अमेरिकी राजनीति में अपने बेबाक और अक्सर विवादित बयानों के लिए पहचाने जाने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर एक बड़ा सियासी और कूटनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। अमेरिका में अप्रवासियों (Immigrants) के प्रवेश और उनके अधिकारों को लेकर ट्रम्प का नजरिया हमेशा से सख्त रहा है, लेकिन इस बार उनके निशाने पर सीधे तौर पर दुनिया के दो सबसे बड़े देश— भारत और चीन आ गए हैं।READ ALSO:-मेरठ में धधका व्यापारियों का गुस्सा: स्मार्ट मीटर की निकाली 'शव यात्रा', ऊर्जा भवन के सामने फूंका पुतला; जानें क्या हैं 9 बड़ी मांगें?
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ट्रम्प ने अपने एक विस्तृत सोशल मीडिया पोस्ट में एक चिट्ठी साझा की है। इस चिट्ठी में उन्होंने न केवल अमेरिका की मौजूदा इमिग्रेशन प्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि जन्म के आधार पर नागरिकता (Birthright Citizenship) देने के कानून को अमेरिका के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। इस दौरान उन्होंने भारत और चीन जैसे देशों के लिए 'हेल होल' (Hell Hole - नरक का द्वार) जैसे बेहद कड़े और विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
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कैलिफोर्निया के टेक सेक्टर में 'भारतीय और चीनी दबदबे' से ट्रम्प खफा
\r\n\r\nडोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पोस्ट में विशेष रूप से कैलिफोर्निया (California) के हाई-टेक सेक्टर— जिसे आमतौर पर 'सिलिकॉन वैली' (Silicon Valley) के रूप में जाना जाता है— का जिक्र किया है। यह किसी से छिपा नहीं है कि दुनिया की सबसे बड़ी आईटी और टेक कंपनियों (जैसे Google, Microsoft, Apple आदि) में भारतीय और चीनी इंजीनियरों का भारी दबदबा है।
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ट्रम्प ने इस वर्चस्व पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि इन हाई-टेक नौकरियों में भारत और चीन के लोगों का प्रभाव इस कदर बढ़ गया है कि वहां एक 'सिंडिकेट' जैसा माहौल बन गया है। उनके मुताबिक:
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- \r\n स्थानीय अमेरिकियों की अनदेखी: ट्रम्प का आरोप है कि इन कंपनियों में भर्ती (Hiring) का पूरा इकोसिस्टम इस तरह से काम कर रहा है कि बाकी देशों या खुद अमेरिका के मूल निवासियों के लिए मौके लगातार सिकुड़ते जा रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n योग्यता से ज्यादा देश को प्राथमिकता: उन्होंने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कैलिफोर्निया की टेक कंपनियों में नौकरी पाने के लिए अब 'योग्यता' (Merit) से ज्यादा यह मायने रखता है कि उम्मीदवार किस देश (भारत या चीन) से ताल्लुक रखता है।\r\n \r\n
- \r\n पक्षपाती सिस्टम: उनके अनुसार, भर्ती प्रक्रिया बिल्कुल भी निष्पक्ष नहीं रह गई है। यह पूरी तरह से कुछ खास समूहों के पक्ष में झुकी हुई है, जिससे अमेरिकी नागरिकों के अधिकारों का हनन हो रहा है।\r\n \r\n
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जन्मजात नागरिकता और 'चेन माइग्रेशन' पर तीखा प्रहार
\r\n\r\nट्रम्प के इस गुस्से का सबसे बड़ा कारण अमेरिका का वह कानून है जो वहां जन्म लेने वाले हर बच्चे को स्वतः ही नागरिकता दे देता है। ट्रम्प ने कहा कि प्रवासी इसी कानून का फायदा उठाकर अपने बच्चों को अमेरिकी नागरिकता दिलाते हैं और फिर उसी बच्चे के आधार पर पूरा कुनबा (परिवार) अमेरिका में आकर बस जाता है। इसे आलोचक 'चेन माइग्रेशन' (Chain Migration) कहते हैं।
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ट्रम्प ने अदालतों की कार्यप्रणाली पर भी अविश्वास जताते हुए कहा कि, "इस अहम मुद्दे का फैसला देश की अदालतों या वकीलों के बंद कमरों में नहीं होना चाहिए, बल्कि इस पर एक देशव्यापी वोटिंग (National Referendum) होनी चाहिए।" उन्होंने एक सोशल मीडिया सर्वे का भी हवाला दिया, जिसमें दावा किया गया है कि अमेरिका के ज्यादातर लोग जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता को सीमित या खत्म करने के पक्ष में हैं।
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मानवाधिकार संगठनों और करदाताओं के पैसे पर ट्रम्प का गुस्सा
\r\n\r\nअपने इस पत्र में डोनाल्ड ट्रम्प ने सिर्फ प्रवासियों को ही नहीं, बल्कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने वाले शक्तिशाली संगठन 'अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन' (ACLU) को भी आड़े हाथों लिया।
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- \r\n ट्रम्प का कहना है कि ACLU जैसे संगठन जानबूझकर अवैध प्रवासियों को फायदा पहुंचाने वाली नीतियों का समर्थन करते हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि ऐसे संगठनों पर 'संगठित अपराध' (Organized Crime) के तहत कड़े कानूनों का इस्तेमाल कर कार्रवाई की जानी चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n स्वास्थ्य सेवाओं का दुरुपयोग: ट्रम्प ने आरोप लगाया कि अवैध प्रवासी अमेरिका की स्वास्थ्य सेवाओं (Healthcare System) और अन्य सरकारी सुविधाओं का जमकर और गलत फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी अस्पतालों में जाते हैं और भारी-भरकम बिल बनाते हैं, जिसका सीधा आर्थिक बोझ अमेरिका के ईमानदार करदाताओं (Taxpayers) की जेब पर पड़ता है।\r\n \r\n
- \r\n इसके अलावा, उन्होंने कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में कथित 'वेलफेयर धोखाधड़ी' और भारी संख्या में प्रवासियों के आने से वहां की स्थानीय सांस्कृतिक और भाषाई पहचान (Cultural Identity) पर पड़ रहे नकारात्मक असर को भी रेखांकित किया।\r\n \r\n
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क्या है 157 साल पुराना 'जन्मजात नागरिकता' (Birthright Citizenship) का कानून?
\r\n\r\nइस पूरे विवाद को समझने के लिए अमेरिका के नागरिकता कानून को समझना बेहद जरूरी है। पूरी दुनिया में आमतौर पर नागरिकता देने के दो मुख्य तरीके होते हैं:
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- \r\n राइट ऑफ सॉइल (Jus Soli - जमीन का अधिकार): यानी बच्चे का जन्म जिस देश की सीमा (मिट्टी) के भीतर हुआ हो, वह स्वतः ही वहां का नागरिक बन जाता है।\r\n \r\n
- \r\n राइट ऑफ ब्लड (Jus Sanguinis - खून का रिश्ता): इसमें बच्चे की नागरिकता इस बात से तय होती है कि उसके माता-पिता किस देश के नागरिक हैं। भारत में मुख्य रूप से इसी नियम का पालन होता है।\r\n \r\n
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अमेरिका का 14वां संशोधन: अमेरिका में 'राइट ऑफ सॉइल' यानी जन्म के आधार पर नागरिकता का नियम लागू है। अमेरिका में गृहयुद्ध (Civil War) खत्म होने के बाद, जुलाई 1868 में अमेरिकी संसद ने संविधान में 14वें संशोधन को मंजूरी दी थी। इस संशोधन का मूल मकसद उन अश्वेत लोगों और पूर्व दासों को अमेरिकी नागरिकता का कानूनी अधिकार देना था जो सदियों से गुलामी के शिकार थे।
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लेकिन, पिछले कई दशकों से इस कानून की व्याख्या इस तरह की जा रही है कि अमेरिका की सरजमीं पर जन्म लेने वाला कोई भी बच्चा—चाहे उसके माता-पिता वैध हों, अवैध प्रवासी हों, या महज टूरिस्ट वीज़ा पर आए हों— वह जन्म लेते ही अमेरिका का वैध नागरिक बन जाएगा।
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'बर्थ टूरिज्म' और भारतीयों की स्थिति
\r\n\r\nइसी कानून का लूपहोल (खामी) निकालकर दुनिया भर के लोग अमेरिका पहुंचते हैं। लोग पढ़ाई, रिसर्च, नौकरी (H1B Visa) या टूरिस्ट वीज़ा के बहाने अमेरिका आते हैं और वहां रुककर बच्चों को जन्म देते हैं। बच्चे के जन्म लेते ही उसे नागरिकता मिल जाती है, और फिर उसी बच्चे की नागरिकता की आड़ में माता-पिता को भी अमेरिका में रुकने का मजबूत कानूनी आधार मिल जाता है।
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डोनाल्ड ट्रम्प और उनके समर्थक इसे 'बर्थ टूरिज्म' (Birth Tourism) कहते हैं और इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए दीमक मानते हैं। जाने-माने 'प्यू रिसर्च सेंटर' (Pew Research Center) की साल 2022 की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, इस कानून के तहत लगभग 16 लाख भारतीय बच्चों को सिर्फ अमेरिका में जन्म लेने की वजह से वहां की नागरिकता हासिल हुई है। ट्रम्प इसी आंकड़े को पूरी तरह से खत्म करना चाहते हैं।
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अदालतों में उलझा है ट्रम्प का फैसला: क्या है वर्तमान स्थिति?
\r\n\r\nडोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी दूसरी पारी की शुरुआत करते हुए सत्ता संभालते ही इस दिशा में बड़ा कदम उठाया था। उन्होंने 20 जनवरी 2025 को एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) जारी करके जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता पर सीधे रोक लगाने की कोशिश की थी।
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हालांकि, अमेरिका का लीगल सिस्टम इस आदेश के आड़े आ गया। आदेश जारी होने के कुछ ही दिनों बाद, अमेरिका की एक फेडरल कोर्ट ने इस विवादित फैसले पर तत्काल प्रभाव से 14 दिनों की अस्थायी रोक (Stay) लगा दी थी। इसके बाद से नागरिकता अधिकारों के पैरोकारों और ट्रम्प प्रशासन के बीच अदालतों में एक लंबी कानूनी जंग छिड़ गई है।
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वर्तमान में कई अलग-अलग अदालतों ने इस आदेश को पूरी तरह लागू होने से रोका हुआ है और मामले की सघन सुनवाई जारी है। अगर ट्रम्प यह कानूनी लड़ाई जीत जाते हैं, तो इसका सबसे बड़ा और सीधा असर उन लाखों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और परिवारों पर पड़ेगा जो अमेरिकी नागरिकता का सपना लिए बैठे हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.