़ियों का फायदा उठाकर वहां से फरार होने में कामयाब रहे। पुलिस और संयुक्त टीम ने उनका पीछा करने की बहुत कोशिश की, लेकिन कच्चे और उबड़-खाबड़ रास्तों के कारण वे हाथ नहीं आ सके।
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फरार आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस
\r\n\r\nअब शिवाला कला थाना पुलिस ने इस मामले में अज्ञात माफियाओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर ली है। जब्त किए गए ट्रैक्टरों के चेसिस और इंजन नंबर के आधार पर उनके असली मालिकों की पहचान की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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फर्जी रिपोर्ट देने वाले पर भी गिरेगी गाज
\r\n\r\nइस मामले का सबसे गंभीर पहलू लेखपाल की फर्जी रिपोर्ट है। प्रशासन अब इस बात की भी गहराई से जांच कर रहा है कि वह रिपोर्ट आखिर किसने बनाई थी। क्या इसमें राजस्व विभाग के किसी कर्मचारी की मिलीभगत है, या यह पूरी तरह से जाली थी?
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अधिकारियों का स्पष्ट और सख्त कहना है कि बिजनौर में अवैध खनन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो भी व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहा है, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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अवैध खनन पर प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश सरकार ने अवैध खनन को लेकर पूरे राज्य में जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रखी है। इसी कड़ी में बिजनौर प्रशासन भी लगातार कड़े कदम उठा रहा है। इसके बावजूद कुछ लोग प्रशासन को चकमा देने से बाज नहीं आ रहे हैं।
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बिजनौर जिला गंगा नदी के किनारे बसा है, इसलिए यहां खनन माफिया हमेशा सक्रिय रहने की फिराक में रहते हैं। लेकिन बिजनौर में अवैध खनन की इस हालिया घटना ने साबित कर दिया है कि पुलिस और प्रशासन की नजरों से बचना अब इतना आसान नहीं है।
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निष्कर्ष के तौर पर, बिजनौर में अवैध खनन के खिलाफ हुई यह कार्रवाई प्रशासन की सक्रियता और मुस्तैदी को दर्शाती है। फर्जी दस्तावेजों के जरिए चल रहे इस खेल के उजागर होने से इलाके के अन्य माफियाओं में भी हड़कंप है। अब देखना यह होगा कि फरार माफिया और फर्जी रिपोर्ट बनाने वाले मास्टरमाइंड कब तक पुलिस की गिरफ्त में आते हैं। प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी हुई है।
Sabse pehle comment karne wale banein.