अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने प्रशांत महासागर की गहराई में पनप रहे एक बड़े खतरे को लेकर दुनिया भर को सतर्क कर दिया है। नासा के एक आधुनिक सैटेलाइट ने प्रशांत महासागर में एक बेहद शक्तिशाली और विनाशकारी 'सुपर अल नीनो' (Super El Nino) के तेजी से आकार लेने की पुष्टि की है। इस खगोलीय घटना के कारण भारत सहित पूरी दुनिया के मौसम में बड़े और भयानक उलटफेर देखने को मिल सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अल नीनो इतना शक्तिशाली हो सकता है कि यह वैश्विक स्तर पर भीषण सूखे, बेमौसम मूसलाधार बारिश और भयंकर तूफानों का कारण बन सकता है। READ ALSO:-महंगाई के बीच आम आदमी को बड़ी राहत! अब सिर्फ ₹642 में मिलेगा LPG गैस सिलेंडर, जानें इस सरकारी योजना का पूरा गणित
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नासा के सैटेलाइट ने क्या देखा?

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नासा के सेंटिनल-6 माइकल फ्रेलिच (Sentinel-6 Michael Freilich) सैटेलाइट ने समुद्र की सतह पर गर्मी की एक विशाल लहर को अपने कैमरे में कैद किया है। इस सैटेलाइट से प्राप्त नवीनतम डेटा से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में पानी का स्तर असामान्य और खतरनाक रूप से बहुत ऊपर उठ गया है।
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समुद्र विज्ञानियों के अनुसार, पानी के इस तरह से ऊपर उठने का सीधा मतलब है कि समुद्र की सतह के ठीक नीचे बहुत बड़ी मात्रा में गर्म पानी जमा हो रहा है। भौतिक विज्ञान के एक सरल नियम के अनुसार, जब पानी गर्म होता है, तो वह फैलता है, जिससे समुद्र का जलस्तर तेजी से ऊपर की तरफ बढ़ता है।
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Nasa El Nino Map

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NOAA ने पहले ही कर दी थी अल नीनो की घोषणा

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प्रशांत महासागर के कुछ खास हिस्सों में तापमान का सामान्य से कहीं अधिक हो जाना और उसके कारण समुद्र की सतह का ऊंचा उठना अल नीनो की दस्तक का सबसे पुख्ता प्रमाण है। इस खतरे की गंभीरता को भांपते हुए अमेरिका के महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने कुछ ही दिन पहले, 11 जून को, वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए आधिकारिक तौर पर इस अल नीनो के शुरू होने की घोषणा कर दी थी।
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अंतरिक्ष से प्राप्त समुद्र की सतह के ऊंचे जलस्तर के ये आंकड़े वैज्ञानिकों को यह समझने में महत्वपूर्ण मदद कर रहे हैं कि प्रशांत महासागर के भीतर कितनी भयानक गर्मी छिपी हुई है, जो कभी भी बाहर आकर तबाही मचा सकती है।
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लौट आई 'गॉडजिला अल नीनो' (1997) की डरावनी यादें

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नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी (Jet Propulsion Laboratory) के शोधकर्ताओं ने जो तथ्य सामने रखे हैं, वे सबसे ज्यादा डराने वाले हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समय पश्चिमी प्रशांत महासागर में जो समुद्री परिस्थितियां बन रही हैं, वे हूबहू साल 1997 में देखी गई स्थितियों से काफी मिलती-जुलती हैं।
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आपको बता दें कि साल 1997 में दुनिया ने अब तक के सबसे खतरनाक और शक्तिशाली अल नीनो का सामना किया था, जिसे विज्ञान की भाषा में ‘गॉडजिला अल नीनो’ (Godzilla El Nino) का नाम दिया गया था। उस समय दुनिया भर में सूखे और बाढ़ से अरबों डॉलर का नुकसान हुआ था। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस बार बन रहा यह नया अल नीनो लगातार और ज्यादा मजबूत होता जा रहा है। अगर इसके बढ़ने की यही रफ्तार रही, तो यह पिछले कई दशकों की सबसे ज्यादा विनाशकारी प्राकृतिक घटना साबित हो सकती है।
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नासा ने जारी किया समुद्र का थ्री-डी नक्शा और 'केल्विन वेव्स' का खतरा

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जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट से प्राप्त इस बेहद संवेदनशील डेटा को प्रोसेस करके समुद्र का एक थ्री-डी (3D) नक्शा भी तैयार किया है। इस खास नक्शे में 8 जून की वास्तविक स्थिति को दर्शाया गया है:
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    लाल रंग: यह हिस्सा समुद्र के अत्यधिक ऊंचे जलस्तर को दिखा रहा है, जो खतरे का संकेत है।
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    सफेद रंग: यह सामान्य जलस्तर को प्रदर्शित करता है।
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    नीला रंग: यह कम जलस्तर को दर्शाता है।
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इसके अलावा, इसी सैटेलाइट ने कुछ समय पहले समुद्र में उठने वाली ‘केल्विन वेव्स’ (Kelvin Waves) को भी रिकॉर्ड किया था। केल्विन वेव्स दरअसल प्रशांत महासागर में सैकड़ों मील चौड़ी गर्म पानी की विशाल लहरें होती हैं। ये लहरें समुद्र के तापमान को और बढ़ा देती हैं और पूरी दुनिया के मौसम चक्र (Weather Cycle) को बुरी तरह प्रभावित करने की ताकत रखती हैं। (Internal link to related article: 'भारतीय मानसून पर अल नीनो का प्रभाव, जानें कैसे प्रभावित होती है हमारी कृषि')
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भारत पर क्या होगा इसका असर?

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इस 'सुपर अल नीनो' के सक्रिय होने से भारत के लिए भी एक बड़ा खतरा पैदा हो गया है। अल नीनो के कारण भारतीय मानसून के कमजोर होने की पूरी आशंका रहती है, जिससे देश के कई हिस्सों में गंभीर सूखे की स्थिति बन सकती है। इसके विपरीत, कुछ इलाकों में बेमौसम और मूसलाधार बारिश भी हो सकती है। कृषि प्रधान देश होने के कारण, कमजोर मानसून का सीधा असर भारत की फसलों, महंगाई और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
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नासा की यह NASA Warning पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा अलार्म है। प्रशांत महासागर में बन रहा यह 'सुपर अल नीनो' कोई साधारण मौसमी घटना नहीं है, बल्कि यह गॉडजिला अल नीनो जैसा भयानक रूप ले सकता है। दुनिया भर के मौसम विज्ञानी इस बढ़ती समुद्री गर्मी पर लगातार नजर रख रहे हैं ताकि आने वाले बड़े संकट से निपटने के लिए समय रहते तैयारियां की जा सकें। अब यह देखना होगा कि प्रकृति का यह रौद्र रूप आने वाले महीनों में दुनिया के किन-किन हिस्सों में अपना असर दिखाता है।
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