बिजनौर: उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और माफियाओं-अवैध कारोबारियों पर नकेल कसने के लिए प्रशासन लगातार सख्त कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में बिजनौर (Bijnor) जिले से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां कुछ दबंग किस्म के लोगों ने प्रशासनिक आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए वन विभाग (Forest Department) द्वारा सील की गई एक आरा मशीन (Sawmill) को न सिर्फ खोल लिया, बल्कि उसका धड़ल्ले से अवैध संचालन भी शुरू कर दिया।READ ALSO:-मेरठ में 'लव जिहाद' का दुस्साहस: घर में घुसकर हिंदू युवती को जबरन ले जाने की कोशिश, सड़क से थाने तक भारी बवाल, उबला हिंदू समाज!
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लेकिन कहते हैं कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। जैसे ही इस दुस्साहसिक कृत्य की भनक जिले के आला अधिकारियों को लगी, प्रशासन का हंटर जमकर चला। जिलाधिकारी (DM) के सख्त निर्देशों के बाद न केवल इस अवैध आरा मशीन पर ताला जड़ा गया है, बल्कि मशीन के मालिकों और संचालकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। 'खबरीलाल' (Khabreelal) की इस खास रिपोर्ट में आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर कैसे बिजनौर में सरकारी सील तोड़ने का यह बड़ा खेल चल रहा था और प्रशासन ने इस पर कैसे लगाम लगाई।
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जानी चौराहा क्षेत्र का मामला: क्या था पूरा खेल?
\r\n\r\nलकड़ी के अवैध कटान और पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर आरा मशीनों के संचालन को लेकर उत्तर प्रदेश शासन के बेहद कड़े नियम हैं। बिना वैध लाइसेंस और नवीनीकरण के कोई भी आरा मशीन नहीं चलाई जा सकती।
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ताजा मामला बिजनौर शहर के जानी चौराहा क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, यहां एक आरा मशीन संचालित की जा रही थी। पूर्व में वन विभाग के सक्षम प्राधिकारियों (Competent Authorities) ने जब इस आरा मशीन के दस्तावेजों की जांच की थी, तो इसमें भारी अनियमितताएं पाई गई थीं। आरा मशीन का लाइसेंस रिन्यू (नवीनीकरण) नहीं कराया गया था। नियमों के इस घोर उल्लंघन को देखते हुए वन विभाग की टीम ने इस आरा मशीन को विधिवत रूप से 'सील' (Sealed) कर दिया था और स्पष्ट निर्देश दिए थे कि बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के यह सील किसी भी हाल में नहीं खोली जाएगी।
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कानून का खौफ खत्म! जानबूझकर तोड़ी गई सरकारी सील
\r\n\r\nआरा मशीन के मालिकों ने वन विभाग की इस कार्रवाई को गंभीरता से लेने के बजाय, सरकारी आदेशों को अपने जूतों की नोक पर रखने का फैसला किया। जिलाधिकारी कार्यालय को हाल ही में कुछ गुप्त सूत्रों से यह पुख्ता सूचना प्राप्त हुई कि जानी चौराहा पर जो आरा मशीन सील की गई थी, वहां से फिर से लकड़ियां चीरने की आवाजें आ रही हैं और वहां भारी व्यावसायिक गतिविधियां धड़ल्ले से चल रही हैं।
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इस सूचना को बेहद गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने तुरंत एक विशेष जांच टीम गठित की और मौके पर छापेमारी के निर्देश दिए। जब जांच टीम जानी चौराहा स्थित उस आरा मशीन पर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। वन विभाग द्वारा लगाई गई सरकारी सील को जानबूझकर क्षतिग्रस्त कर दिया गया था और आरा मशीन पूरी क्षमता के साथ अवैध रूप से लकड़ियां चीरने का काम कर रही थी। जांच में यह भी पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि मशीन का अभी तक कोई नवीनीकरण (Renewal) भी नहीं कराया गया था।
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मालिक हुमा तालिब और परिवार के खिलाफ हुई सख्त कानूनी कार्रवाई
\r\n\r\nअधिकारियों की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह साफ हो गया कि यह एक सोची-समझी साजिश और कानून को चुनौती देने वाला कृत्य था। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि आरा मशीन की मालकिन हुमा तालिब, उनके पति और परिवार के अन्य सदस्य— मो० खालिद, मो० आबिद एवं मो० तालिब ने मिलकर एक राय होकर जानबूझकर सरकारी मशीनरी को धता बताते हुए सील को तोड़ा और अवैध संचालन शुरू किया।
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अधिकारियों के आदेशों की इस खुली अवहेलना को देखते हुए प्रशासन ने बिना कोई देरी किए संबंधित सभी व्यक्तियों के विरुद्ध 'उत्तर प्रदेश आरामिल स्थापना विनियमन (षष्ठम संशोधन)-2018' के नियम-5/8 के कड़े प्रावधानों के अंतर्गत विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
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नई 'भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023' के तहत दर्ज हुई FIR
\r\n\r\nइस गंभीर प्रकरण में पुलिस ने भी तुरंत एक्शन लिया है। थाना कोतवाली शहर, जनपद बिजनौर में पुलिस ने आरा मशीन संचालकों के खिलाफ दिनांक 04.04.2026 को एफआईआर संख्या 0265 पंजीकृत कर ली है।
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खास बात यह है कि पुलिस ने इस मामले में देश के नए और सख्त आपराधिक कानूनों का इस्तेमाल किया है। आरोपियों के खिलाफ 'भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023' की धारा 223, 329(4) एवं 346 के अंतर्गत अभियोग दर्ज किया गया है। सरकारी आदेश की अवहेलना, सरकारी संपत्ति/सील को नुकसान पहुंचाना और अवैध रूप से कारोबार करने जैसे संगीन अपराध इन धाराओं के दायरे में आते हैं। प्रकरण की संवेदनशीलता और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे को देखते हुए बिजनौर पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर अपनी विवेचना (Investigation) भी शुरू कर दी है। पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
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वन विभाग के अधिकारियों पर भी लटकी तलवार: शासन को भेजी गई रिपोर्ट
\r\n\r\nइस पूरे एपिसोड में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल यह उठ रहा है कि जिस वन विभाग ने इस आरा मशीन को सील किया था, उसे इसके दोबारा चालू होने की भनक क्यों नहीं लगी? क्या यह वन विभाग के स्थानीय कर्मचारियों की भारी लापरवाही थी, या फिर उनकी मिलीभगत से ही यह अवैध खेल चल रहा था?
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प्रशासन ने इस बिंदु को भी अपनी जांच के रडार पर रखा है। सील्ड आरा मशीन के अवैध संचालन के संबंध में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। जिलाधिकारी ने इस रिपोर्ट से सीधे 'शासन' (UP Government) को अवगत करा दिया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में वन विभाग के कुछ लापरवाह अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय है।
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जिलाधिकारी की दो टूक: 'अवैध कार्यों पर जीरो टॉलरेंस की नीति'
\r\n\r\nइस पूरी कार्रवाई के बाद जिलाधिकारी महोदय/महोदया ने कड़ा संदेश जारी किया है। उन्होंने मीडिया और आम जनता को स्पष्ट किया है कि जनपद बिजनौर में शासनादेशों की अवहेलना और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों के विरुद्ध प्रशासन शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति अपना रहा है।
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उन्होंने चेतावनी दी है कि चाहे वह अवैध लकड़ी का कारोबार हो, खनन हो या कोई अन्य गैर-कानूनी गतिविधि, कोई भी व्यक्ति खुद को कानून से ऊपर न समझे। जो भी सरकारी आदेशों का उल्लंघन करेगा या माफिया राज चलाने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ भविष्य में भी इसी प्रकार की और इससे भी अधिक कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। प्रशासन के इस कड़े रुख के बाद जिले के अन्य अवैध कारोबारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है।
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