खबरीलाल विशेष रिपोर्ट | बिजनौर: उत्तर प्रदेश सरकार की मंशानुरूप आम जनता को न्याय दिलाने और उनकी दैनिक समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रदेश भर में 'सम्पूर्ण समाधान दिवस' (Sampoorna Samadhan Divas) का आयोजन किया जाता है। इसी कड़ी में बिजनौर जिले (Bijnor District) की सदर तहसील में शनिवार को सम्पूर्ण समाधान दिवस का वृहद स्तर पर आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर जिले के दो सबसे बड़े अधिकारी— जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP)— खुद तहसील परिसर में मौजूद रहे और उन्होंने आम जनमानस की फरियाद को बेहद गंभीरता और इत्मीनान के साथ सुना।READ ALSO:-दिल्ली में गूंजी मेरठ की आवाज: अंबेडकर जयंती पर बोले SKD अध्यक्ष रविकांत- 'अंबेडकरी साहित्य केवल शब्द नहीं, बल्कि शोषितों के आंदोलन की हुंकार है'
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अधिकारियों के इस सीधे संवाद (Direct Communication) ने तहसील में दूर-दराज के गांवों से न्याय की आस लेकर आए फरियादियों के चेहरों पर एक नई उम्मीद जगाई। खबरीलाल (Khabreelal) की इस विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि सदर तहसील में हुए इस समाधान दिवस में मुख्य रूप से किस तरह की शिकायतें आईं, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने मातहत अधिकारियों को क्या सख्त निर्देश दिए, और कैसे प्रशासन जनसमस्याओं के निपटारे के लिए एक नई रूपरेखा तैयार कर रहा है।
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1. तहसील सदर में लगा जनता दरबार: न्याय की आस में पहुंचे सैकड़ों फरियादी
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बिजनौर जिले की सदर तहसील (Tehsil Sadar) हमेशा से ही जिले का एक प्रमुख प्रशासनिक केंद्र रही है। शनिवार सुबह से ही यहां सम्पूर्ण समाधान दिवस के आयोजन को लेकर गहमागहमी शुरू हो गई थी। जैसे ही जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक तहसील परिसर स्थित सभागार में पहुंचे, फरियादियों की कतारें लग गईं।
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प्रशासनिक अमले ने भी पूरी मुस्तैदी दिखाते हुए लोगों को टोकन सिस्टम और कतारबद्ध तरीके से अधिकारियों के समक्ष पेश किया। हर आम आदमी, किसान, महिला और बुजुर्ग को अपनी बात सीधे जिले के सर्वोच्च अधिकारियों के सामने रखने का पूरा मौका दिया गया। इस दौरान राजस्व, पुलिस, विकास, बिजली, पानी, और पंचायती राज सहित लगभग सभी महत्वपूर्ण विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी अपनी-अपनी फाइलों और रिकॉर्ड्स के साथ वहां मौजूद रहे।
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2. डीएम का सख्त निर्देश: "शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण हो"

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जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी (District Magistrate) का पूरा फोकस शिकायतों के निस्तारण की 'गुणवत्ता' (Quality of Resolution) पर रहा। उन्होंने प्राप्त प्रार्थना पत्रों का बारीकी से अवलोकन किया और संबंधित विभागीय अधिकारियों को तलब कर तुरंत निर्देश दिए।
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जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "सम्पूर्ण समाधान दिवस महज एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि जो भी जनशिकायतें उन्हें प्राप्त हो रही हैं, उनका निस्तारण केवल कागजों पर न हो। शिकायतों का 'समयबद्ध' (Time-bound) और 'गुणवत्तापूर्ण' (Qualitative) निस्तारण हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।"
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उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी ने दफ्तर में बैठकर ही फर्जी रिपोर्ट लगा दी या शिकायतकर्ता को गुमराह करने की कोशिश की, तो उसके खिलाफ दंडात्मक और विभागीय कार्रवाई (Disciplinary Action) अमल में लाई जाएगी। समाधान ऐसा होना चाहिए जिससे शिकायतकर्ता पूरी तरह से संतुष्ट हो।
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3. राजस्व और भूमि विवाद के मामलों का रहा दबदबा

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western UP) और विशेष रूप से बिजनौर जैसे कृषि प्रधान जिले में भूमि और राजस्व से जुड़े विवाद हमेशा से प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रहे हैं। सदर तहसील के समाधान दिवस में भी सबसे ज्यादा शिकायतें जमीन की पैमाइश, चकरोड पर अवैध कब्जों, ग्राम समाज की भूमि पर अतिक्रमण, वरासत दर्ज कराने और मेड़बंदी से जुड़ी हुई सामने आईं।
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इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों (SDM), तहसीलदारों, राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों (Lekhpals) को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग से जुड़े मामलों में लेखपाल और कानूनगो मौके पर जाएं, दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाएं और निष्पक्ष रूप से सरकारी रिकॉर्ड (खसरा-खतौनी) के आधार पर पैमाइश कर विवाद का स्थायी हल निकालें। अवैध कब्जेदार चाहे कितने भी रसूखदार क्यों न हों, उनके खिलाफ एंटी-भूमाफिया टास्क फोर्स (Anti-Bhu Mafia Task Force) के तहत एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।
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4. पुलिस अधीक्षक (SP) का कड़ा रुख: "अपराधियों पर कसें नकेल, पीड़ितों को मिले तुरंत न्याय"

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समाधान दिवस में पुलिस और कानून-व्यवस्था (Law and Order) से जुड़ी कई गंभीर शिकायतें भी सामने आईं। इनमें मुख्य रूप से आपसी मारपीट, घरेलू हिंसा, दबंगों द्वारा डराने-धमकाने, और थानों में सुनवाई न होने जैसे मामले शामिल थे।
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पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) ने इन मामलों पर बेहद सख्त रुख अख्तियार किया। उन्होंने मौके पर मौजूद सभी क्षेत्राधिकारियों (CO) और थाना प्रभारियों (SHO) को स्पष्ट हिदायत दी कि कोई भी पीड़ित न्याय के लिए दर-दर न भटके। एसपी ने कहा, "थानों पर आने वाले प्रत्येक फरियादी के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए। उसकी शिकायत पर तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कर निष्पक्ष जांच शुरू की जाए।"
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उन्होंने आगे कहा कि जिन मामलों में जमीन या प्रॉपर्टी का विवाद है, वहां पुलिस और राजस्व विभाग (Police and Revenue Department) की संयुक्त टीम (Joint Team) बनाकर मौके पर भेजी जाए। किसी भी विवाद को हिंसक रूप लेने से पहले ही उसे आपसी सहमति या कानूनी प्रक्रिया के तहत शांत कराया जाए। महिला संबंधी अपराधों और अनुसूचित जाति/जनजाति के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही पुलिस बर्दाश्त नहीं करेगी।
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5. बिजली, पानी और बुनियादी सुविधाओं पर भी प्रशासन की पैनी नजर

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राजस्व और पुलिस के अलावा, आम जीवन से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं जैसे बिजली, पेयजल और ग्रामीण विकास के कई प्रार्थना पत्र अधिकारियों के सामने आए। कुछ ग्रामीणों ने बिजली के गलत बिल आने, ट्रांसफार्मर फुंकने के हफ्तों बाद भी न बदले जाने, और जर्जर तारों से हो रहे हादसों की शिकायत की।
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जिलाधिकारी ने तत्काल विद्युत विभाग (Electricity Department) के अधिशासी अभियंता (XEN) और एसडीओ को तलब किया। उन्हें निर्देश दिया गया कि जर्जर तारों को अविलंब बदला जाए और खराब ट्रांसफार्मरों को शासन द्वारा निर्धारित रोस्टर के अनुसार (शहरी क्षेत्र में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र में 48 घंटे के भीतर) बदला जाए। गलत बिलिंग की शिकायतों को कैंप लगाकर सुधारा जाए ताकि किसानों और आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। इसके अलावा, जल निगम और खंड विकास अधिकारियों (BDO) को गांवों में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति और साफ-सफाई दुरुस्त रखने के कड़े निर्देश दिए गए।
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6. शिकायतकर्ता की संतुष्टि है सबसे बड़ा पैमाना

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इस सम्पूर्ण समाधान दिवस की सबसे खास बात यह रही कि अधिकारियों ने फीडबैक तंत्र (Feedback Mechanism) को मजबूत करने पर जोर दिया। डीएम और एसपी ने सभी विभागीय प्रमुखों को निर्देश दिया कि जब भी किसी शिकायत का निस्तारण किया जाए, तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से या दूरभाष (Telephone) के माध्यम से शिकायतकर्ता से संपर्क कर यह पुष्ट करे कि वह इस कार्रवाई से संतुष्ट है या नहीं।
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शासन का मानना है कि 'निस्तारण' (Resolution) का अर्थ केवल शिकायत को बंद करना नहीं है, बल्कि समस्या की जड़ को खत्म करना है। यदि कोई पीड़ित बार-बार एक ही शिकायत लेकर समाधान दिवस में आ रहा है, तो इसका सीधा अर्थ है कि संबंधित विभागीय अधिकारी ने अपना काम ईमानदारी से नहीं किया है। ऐसे लापरवाह अधिकारियों को चिह्नित कर उनकी जवाबदेही तय की जाएगी।
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7. 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रहा है बिजनौर प्रशासन

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बिजनौर प्रशासन का यह संयुक्त प्रयास स्पष्ट रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का हिस्सा है, जहां भ्रष्टाचार और प्रशासनिक शिथिलता के लिए कोई जगह नहीं है। समाधान दिवस के समापन पर अधिकारियों ने उपस्थित सभी कर्मचारियों को एक टीम के रूप में काम करने का मंत्र दिया। यह सुनिश्चित किया गया कि जो भी शिकायतें आज दर्ज की गई हैं, उन्हें संबंधित विभागों के पोर्टल पर ऑनलाइन फीड किया जाएगा और एक निश्चित समय-सीमा (Time Limit) के भीतर उनका क्रॉस-वेरिफिकेशन (Cross-Verification) भी किया जाएगा।
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जनता के द्वार तक पहुंच रहा है न्याय

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सदर तहसील में आयोजित यह सम्पूर्ण समाधान दिवस इस बात का प्रमाण है कि जब जिले के शीर्ष अधिकारी सीधे जनता से जुड़ते हैं, तो प्रशासनिक मशीनरी में एक नई ऊर्जा और जवाबदेही का संचार होता है। बिजनौर के डीएम और एसपी द्वारा दिखाई गई इस तत्परता से निश्चित रूप से आम नागरिकों के मन में प्रशासन के प्रति विश्वास सुदृढ़ होगा।
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अब यह देखना अहम होगा कि अधिकारियों द्वारा दिए गए इन सख्त निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितनी तत्परता से पालन होता है और कितने फरियादियों को उनका हक समय पर मिल पाता है। बिजनौर जिले (Bijnor District) की हर छोटी-बड़ी खबर, प्रशासनिक फैसलों और जन सरोकार से जुड़े मुद्दों की सबसे सटीक, निष्पक्ष और विस्तृत रिपोर्टिंग के लिए आप लगातार जुड़े रहें खबरीलाल (Khabreelal) न्यूज़ पोर्टल के साथ। हमारी नजर हर उस खबर पर है, जिसका सीधा सरोकार आपसे है।
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