उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में किसानों ने अपने हकों और समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने जिला कलेक्ट्रेट पर एक विशाल प्रदर्शन किया। Bijnor Kisan Pradarshan (बिजनौर किसान प्रदर्शन) के दौरान किसानों ने प्रशासन को अपनी विभिन्न और गंभीर मांगों को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। दोपहर करीब 12 बजे सैकड़ों की संख्या में किसान कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे और वहीं धरने पर बैठ गए। यह Bijnor Kisan Pradarshan केवल कृषि समस्याओं तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें आम आदमी से जुड़े शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया।READ ALSO:-India-UK FTA लागू: भारत में सस्ती हुईं यूके की लग्जरी कारें, कपड़े और स्कॉच व्हिस्की, जानें इस ऐतिहासिक डील से किसे होगा फायदा
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश हमेशा से किसान आंदोलनों का गढ़ रहा है, और यह Bijnor Kisan Pradarshan उसी कड़ी का एक नया हिस्सा है। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक वे चुप नहीं बैठेंगे।
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शिक्षा क्षेत्र में माफियाओं की लूट का विरोध

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इस Bijnor Kisan Pradarshan की सबसे खास बात यह रही कि किसानों ने केवल अपनी खेती-किसानी की बात नहीं की, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में हो रही लूटपाट पर भी कड़ा प्रहार किया। किसानों ने आरोप लगाया कि प्राइवेट स्कूल मालिक और पुस्तक प्रकाशक (Publishers) आपस में मिलकर अभिभावकों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं।
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किसानों ने प्रशासन से सख्त मांग की है कि किसी भी स्कूल के पाठ्यक्रम (Syllabus) में 5 वर्ष से पहले कोई बदलाव न किया जाए। अक्सर देखा जाता है कि स्कूल हर साल किताबें बदल देते हैं, जिससे पुरानी किताबें छोटे भाई-बहनों के काम नहीं आतीं और अभिभावकों को हर साल हजारों रुपये की नई किताबें खरीदनी पड़ती हैं। इसके साथ ही, किसानों ने महंगी किताबों की मनमानी बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की बात भी कही।
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स्वास्थ्य सेवाओं में कमीशनखोरी पर चिंता

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स्वास्थ्य क्षेत्र में व्याप्त अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का मुद्दा भी इस Bijnor Kisan Pradarshan में जोर-शोर से गूंजा। किसानों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में एक गरीब या मध्यम वर्गीय परिवार के लिए बीमार पड़ना किसी आर्थिक आपदा से कम नहीं है।
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किसानों ने आरोप लगाया कि फार्मेसी कंपनियां, बड़े डॉक्टर और पैथोलॉजी लैब मिलकर एक बड़ा नेक्सस (गठजोड़) चला रहे हैं। मरीजों को गैर-जरूरी और महंगी जांचें लिखी जाती हैं, जिनमें डॉक्टरों का भारी कमीशन तय होता है। इसके कारण मरीजों को न तो सही इलाज मिल पा रहा है और न ही वे आर्थिक रूप से बच पा रहे हैं। इसके अलावा, धरने में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'आयुष्मान कार्ड' (Ayushman Card) के दुरुपयोग का भी गंभीर मुद्दा उठाया गया। किसानों का कहना है कि कई निजी अस्पताल आयुष्मान कार्ड धारकों को भर्ती करने से कतराते हैं या फिर फर्जी बिल बनाकर सरकार को चूना लगा रहे हैं। 
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भूमि अधिग्रहण: मुआवजे में भारी विसंगति

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जिले में विकास के नाम पर हो रहे भूमि अधिग्रहण को लेकर भी किसानों में भारी आक्रोश है। Bijnor Kisan Pradarshan के दौरान जिले में बन रहे दो नए नेशनल हाईवे और एक औद्योगिक गलियारे के लिए किसानों की जमीन के अधिग्रहण का मुद्दा सबसे ज्यादा छाया रहा।
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किसानों ने प्रशासन को बताया कि इन परियोजनाओं के लिए उनकी हजारों बीघा उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है, लेकिन सरकार द्वारा दिया जा रहा मुआवजा ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। किसानों का कहना है कि प्रशासन जिस 'सर्किल रेट' (लगभग 4 से 5 लाख रुपये प्रति बीघा) पर उन्हें मुआवजा दे रहा है, वह वर्तमान बाजार मूल्य (Market Value) से कई गुना कम है। बाजार में इस जमीन की कीमत 70 लाख रुपये से लेकर 1.5 करोड़ रुपये प्रति बीघा तक है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जमीन का सर्किल रेट बढ़ाकर उचित मुआवजा नहीं दिया गया, तो यह Bijnor Kisan Pradarshan आने वाले दिनों में और भी उग्र रूप धारण कर लेगा।
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बिजली विभाग की मनमानी से किसान परेशान

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कृषि और घरेलू कार्यों के लिए बिजली की आवश्यकता को देखते हुए, किसानों ने बिजली विभाग की तानाशाही पर भी अपना गुस्सा जाहिर किया। इस Bijnor Kisan Pradarshan में शामिल किसानों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के अधिकारी बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के मनमाने तरीके से उपभोक्ताओं का बिजली लोड (Electricity Load) बढ़ा रहे हैं।
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लोड बढ़ने से किसानों और आम उपभोक्ताओं को हर महीने भारी-भरकम बिजली बिल थमाए जा रहे हैं। बिलों में भी भारी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। जब उपभोक्ता अपनी शिकायत लेकर बिजली दफ्तर जाते हैं, तो उनकी सुनवाई नहीं होती। किसानों ने मांग की है कि बिजली विभाग अपनी कार्यप्रणाली सुधारे और किसानों का उत्पीड़न तुरंत बंद करे। 
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बिलाई शुगर मिल का बकाया और मिलावटखोरी का मुद्दा

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पश्चिमी यूपी के किसानों की आजीविका मुख्य रूप से गन्ने पर निर्भर है। ऐसे में Bijnor Kisan Pradarshan में गन्ना भुगतान का मुद्दा उठना लाजमी था। किसानों ने बिलाई शुगर मिल (Bilai Sugar Mill) के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने बताया कि मिल प्रबंधन द्वारा पिछले पेराई सत्र का गन्ना भुगतान अब तक नहीं किया गया है।
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भुगतान न होने के कारण किसान भारी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। बच्चों की फीस भरनी हो, कर्ज की किस्त चुकानी हो या घर के अन्य खर्च हों, गन्ना पर्ची का पैसा रुके होने से किसानों की कमर टूट गई है। किसानों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि वह मिल प्रबंधन पर दबाव बनाकर जल्द से जल्द बकाया भुगतान सुनिश्चित कराए। 
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इसके अतिरिक्त, Bijnor Kisan Pradarshan में किसानों ने बाजार में बिक रहे दूध और उससे बने उत्पादों (जैसे पनीर, मावा, घी) में हो रही भारी मिलावटखोरी पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की। किसानों का कहना है कि नकली और केमिकल युक्त दूध न केवल आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि इससे असली पशुपालक किसानों के दूध का सही दाम भी नहीं मिल पाता है।
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बुधवार को हुआ यह Bijnor Kisan Pradarshan केवल एक धरना नहीं था, बल्कि यह आम जनता और किसानों के मन में पनप रहे असंतोष की एक स्पष्ट तस्वीर थी। शिक्षा माफियाओं की लूट से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं में कमीशनखोरी, भूमि अधिग्रहण में असमानता, बिजली विभाग की मनमानी और गन्ने के बकाए तक—किसानों ने हर उस मुद्दे को छुआ है जो एक आम आदमी की जिंदगी को प्रभावित करता है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्रता से कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो वे अपने इस आंदोलन को अनिश्चितकालीन धरने में बदलने को मजबूर होंगे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन इन गंभीर शिकायतों का क्या और कितनी जल्दी समाधान निकालता है।
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