बिजनौर (20 मई, 2026): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में आगामी ईद-उल-जूहा (बकराईद) के पावन त्योहार को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सांप्रदायिक सौहार्द के वातावरण में संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस महकमे ने अपनी कमर पूरी तरह से कस ली है। बुधवार शाम 5:00 बजे कलेक्ट्रेट सभागार में एक बेहद अहम 'शांति व्यवस्था बैठक' (Peace Committee Meeting) का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी (DM) श्रीमती जसजीत कौर ने की, जिसमें जिले के आला अधिकारियों के साथ-साथ सभी धर्मों के सम्मानित धर्मगुरुओं और संभ्रांत नागरिकों ने हिस्सा लिया।READ ALSO:-मेरठ में जानलेवा गर्मी और लू का कहर: नौनिहालों की सुरक्षा के लिए उठी स्कूलों में छुट्टियां या 'ऑनलाइन क्लास' की जोरदार मांग
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बैठक में प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि आस्था के इस पर्व पर किसी भी शरारती तत्व को कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने की तनिक भी छूट नहीं दी जाएगी। प्रशासन ने त्योहार को लेकर कुछ सख्त गाइडलाइंस (Guidelines) जारी की हैं, जिनका उल्लंघन करने वालों को सीधा जेल की हवा खानी पड़ सकती है।
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सोशल मीडिया के लिए खींची गई सख्त 'लक्ष्मण रेखा' आज के डिजिटल युग में अफवाहें और भ्रामक तस्वीरें सबसे तेजी से फैलती हैं और माहौल बिगाड़ने का काम करती हैं। इस खतरे को भांपते हुए जिलाधिकारी जसजीत कौर ने एक बेहद सख्त और स्पष्ट चेतावनी जारी की है।
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उन्होंने सभी धर्मगुरुओं और उपस्थित नागरिकों से सीधे तौर पर आह्वान किया कि "कुर्बानी से जुड़ी कोई भी तस्वीर, वीडियो या खून-खराबे वाले दृश्य किसी भी हाल में फेसबुक, व्हाट्सएप, एक्स (ट्विटर) या इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर न किए जाएं।" डीएम ने आगाह किया कि यदि किसी भी व्यक्ति या शरारती तत्व ने सोशल मीडिया पर ऐसी कोई भी पोस्ट शेयर की जिससे किसी समुदाय की भावनाएं आहत होती हों या जिले की कानून और शांति व्यवस्था के लिए खतरा उत्पन्न होता हो, तो साइबर सेल उस व्यक्ति को तुरंत ट्रेस करेगी और उसके खिलाफ 'कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्यवाही' अमल में लाई जाएगी।
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खुले में कुर्बानी पर पूर्ण पाबंदी: पर्दा लगाना होगा अनिवार्य त्योहार के दौरान स्वच्छता और अन्य समुदायों की भावनाओं का सम्मान करने के उद्देश्य से, प्रशासन ने कुर्बानी के तरीकों पर भी सख्त नियम लागू किए हैं।
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    कोई खुली कुर्बानी नहीं: जिलाधिकारी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी अवस्था में जानवरों की कुर्बानी सड़कों, गलियों या सार्वजनिक खुले स्थानों पर नहीं की जाएगी।
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    पर्दे की व्यवस्था: जहां भी कुर्बानी की जाएगी, वहां चारों तरफ से पर्दे (Curtains) की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा, ताकि राहगीरों या आम जनता को असुविधा न हो।
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गड्ढों में दबेगा अवशेष, कवर्ड वाहनों में होगा परिवहन पर्यावरण और साफ-सफाई को ध्यान में रखते हुए नगर निकायों को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। डीएम जसजीत कौर ने सभी अधिशासी अधिकारियों (EOs) और जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) को कड़े निर्देश दिए हैं:
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    गहरे गड्ढों का निर्माण: कुर्बानी के अवशेषों (वेस्ट) का सुरक्षित और स्वच्छ निपटान (Disposal) करने के लिए आबादी से दूर गहरे गड्ढे खोदे जाएं। अवशेषों को खुले में फेंकने पर सख्त कार्रवाई होगी।
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    वाहनों की चेकिंग: अवशेषों या गोश्त को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने (परिवहन) के समय यह सुनिश्चित किया जाए कि वाहन पूरी तरह से तिरपाल या कवर से ढके हुए हों। किसी भी हाल में परिवहन के दौरान खून या अवशेष सड़क पर नहीं गिरने चाहिए।
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कोई 'नई परंपरा' नहीं होगी बर्दाश्त त्योहारों के दौरान अक्सर नई परंपराएं शुरू करने को लेकर विवाद जन्म लेते हैं। इस पर पूर्ण विराम लगाते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि जिले में किसी भी प्रकार की 'नई परंपरा' की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी। कोई भी व्यक्ति या समूह ऐसा कोई कार्य, जुलूस या आयोजन नहीं करेगा जो पूर्व के वर्षों में संपन्न न किया गया हो। पुराने और पारंपरिक तरीके से ही त्योहार मनाया जाएगा।
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एसपी अभिषेक झा का सुरक्षा 'एक्शन प्लान': चप्पे-चप्पे पर होगी नजर बैठक में मौजूद पुलिस अधीक्षक (SP) अभिषेक झा ने सुरक्षा व्यवस्था का पूरा खाका पेश किया। उन्होंने जिले के सभी थाना प्रभारियों और पुलिस अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। एसपी के सुरक्षा चक्र के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
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    सीसीटीवी (CCTV) से निगरानी: जिन मार्गों से गोश्त या अवशेषों का परिवहन किया जाना है और यदि उन मार्गों पर अन्य समुदायों के 'धार्मिक स्थल' मौजूद हैं, तो ऐसे मार्गों पर अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे इंस्टॉल किए जाएंगे।
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    रूट मार्च और निरीक्षण: त्योहार से पहले ही सभी संवेदनशील इलाकों, परिवहन मार्गों, कुर्बानी स्थलों और अवशेष निस्तारण (Disposal) प्वाइंट्स का पुलिस बारीकी से भौतिक निरीक्षण करेगी।
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    शरारती तत्वों पर मुचलका: अपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों और माहौल बिगाड़ने की फिराक में रहने वाले शरारती तत्वों को चिह्नित कर उन्हें 'मुचलके' (Preventive Bonds) से पाबंद किया जाएगा। उन पर एलआईयू (LIU) की भी गहरी निगाह रहेगी।
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    पशु चोरों पर लगाम: एसपी ने थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि त्योहार के सीजन में सक्रिय होने वाले 'पशु चोरों' पर विशेष नजर रखी जाए और सघन चेकिंग अभियान चलाया जाए। इसके साथ ही हर थाने के स्तर पर अलग से 'शांति कमेटी' की बैठकें भी आयोजित की जाएं।
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एक नजर में बकराईद की गाइडलाइंस (क्या करें, क्या न करें)

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नियम / विषय
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प्रशासन के स्पष्ट निर्देश
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सोशल मीडिया
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कुर्बानी की कोई तस्वीर या वीडियो शेयर करना पूर्णतः वर्जित है।
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कुर्बानी का स्थान
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खुले में प्रतिबंधित। चारों ओर से पर्दा लगाना अनिवार्य है।
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अवशेषों का निस्तारण
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खुले में फेंकना मना है। प्रशासन द्वारा खोदे गए गहरे गड्ढों में दबाना होगा।
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परिवहन (Transport)
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वाहन पूरी तरह ढका होना चाहिए, सड़क पर कुछ न गिरे।
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नई परंपरा
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किसी भी नई परंपरा (नए रास्ते, नए आयोजन) की सख्त मनाही है।
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धार्मिक सौहार्द
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अफवाहों पर ध्यान न दें, भाईचारा बनाए रखें।
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प्रशासन का वादा: सुविधाओं में नहीं होगी कोई कमी अधिकारियों ने कड़े निर्देश देने के साथ-साथ जनता को यह भरोसा भी दिलाया कि प्रशासन उनकी सुविधाओं का पूरा ख्याल रखेगा। धर्मगुरुओं ने बैठक में बिजली, पानी और साफ-सफाई से जुड़ी कुछ समस्याएं उठाईं। जिलाधिकारी ने सभी समस्याओं को डायरी में नोट करते हुए आश्वस्त किया कि संबंधित विभागीय अधिकारियों (बिजली विभाग, जल निगम, नगर पालिका) के माध्यम से इन समस्याओं का शत-प्रतिशत निस्तारण समय रहते सुनिश्चित कराया जाएगा। त्योहार के दिन बिजली और पानी की निर्बाध आपूर्ति की जाएगी।
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इस महत्वपूर्ण शांति व्यवस्था बैठक में डीएम और एसपी के अलावा अपर जिलाधिकारी प्रशासन (ADM Admin) अंशिका दीक्षित, अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) नगर क्षेत्र एवं ग्रामीण, उप जिलाधिकारी (SDMs), क्षेत्राधिकारी पुलिस (COs), जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) सहित जिले के कई आला अधिकारी और विभिन्न स्थानों से पधारे समस्त धर्मों के सम्मानित धर्म गुरु बड़ी संख्या में मौजूद रहे। प्रशासन ने सभी से अपील की है कि वे इस पर्व को आपसी प्रेम, शांति और भाईचारे की मिसाल बनाते हुए मनाएं।
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