बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को 25 सीटों पर समेट दिया, जो पार्टी के अब तक के सबसे खराब प्रदर्शनों में से एक है। लेकिन इस करारी हार के बाद, एक पुराना विवाद और एक नेता का 'श्राप' अचानक सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन गया है। यह कहानी है RJD के नेता मदन शाह की, जिन्होंने चुनाव से ठीक पहले पार्टी नेतृत्व पर टिकट के लिए करोड़ों रुपये लेने का आरोप लगाते हुए एक भावनात्मक और नाटकीय विरोध प्रदर्शन किया था।READ ALSO:-Bihar Chunav 2025 : यहां देखें पूरा चुनाव परिणाम, जानें किस सीट पर कौन जीता
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\r\nचुनाव परिणाम में RJD का 25 सीटों पर सिमट जाना, ठीक उसी संख्या पर आकर रुक गया, जिसका 'श्राप' मदन शाह ने पार्टी को दिया था।
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\r\nकरोड़ों रुपये लेने का आरोप और 'श्राप' की कहानी
\r\nविधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले, मधुबन विधानसभा सीट से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे RJD नेता मदन शाह ने RJD सुप्रीमो लालू यादव के आवास, राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास के बाहर जमकर हंगामा किया था। उनका विरोध प्रदर्शन इतना भावनात्मक था कि उन्होंने विरोधस्वरूप अपने कपड़े फाड़ दिए थे और फूट-फूट कर रोए थे।
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\r\nमदन शाह का आरोप था कि उन्हें मधुबन सीट से टिकट देने का वादा किया गया था, जिसके लिए पार्टी के कुछ बड़े नेताओं ने उनसे करोड़ों रुपये लिए थे। अंतिम समय में, उनका टिकट काट दिया गया और वह सीट किसी और उम्मीदवार को दे दी गई।
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  • रोते हुए मदन शाह ने तब मीडिया से कहा था, "मैंने अपनी बेटियों की शादी के लिए जो पैसे रखे थे, वो सब RJD को दे दिए, लेकिन मुझे धोखा मिला। अब मैं क्या करूंगा? मैं RJD को श्राप देता हूँ, यह पार्टी इस चुनाव में 25 सीटों पर सिमट कर रह जाएगी।"
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\r\nसंयोग या 'श्राप' का असर?
\r\nसमय का पहिया घूमा और बिहार चुनाव 2025 के नतीजे सामने आए। RJD, जिसने 2020 के चुनाव में 75 सीटें जीती थीं, वह इस चुनाव में केवल 25 सीटों पर सिमट कर रह गई। यह वही संख्या है, जिसका जिक्र मदन शाह ने गुस्से और हताशा में किया था।
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\r\nRJD के राजनीतिक विरोधी और सोशल मीडिया यूजर्स अब इस 'श्राप' की घटना को पार्टी की हार से जोड़कर देख रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक संयोग है, जबकि पार्टी के अंदरूनी सूत्रों और आम जनता के बीच यह चर्चा गर्म है कि क्या टिकट वितरण में हुई धांधली और एक नेता की बददुआ वास्तव में इतनी भारी पड़ सकती है।
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\r\nRJD पर टिकट बेचने के आरोप
\r\nयह पहली बार नहीं है जब RJD पर विधानसभा या लोकसभा चुनाव में टिकट 'बेचने' के आरोप लगे हैं। हालांकि, मदन शाह का यह मामला सबसे अधिक सार्वजनिक और भावनात्मक था। शाह के अलावा भी कई अन्य दावेदारों ने पार्टी नेतृत्व पर टिकट के बदले भारी रकम लेने और बाद में वादाखिलाफी करने के आरोप लगाए थे।
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\r\nराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के 'टिकट विवाद' से पार्टी की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचता है, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता है और आम मतदाताओं के बीच भी पार्टी की विश्वसनीयता कम होती है।
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\r\nबिहार चुनाव 2025 में RJD का 25 सीटों पर सिमट जाना एक बड़ा राजनीतिक झटका है, लेकिन मदन शाह के 'श्राप' की कहानी इस हार को एक नाटकीय मोड़ देती है। यह घटना भारतीय राजनीति में 'टिकट वितरण' की जटिल और अक्सर विवादित प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है।
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