बिजनौर। गंगा नदी में जलस्तर घटने के बाद बिजनौर के रावली तटबंध पर पिछले तीन हफ्तों से चला आ रहा संकट अब टल गया है। सिंचाई विभाग और स्थानीय लोगों की 22 दिन की अथक मेहनत ने इस महत्वपूर्ण तटबंध को सुरक्षित कर लिया है, जिससे दो दर्जन से अधिक गांवों और हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसल को भीषण बाढ़ की चपेट में आने से बचा लिया गया है।READ ALSO:-पति के हत्या की आरोपी मुस्कान ने रिहाई के लिए शुरू किया नवरात्रि व्रत और सुंदरकांड पाठ; 8 महीने की गर्भवती मुस्कान का जेल में बदला व्यवहार
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संकट की शुरुआत और नुकसान
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7 सितंबर को गंगा नदी के तेज बहाव ने रावली तटबंध के लिए खतरा पैदा कर दिया।
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    कटान शुरू: 1984 में बने 9 किलोमीटर लंबे अप्लेक्स बांध (जो गंगा बैराज पुल के साथ गंगा बैराज से रावली तक बना है) के किलोमीटर 6 के पास गंगा ने भीषण कटान शुरू कर दिया।
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    बड़ा नुकसान: सिर्फ एक दिन में ही नदी ने तटबंध का एक बड़ा हिस्सा और उसके साथ बनी पक्की सड़क को अपनी चपेट में ले लिया।
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22 दिन का सफल संघर्ष
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तटबंध को बचाने के लिए युद्ध स्तर पर काम शुरू किया गया। यह कार्य तीन सप्ताह तक बिना रुके चला:
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    संसाधनों का उपयोग: सिंचाई विभाग ने तुरंत हेवी मशीनरी और सैकड़ों मजदूरों को काम पर लगाया।
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    जनता का सहयोग: आस-पास के चार गांवों के लोग भी अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर मदद के लिए आगे आए। उन्होंने पेड़, बल्ली और नायलॉन के बोरों में मिट्टी भरकर गंगा के किनारे डाला।
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    शीर्ष अधिकारियों की निगरानी: जब कटान नहीं रुका, तो नेशनल हाईवे की टीम और सिंचाई विभाग के राज्य स्तरीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और हेवी मशीनरी से काम को गति दी गई।
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    जल शक्ति मंत्री का दौरा: उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भी तटबंध का निरीक्षण किया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, जिससे काम में तेजी आई।
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वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजना
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सिंचाई विभाग के अधिशासी अधिकारी बृजेश मौर्य ने पुष्टि की है कि 22 दिन की लगातार मेहनत के बाद तटबंध अब सुरक्षित है।
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    क्षति और नियंत्रण: गंगा के कटान से लगभग 800 मीटर तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।
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    जल प्रवाह: वर्तमान में गंगा में करीब 50,000 क्यूसेक पानी का प्रवाह है।
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    आगे की योजना: विभाग तटबंध को मजबूत करने के साथ-साथ आगे की कार्य योजना भी तैयार कर रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह के संकट से बचा जा सके।
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सिंचाई विभाग के अधिशासी अधिकारी बृजेश मौर्य ने पुष्टि की है कि 22 दिन की अथक मेहनत के बाद तटबंध अब सुरक्षित है। कटान से लगभग 800 मीटर तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ था, जिसे अब नियंत्रण में कर लिया गया है। वर्तमान में गंगा में करीब 50,000 क्यूसेक पानी का प्रवाह है। विभाग तटबंध को मजबूत करने के साथ-साथ आगे की कार्य योजना भी बना रहा है।
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