उत्तर प्रदेश पुलिस इन दिनों साइबर अपराधियों के खिलाफ बेहद सख्त मोड में नजर आ रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को बिजनौर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश स्तर पर चलाए जा रहे 'ऑपरेशन Cy-Vajra' के तहत स्योहारा पुलिस ने एक बड़े बिजनौर साइबर क्राइम (Bijnor Cyber Crime) नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने त्वरित और सटीक कार्रवाई करते हुए 11 शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। (Internal link to related article) यह गिरोह हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) की फर्जी वेबसाइट बनाकर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर आम जनता की गाढ़ी कमाई लूट रहा था।READ ALSO:-बिना सिम-बिना नेटवर्क सीधे आसमान से कनेक्ट होगा फोन! BSNL ने लॉन्च किया अत्याधुनिक सैटेलाइट हैंडसेट, आपदा और सुदूर इलाकों के लिए बनेगा 'लाइफलाइन'
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'ऑपरेशन Cy-Vajra' और NCRP पोर्टल की भूमिका
\r\n\r\nइस पूरे बिजनौर साइबर क्राइम नेटवर्क का भंडाफोड़ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के गहन विश्लेषण के बाद हुआ। प्रदेश स्तर पर चल रहे 'Cy-Vajra' अभियान का मुख्य उद्देश्य संगठित साइबर अपराधों पर लगाम कसना है। स्योहारा पुलिस की साइबर सेल और तकनीकी टीम पिछले कई दिनों से NCRP पोर्टल पर आ रही शिकायतों को मॉनिटर कर रही थी।
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\r\n— Bijnor Police (@bijnorpolice) July 10, 2026
\r\nऑपरेशन Cy-Vajra अभियान के तहत थाना स्योहारा पुलिस द्वारा मु0अ0सं0 -275/2026 व मु0अ0सं0 -276/2026 धारा 318(4),338,336(3),340(2),317(2) बीएनएस तथा धारा 66(D) आई0टी0 एक्ट से सम्बन्धित 11 अभियुक्तगणो को घटना में प्रयुक्त उपकरणों सहित किया गया गिरफ्तार ।#UPPolice pic.twitter.com/PXp5WtjoiH
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शिकायतों के पैटर्न से यह स्पष्ट हुआ कि बिजनौर जिले के कुछ खास आईपी (IP) एड्रेस से बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा है। पुख्ता तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम ने छापेमारी की और भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ 11 अभियुक्तों को रंगे हाथों धर दबोचा।
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कैसे दिया जाता था बिजनौर साइबर क्राइम की घटनाओं को अंजाम?
\r\n\r\nइस गिरोह की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) बेहद हाई-टेक और चौंकाने वाली थी। पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार अभियुक्तों ने ठगी के कई चौंकाने वाले राज उगले हैं:
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- \r\n HSRP की हूबहू नकली वेबसाइट का निर्माण: वाहन चालकों के लिए हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) अनिवार्य है, जिसका फायदा इन ठगों ने उठाया। इन्होंने परिवहन विभाग की आधिकारिक HSRP वेबसाइट की पूरी तरह नकल करते हुए "bookkhsrplate.com" और "bookmyhsrp.com" जैसी फर्जी वेबसाइटें तैयार कीं।\r\n \r\n
- \r\n AI और ChatGPT का शातिर इस्तेमाल: इन फर्जी वेबसाइटों की कोडिंग, इंटरफेस और डिजाइन को बिल्कुल असली और सरकारी पोर्टल जैसा दिखाने के लिए शातिर अपराधियों ने ChatGPT और अन्य ऑनलाइन AI (Artificial Intelligence) टूल्स का सहारा लिया। इसके कारण आम नागरिक आसानी से इनकी असलियत नहीं पहचान पाते थे।\r\n \r\n
- \r\n कमीशन पर पैसों का बंटवारा: वेबसाइट पर जब कोई आम नागरिक HSRP बुकिंग के लिए ऑनलाइन भुगतान करता था, तो वह पैसा सीधे अभियुक्त परवेज, बिलाल, इरफान और अमजद के बैंक खातों में पहुंच जाता था। इसके बाद गिरोह के सदस्य इस ठगी की रकम को कमीशन के आधार पर आपस में बांट लेते थे।\r\n \r\n
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फर्जी जनसेवा केंद्र (CSC) और फर्जी बैंक खातों का जाल
\r\n\r\nइस पूरे सिंडिकेट की जड़ें काफी गहरी थीं। बिजनौर साइबर क्राइम का यह गिरोह केवल फर्जी वेबसाइट तक ही सीमित नहीं था। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि अभियुक्त बिलाल और अमजद इलाके में फर्जी जनसेवा केंद्र (CSC) संचालित करते थे।
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इन जनसेवा केंद्रों की आड़ में वे लोगों के आधार कार्ड (Aadhaar Card) के डेटा का प्रतिरूपण करते थे। फिंगरप्रिंट क्लोनिंग और फर्जी दस्तावेजों की मदद से ग्रामीण और भोले-भाले लोगों के नाम पर बैंक खाते खोले जाते थे, जिनका इस्तेमाल ठगी के पैसों को रोटेट करने और निकालने के लिए किया जाता था। इसके अतिरिक्त, गिरोह के कुछ सदस्य सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल (Fake Profiles) बनाकर निवेश (Investment) में भारी मुनाफे का लालच देकर भी लोगों के साथ धोखाधड़ी करते थे।
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गिरफ्तार अभियुक्तों की पूरी सूची
\r\n\r\nस्योहारा पुलिस ने इस सुनियोजित सिंडिकेट को चलाने वाले निम्नलिखित 11 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जो स्योहारा थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवों के निवासी हैं:
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- \r\n मिराजुद्दीन पुत्र मौ नसीम (ग्राम मेवानवादा)\r\n \r\n
- \r\n मौ0 शाकिब पुत्र जहीरुद्दीन (सूरानंगला)\r\n \r\n
- \r\n नईम अहमद पुत्र नजरुद्दीन (मकसूदपुर)\r\n \r\n
- \r\n असद मौ पुत्र मुताज्जिम (ग्राम मेवा नवादा)\r\n \r\n
- \r\n मौ0 रिजवान पुत्र हनीफ (ग्राम मेवा नवादा)\r\n \r\n
- \r\n मौ0 समद पुत्र शाकिर अली (मौ चौधरीयान कस्बा सहसपुर)\r\n \r\n
- \r\n परवेज पुत्र जाहिद (मकसूदपुर)\r\n \r\n
- \r\n बिलाल पुत्र इकरामुद्दीन (ग्राम मेवा नवादा)\r\n \r\n
- \r\n मौ0 इरफान पुत्र मौ०इशाक (ग्राम मेवा नवादा)\r\n \r\n
- \r\n अमजद अली पुत्र अनवार अहमद (फेजुल्लापुर)\r\n \r\n
- \r\n इलमा चौधरी पुत्री इनामुलहक (मौ० इस्लामनगर कस्बा)\r\n \r\n
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इनमें से अभियुक्त मौ० इरफान का पुराना आपराधिक इतिहास भी रहा है। उसके खिलाफ पहले से ही थाना स्योहारा में मारपीट और जान से मारने की धमकी (धारा 323, 352, 427, 504, 506 भादवि) का मुकदमा दर्ज है।
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पुलिस की भारी बरामदगी: उपकरणों और दस्तावेजों का जखीरा
\r\n\r\nयह एक सुगठित कॉर्पोरेट स्टाइल में चलने वाला ठगी का नेटवर्क था। बिजनौर साइबर क्राइम की इस छापेमारी में पुलिस टीम ने जो बरामदगी की है, वह इस गिरोह के विशाल आकार को दर्शाती है।
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- \r\n इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: 4 लैपटॉप, 15 स्मार्ट मोबाइल फोन, 1 कीपैड मोबाइल फोन, 2 प्रिंटर, 1 मॉनिटर, 1 कीबोर्ड, 1 टैबलेट, 1 फिंगरप्रिंट लेने की मशीन (बायोमेट्रिक डिवाइस) और पेन ड्राइव।\r\n \r\n
- \r\n फर्जी बैंक खाते और दस्तावेज: पुलिस को 61 आधार कार्ड, 15 वोटर आईडी कार्ड, 19 पैन कार्ड, 4 ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल), 1 आयुष्मान कार्ड और 1 ई-श्रम कार्ड मिला है।\r\n \r\n
- \r\n वित्तीय दस्तावेज: 42 बैंक पासबुक, 10 बैंक चेकबुक और 33 डेबिट/क्रेडिट कार्ड बरामद हुए हैं, जो यह साबित करते हैं कि कितने व्यापक स्तर पर डमी खातों का संचालन हो रहा था।\r\n \r\n
- \r\n नकदी और फ्रीज अमाउंट: मौके से ₹1,20,000 की नकद राशि बरामद की गई है, जबकि इन ठगों के बैंक खातों में पड़ी ₹88,000 की धनराशि को पुलिस ने फ्रीज करवा दिया है। (कुल ₹2,08,000 की धनराशि की जब्ती)।\r\n \r\n
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इस कार्रवाई का नेतृत्व करने वाली पुलिस टीम
\r\n\r\nइस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए स्योहारा और धामपुर थानों की 21 सदस्यीय संयुक्त पुलिस टीम का गठन किया गया था। इस कुशल टीम का नेतृत्व थाना धामपुर के प्रभारी निरीक्षक श्री रविन्द्र प्रताप सिंह और थाना स्योहारा के वरिष्ठ उप-निरीक्षक (SSI) श्री सूरजीत सिंह ने किया। (External link: source URL) इस टीम में कई उप-निरीक्षक, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल शामिल थे, जिनकी दिन-रात की मेहनत से यह बिजनौर साइबर क्राइम नेटवर्क ध्वस्त हुआ है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ 318(4), 338, 336(3), 340(2), 317(2) बीएनएस तथा धारा 66(D) आईटी एक्ट के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।
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'ऑपरेशन Cy-Vajra' के तहत बिजनौर पुलिस को मिली यह सफलता पूरे प्रदेश के लिए एक नजीर है। बिजनौर साइबर क्राइम का यह मामला स्पष्ट करता है कि अब अपराधी तकनीक और एआई (AI) का कितना गहरा दुरुपयोग कर रहे हैं। HSRP प्लेट बुकिंग या ऑनलाइन निवेश के नाम पर आम नागरिक आसानी से इनके जाल में फंस रहे हैं। पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी सरकारी सेवा के लिए केवल आधिकारिक और वेरीफाइड पोर्टल (.gov.in) का ही इस्तेमाल करें। साथ ही, जनसेवा केंद्रों पर अपनी निजी जानकारी (जैसे बायोमेट्रिक्स या आधार कार्ड) साझा करते समय पूरी सावधानी बरतें। साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता ही ठगी से बचने का सबसे सशक्त हथियार है।
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दिनांक 10 जुलाई 2026 को बिजनौर जिले की स्योहारा पुलिस ने 'ऑपरेशन Cy-Vajra' के तहत 11 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह AI और ChatGPT की मदद से HSRP की फर्जी वेबसाइट (bookkhsrplate.com आदि) बनाकर लोगों से पैसे ठगता था। साथ ही, फर्जी जनसेवा केंद्र चलाकर लोगों के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर बैंक खाते खोले गए थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 4 लैपटॉप, 15 स्मार्टफोन, 61 आधार कार्ड, 42 पासबुक, फिंगरप्रिंट मशीन और कुल 2.08 लाख रुपये (नकद व फ्रीज) बरामद किए हैं। पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
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