बिजनौर/प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) जिले से जुड़े एक ऐसे हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने अपना अहम फैसला सुनाया है, जिसने साल 2016 में पूरे देश की कानून व्यवस्था और जांच एजेंसियों को हिलाकर रख दिया था। यह मामला राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) के तेजतर्रार डीएसपी तंजील अहमद (DSP Tanzil Ahmed) और उनकी पत्नी फरजाना की बेरहम हत्या से जुड़ा है।READ ALSO:-यूपी में बेरोजगारों की बल्ले-बल्ले: आबकारी विभाग में 722 सिपाहियों की बंपर भर्ती, PET 2025 पास युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाने का सुनहरा मौका!
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस बहुचर्चित हत्याकांड में फांसी की सजा का सामना कर रहे आरोपी रेयान (Reyan) को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ी राहत देते हुए सभी आरोपों से बरी (Acquitted) कर दिया है। निचली अदालत (Bijnor Court) के फैसले को पलटते हुए हाईकोर्ट का यह आदेश इस हाई-प्रोफाइल केस में एक बहुत बड़ा ट्विस्ट है। लगभग 10 सालों से सलाखों के पीछे कैद रेयान की अब रिहाई होगी। आपके अपने भरोसेमंद न्यूज़ पोर्टल 'खबरीलाल' (Khabreelal) की इस विशेष क्राइम रिपोर्ट में आइए विस्तार से जानते हैं इस खौफनाक हत्याकांड की पूरी कहानी, कोर्ट की कार्यवाही और इस फैसले के क्या मायने हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला: सबूतों के अभाव में मिली क्लीन चिट

\r\n\r\n
डीएसपी तंजील हत्याकांड में बिजनौर की स्थानीय अदालत ने पुलिस की चार्जशीट और गवाहों के आधार पर कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी रेयान और मुख्य शूटर मुनीर को दोषी करार दिया था। निचली अदालत ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' (Rarest of Rare) केस मानते हुए रेयान को फांसी (Death Penalty) की सजा मुकर्रर की थी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस फैसले के खिलाफ रेयान के वकीलों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले की गहन सुनवाई की। बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि रेयान को इस हत्याकांड में फंसाया गया है और उसके खिलाफ हत्या में सीधे तौर पर शामिल होने के पर्याप्त और पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्य (Forensic/Scientific Evidence) मौजूद नहीं हैं। लंबी जिरह और पत्रावलियों के अवलोकन के बाद, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष की थ्योरी में खामियां पाते हुए रेयान को संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) दिया और उसे सभी गंभीर आरोपों से पूर्ण रूप से बरी कर दिया।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

2 अप्रैल 2016 की वह खौफनाक रात: जब 24 गोलियों से छलनी हुए थे DSP

\r\n\r\n
इस फैसले ने एक बार फिर से उन खौफनाक यादों को ताजा कर दिया है, जब देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी (NIA) के एक बड़े अफसर को सरेआम मौत के घाट उतार दिया गया था। बात 2 अप्रैल 2016 की रात की है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
NIA के डीएसपी तंजील अहमद अपनी पत्नी फरजाना और दोनों बच्चों के साथ बिजनौर के स्योहारा (Seohara) इलाके में एक पारिवारिक शादी समारोह में शामिल होने आए थे। रात करीब 12:45 बजे जब वे अपनी वैगनआर (WagonR) कार से वापस अपने घर (सहसपुर) लौट रहे थे, तभी रास्ते में एक सुनसान जगह पर पहले से घात लगाए बैठे बाइक सवार हमलावरों ने उनकी कार को ओवरटेक कर रोक लिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इससे पहले कि तंजील अहमद कुछ समझ पाते, हमलावरों ने अपनी 9mm की पिस्टल से कार पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। हमलावर इस कदर खौफनाक इरादे से आए थे कि उन्होंने डीएसपी तंजील अहमद के शरीर में एक-दो नहीं, बल्कि पूरी 24 गोलियां दाग दीं। तंजील ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पास बैठी उनकी पत्नी फरजाना को भी कई गोलियां लगीं, जिन्होंने बाद में दिल्ली के एम्स (AIIMS) अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। गनीमत यह रही कि कार की पिछली सीट पर बैठे उनके दोनों मासूम बच्चे इस खूनी खेल में सुरक्षित बच गए थे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मुख्य शूटर मुनीर का खौफ और उसका अंत

\r\n\r\n
इस दोहरे हत्याकांड के बाद यूपी पुलिस, एसटीएफ (STF) और एटीएस (ATS) समेत कई जांच एजेंसियों ने दिन-रात एक कर दिया था। जांच में परतें खुलीं तो पता चला कि इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड और मुख्य शूटर कोई और नहीं, बल्कि कुख्यात अपराधी मुनीर (Muneer) था, जो तंजील अहमद के ही गांव का रहने वाला था और उनके परिवार का करीबी माना जाता था। मुनीर के साथ उसके साथी रेयान को भी पुलिस ने साजिश रचने और हत्या में सहयोग करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
बताया गया कि तंजील अहमद मुनीर की आपराधिक गतिविधियों के सख्त खिलाफ थे और उसके खिलाफ पुलिस की मुखबिरी कर रहे थे। इसी रंजिश के चलते मुनीर ने रेयान और अन्य साथियों के साथ मिलकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
हालांकि, इस केस में न्याय का पहिया पूरी तरह घूम पाता, उससे पहले ही प्रकृति ने अपना फैसला सुना दिया। साल 2022 में जेल में बंद रहने के दौरान मुख्य आरोपी और खूंखार शूटर मुनीर की गंभीर बीमारी के चलते मौत हो गई थी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

10 साल बाद रेयान की रिहाई: परिवार और जांच एजेंसियों पर असर

\r\n\r\n
मुनीर की मौत के बाद रेयान ही इस केस में सजायाफ्ता मुख्य आरोपी बचा था। अब हाईकोर्ट द्वारा रेयान को बरी किए जाने के बाद, यह हाई-प्रोफाइल केस एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
साल 2016 में गिरफ्तार होने के बाद से रेयान लगातार जेल में बंद था। फांसी की चक्की में पिस रहे रेयान के लिए हाईकोर्ट का यह फैसला किसी पुनर्जन्म से कम नहीं है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जल्द ही उसे जेल से रिहा कर दिया जाएगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
दूसरी ओर, इस फैसले से तंजील अहमद के परिजनों को गहरा आघात लग सकता है, जो अपने परिवार के दो सदस्यों को खोने के बाद न्याय की आस लगाए बैठे थे। इसके अलावा, जांच एजेंसियों (UP Police) की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा जुटाए गए सबूतों पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं कि आखिर निचली अदालत में जो सबूत फांसी की सजा के लिए पर्याप्त थे, वे हाईकोर्ट में क्यों नहीं टिक पाए?
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
डीएसपी तंजील अहमद हत्याकांड उत्तर प्रदेश के अपराध इतिहास के सबसे काले पन्नों में से एक है। रेयान के बरी होने के साथ ही इस केस का एक बड़ा अध्याय बंद हो गया है, लेकिन सिस्टम और न्याय प्रक्रिया को लेकर कई सवाल जरूर पीछे छूट गए हैं। अब देखना यह है कि क्या अभियोजन पक्ष (सरकार) हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख करता है या नहीं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
बिजनौर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हर बड़े क्राइम, कोर्ट के फैसले और पुलिस एक्शन की सबसे प्रामाणिक व तेज कवरेज के लिए लगातार पढ़ते रहें आपका अपना भरोसेमंद न्यूज़ पोर्टल— 'खबरीलाल'।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें