उत्तर प्रदेश के बिजनौर में मंगलवार शाम को भारी राजनीतिक हलचल देखने को मिली। अयोध्या के श्रीराम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के विरोध में बिजनौर कांग्रेस का प्रदर्शन उग्र हो गया। कांग्रेस कमेटी ने निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर 'सद्बुद्धि यात्रा' निकाली, जिसे पुलिस ने बीच में ही रोक दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।READ ALSO:-बिजनौर में दहेज दानवों का खौफनाक चेहरा: 'कार' की भूख ने ली नवविवाहिता की जान, शादी के महज 76 दिन बाद ही दे दिया जहर
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बिजनौर कांग्रेस का प्रदर्शन: पुलिस ने कार्यालय पर ही रोकी यात्रा

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मंगलवार शाम करीब 5 बजे बिजनौर जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता और नेता बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए। वे श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर शहर में 'सद्बुद्धि यात्रा' निकालने की तैयारी कर रहे थे।
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हालांकि, स्थानीय प्रशासन और पुलिस पहले से ही मुस्तैद थी। भारी संख्या में तैनात पुलिस बल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को उनके जिला कार्यालय से आगे नहीं बढ़ने दिया। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए यात्रा को वहीं रोक दिया गया।
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विरोध में गाए गए भजन, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

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पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपना विरोध जताने का अनूठा तरीका अपनाया। उन्होंने उग्र होने के बजाय जिला कार्यालय के सामने ही बैठकर भजन-कीर्तन शुरू कर दिया।
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इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेताओं ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन स्थानीय प्रशासन को सौंपा। इस ज्ञापन में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की गई है।
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करोड़ों रामभक्तों की आस्था को ठेस पहुंचने का गंभीर आरोप

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जिला अध्यक्ष हेनरिता राजीव सिंह और शहर अध्यक्ष हुमायूं बेग ने इस पूरे प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने ज्ञापन में बताया कि श्रीराम मंदिर में करोड़ों रुपये के चढ़ावे, आभूषणों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं में हेराफेरी की खबरें आ रही हैं।
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नेताओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से बहुमूल्य आभूषणों को गलाकर सोने-चांदी की ईंटों में बदल दिया गया है। कांग्रेस का कहना है कि इस घटना से देशभर के करोड़ों रामभक्तों की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।
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'श्रीराम किसी एक दल के नहीं, पूरे राष्ट्र की आस्था हैं'

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प्रदर्शन के दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि भगवान श्रीराम किसी एक राजनीतिक दल की जागीर नहीं हैं। वे पूरे राष्ट्र और सनातन धर्म की आस्था के सर्वोच्च प्रतीक माने जाते हैं।
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उन्होंने जोर देकर कहा कि राम मंदिर की गरिमा, पवित्रता और पारदर्शिता से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पार्टी ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण का सत्य सामने आना चाहिए और दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
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हाई कोर्ट के जज से जांच और ट्रस्ट भंग करने की प्रमुख मांग

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कांग्रेस पार्टी ने राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से दो सबसे प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग यह है कि इस पूरे कथित वित्तीय घोटाले की जांच उच्च न्यायालय (High Court) के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए, ताकि जांच प्रभावित न हो सके।
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दूसरी बड़ी मांग वर्तमान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल प्रभाव से भंग करने की है। कांग्रेस का सुझाव है कि मंदिर प्रबंधन और संचालन की पूरी जिम्मेदारी चारों शंकराचार्यों और मंदिर के सम्मानित महंतों को सौंप दी जानी चाहिए, जिससे श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रहे।
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निष्कर्ष के तौर पर, राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर बिजनौर कांग्रेस का प्रदर्शन यह स्पष्ट दर्शाता है कि यह मुद्दा अब बड़ा राजनीतिक तूल पकड़ रहा है। रामभक्तों की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील विषय पर अब देखना यह है कि राज्य सरकार और प्रशासन कांग्रेस की इन मांगों पर आगे क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
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