काठमांडू, नेपाल: नेपाल में सरकार द्वारा सोशल मीडिया ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने के बाद, वहां की 'Gen Z' पीढ़ी यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा सड़कों पर उतर आए हैं। यह प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि सरकार को गोलियां चलानी पड़ीं। यह घटना दिखाती है कि आज की पीढ़ी के लिए सोशल मीडिया सिर्फ एक प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि उनके जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।
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आइए इस पूरे मामले को समझते हैं और यह भी जानते हैं कि आखिर यह पीढ़ी सोशल मीडिया पर कितना समय बिताती है, और क्यों उनके लिए यह सिर्फ एक ऐप से कहीं ज्यादा है।
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क्यों सड़कों पर उतरे Gen Z?
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नेपाल सरकार ने हाल ही में देश में 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया। सरकार का कहना है कि ये कंपनियां नेपाल में अपना ऑफिस खोलें, रजिस्टर हों और शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करें। सरकार के इस फैसले ने Gen Z को भड़का दिया, क्योंकि उनका मानना है कि यह उनकी अभिव्यक्ति की आजादी और डिजिटल पहचान पर सीधा हमला है। यह एक ऐसा कदम था जिसने उनकी पूरी 'डिजिटल लाइफ' को खतरे में डाल दिया।
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एक दिन में 6 घंटे... ये है Gen Z की ‘डिजिटल दुनिया’
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'vicinotech' की एक रिपोर्ट के अनुसार, Gen Z पीढ़ी के लोग सोशल मीडिया पर एक दिन में औसतन 4 से 6 घंटे का समय बिताते हैं। इस दौरान वे सिर्फ दोस्तों से बात नहीं करते, बल्कि अपनी पढ़ाई, बिजनेस और दुनिया से जुड़े रहने के लिए भी इन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करते हैं।
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इस पीढ़ी के लिए, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और स्नैपचैट जैसे ऐप्स उनकी दुनिया हैं। यहां वे मुख्य रूप से:
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    शॉर्ट वीडियो: 15 सेकंड की रील्स या 30 सेकंड के यूट्यूब शॉर्ट्स देखते हैं। अगर कोई वीडियो शुरुआती कुछ सेकंड में उनका ध्यान नहीं खींचता, तो वे उसे तुरंत स्वाइप कर देते हैं।
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    मीम वाले पोस्ट: Gen Z को कॉमेडी, व्यंग्य और रोजमर्रा की जिंदगी पर बने मीम्स बहुत पसंद आते हैं। ये मीम्स सिर्फ चुटकुले नहीं, बल्कि उनकी पीढ़ी के विचार और संस्कृति को दर्शाते हैं।
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    रियल कंटेंट: वे दिखावटी ब्रांडेड कंटेंट की जगह दोस्तों या आम लोगों द्वारा बनाए गए असली और रियल टाइम कंटेंट पर ज्यादा भरोसा करते हैं। उनके लिए प्रामाणिकता (authenticity) सबसे ऊपर है।
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क्या इंटरनेट से कटने का मतलब है जिंदगी से कट जाना?
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नेपाल में हुआ यह प्रदर्शन सिर्फ एक ऐप पर प्रतिबंध का विरोध नहीं है। यह एक ऐसी पीढ़ी का गुस्सा है जो इंटरनेट के साथ बड़ी हुई है और जिसके लिए ऑनलाइन दुनिया उसकी पहचान का एक हिस्सा बन चुकी है। यह घटना दर्शाती है कि Gen Z के लिए इंटरनेट से कटने का मतलब है दुनिया से कट जाना। सरकार का यह कदम सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी एक बड़ा फैसला था, जिसका विरोध अब सड़कों पर दिख रहा है।
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