नगीना (बिजनौर):
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक जन-केंद्रित और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक बेहद सराहनीय कदम उठाया गया है। शनिवार को नगीना तहसील सभागार में आयोजित 'संपूर्ण तहसील समाधान दिवस' महज़ फाइलों और कागजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और सुशासन (Good Governance) का एक बड़ा मंच बन गया।
\r\n\r\nजिलाधिकारी (DM) जसजीत कौर ने इस अवसर पर न केवल जनता की समस्याओं को सुना, बल्कि सभी विभागीय अधिकारियों को आईजीआरएस (IGRS) और जनसुनवाई पोर्टल से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निस्तारण के साथ-साथ एक नई पहल 'नो व्हीकल डे' (No Vehicle Day) का पालन करने के भी कड़े निर्देश दिए। आइए, इस पूरी खबर और इसके पीछे की प्रशासनिक मंशा को विस्तार से समझते हैं।
\r\n\r\nत्वरित न्याय: IGRS और जनसुनवाई पर DM का सख्त रुख
\r\n\r\nकिसी भी जिले की प्रशासनिक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वहां की जनता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कितनी संतुष्ट है। संपूर्ण समाधान दिवस का मुख्य उद्देश्य ही यही है कि आम नागरिक को न्याय के लिए दर-दर न भटकना पड़े।
\r\n\r\nजिलाधिकारी जसजीत कौर ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि:
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- \r\n मौके पर जाकर हो समाधान: शासन की मंशानुरूप, शिकायतें सिर्फ ऑफिस में बैठकर फाइलों में बंद नहीं होनी चाहिए। अधिकारियों को स्वयं मौके पर जाकर, शिकायतकर्ता की मौजूदगी में समस्या का आकलन करना होगा।\r\n \r\n
- \r\n निर्धारित समय सीमा (Time-bound Resolution): शिकायतों को टालने की प्रवृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर शिकायत का निस्तारण एक तय समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्वक (Quality Resolution) होना चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n शिकायत की पुनरावृत्ति रुके: समाधान ऐसा होना चाहिए कि फरियादी को उसी समस्या के लिए दोबारा तहसील या जिला मुख्यालय के चक्कर न काटने पड़ें। यह तभी संभव है जब पहली बार में ही निष्पक्ष और ठोस कार्रवाई की जाए।\r\n \r\n
\r\n\r\nपर्यावरण संरक्षण की अनोखी पहल: हफ्ते में एक दिन 'नो व्हीकल डे'
\r\n\r\nइस समाधान दिवस की सबसे खास और चर्चा का विषय बनी बात जिलाधिकारी का पर्यावरण और ऊर्जा संरक्षण को लेकर दिया गया संदेश था। आज के समय में जब ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं, ऐसे में स्थानीय स्तर पर उठाए गए छोटे कदम बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
\r\n\r\nभारत सरकार के ईंधन संरक्षण अभियानों को मजबूती देने के लिए डीएम जसजीत कौर ने सभी अधिकारियों से आह्वान किया कि:
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- \r\n सप्ताह में एक दिन बिना गाड़ी के: सभी अधिकारी और कर्मचारी सप्ताह में कम से कम एक दिन 'नो व्हीकल डे' मनाएं। इस दिन वे अपने सरकारी या निजी पेट्रोल/डीजल वाहनों का प्रयोग न करें। इससे न केवल बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि प्रदूषण के स्तर में भी कमी आएगी।\r\n \r\n
- \r\n बिजली और गैस की बचत: सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि दफ्तरों और घरों में गैस तथा बिजली का भी सोच-समझकर उपयोग किया जाए। जब जरूरत न हो तो ऑफिस के एसी, पंखे और लाइटें बंद कर दी जाएं। एक अधिकारी का यह आचरण पूरे स्टाफ और आम जनता के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है।\r\n \r\n
फर्जी शिकायतों पर लगाम: 'गलत शिकायत कर समय न करें व्यर्थ'
\r\n\r\nप्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती फर्जी और बेबुनियाद शिकायतें भी होती हैं। कई बार आपसी रंजिश या अधिकारियों को परेशान करने के इरादे से झूठी शिकायतें जनसुनवाई या संपूर्ण समाधान दिवस में दर्ज करा दी जाती हैं। इससे वास्तविक जरूरतमंदों का हक मारा जाता है और सरकारी मशीनरी का कीमती समय बर्बाद होता है।
\r\n\r\nइस मुद्दे पर गंभीरता दिखाते हुए डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि:
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- \r\n यदि जांच में कोई शिकायत झूठी या गलत पाई जाती है, तो शिकायतकर्ता को फटकारने के बजाय उसे समझाया जाए।\r\n \r\n
- \r\n उसे बताया जाए कि इस तरह की गलत शिकायतों से न केवल उसका खुद का समय खराब होता है, बल्कि उन अधिकारियों का भी समय व्यर्थ होता है जो किसी अन्य जरूरतमंद की असली समस्या सुलझा सकते थे। इस पारदर्शी और व्यावहारिक रवैये से भविष्य में पोर्टल पर आने वाली अनावश्यक शिकायतों में कमी आने की उम्मीद है।\r\n \r\n
\r\n\r\nअंतिम व्यक्ति तक पहुंचे सरकारी योजनाओं का लाभ
\r\n\r\nसरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं (जैसे- पीएम आवास योजना, राशन कार्ड, वृद्धावस्था पेंशन, आयुष्मान भारत आदि) की सफलता इस बात पर निर्भर है कि वे 'पात्र' व्यक्तियों तक पहुंचें। डीएम जसजीत कौर ने सभी विभागीय प्रमुखों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने विभागों से संबंधित योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करें।
\r\n\r\nउनका जोर इस बात पर रहा कि कोई भी 'पात्र' व्यक्ति सरकारी लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए और किसी 'अपात्र' व्यक्ति को इसका गलत फायदा नहीं मिलना चाहिए। जमीनी स्तर पर सर्वे कर यह सुनिश्चित किया जाए कि योजनाएं फाइलों से निकलकर धरातल पर अपना असर दिखाएं।
\r\n\r\nनगीना समाधान दिवस: एक नजर आंकड़ों और अधिकारियों की मौजूदगी पर
\r\n\r\nशनिवार को नगीना तहसील सभागार में आयोजित इस समाधान दिवस में आम जनता ने बढ़-चढ़कर अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं।
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- \r\n कुल दर्ज शिकायतें: इस दौरान विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 28 शिकायतें दर्ज की गईं।\r\n \r\n
- \r\n ऑन-द-स्पॉट निस्तारण: प्रशासन की तत्परता का उदाहरण देते हुए, इनमें से 3 शिकायतों का मौके पर ही सफल निस्तारण कर दिया गया। बाकी शिकायतों के लिए संबंधित विभागों को कड़ी हिदायत के साथ समय-सीमा सौंप दी गई।\r\n \r\n
\r\n\r\nप्रमुख अधिकारियों की उपस्थिति:
\r\n\r\nइस महत्वपूर्ण आयोजन में प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी एक ही छत के नीचे मौजूद रहे, ताकि समस्याओं का त्वरित क्रॉस-डिपार्टमेंटल समाधान निकल सके। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्न अधिकारी मौजूद रहे:
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- \r\n एसडीएम (SDM) विजय शंकर मिश्रा\r\n \r\n
- \r\n सीओ (CO) पुलिस राजेश कुमार\r\n \r\n
- \r\n तहसीलदार अमरपाल सिंह\r\n \r\n
- \r\n नायब तहसीलदार अजब सिंह\r\n \r\n
- \r\n जिला खाद्य एवं आपूर्ति निरीक्षक राजेश कुमार\r\n \r\n
- \r\n बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) सचिन कसाना\r\n \r\n
- \r\n विद्युत विभाग के एसडीओ (SDO) रामकेश\r\n \r\n
- \r\n सर्किल के सभी थाना प्रभारी, अध्यक्ष और अन्य विभागों के अधिकारीगण।\r\n \r\n
बिजनौर के नगीना में आयोजित यह 'संपूर्ण तहसील समाधान दिवस' एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे प्रशासनिक मंचों का उपयोग केवल रूटीन काम निपटाने के लिए नहीं, बल्कि समाज में व्यापक जागरूकता फैलाने के लिए भी किया जा सकता है। डीएम जसजीत कौर द्वारा 'नो व्हीकल डे' का आह्वान और शिकायतों के निस्तारण में 'क्वालिटी' की मांग यह दर्शाती है कि शासन अब सिर्फ आदेश देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जनता के जीवन स्तर को सुधारने और भविष्य (पर्यावरण) को सुरक्षित करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। यदि अधिकारी और जनता मिलकर इन निर्देशों का पालन करें, तो नगीना और पूरा बिजनौर जिला सुशासन और पर्यावरण संरक्षण की एक नई मिसाल पेश कर सकता है।
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Sabse pehle comment karne wale banein.