उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का बहुचर्चित 'वंश कुशवाहा हत्याकांड' अब तूल पकड़ता जा रहा है। न्याय के लिए दर-दर भटक रहे पीड़ित परिवार की गुहार अब दिल्ली स्थित 'राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग' (NCBC) के गलियारों तक गूंज रही है। पुलिस की लचर कार्यशैली, मामले को दबाने की कोशिश और पीड़ित परिवार के साथ थाने में हो रहे अमानवीय व्यवहार ने व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।READ ALSO:-क्या आपका WhatsApp भी अचानक हो गया ब्लॉक? हजारों अकाउंट्स 24 घंटे के लिए 'रिव्यू' में, कॉलिंग-मैसेजिंग ठप; जानें मेटा की सफाई
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इस संवेदनशील मामले को लेकर नई दिल्ली में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के समक्ष एक अहम सुनवाई हुई, जिसमें मेरठ प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया गया था। इस सुनवाई के दौरान जो तथ्य निकलकर सामने आए, उसने मेरठ पुलिस की कार्यप्रणाली की पोल खोल कर रख दी है।
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आयोग के सामने पेश हुए SP देहात और ADM, कमिश्नर-SSP रहे नदारद

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शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत, जो शुरुआत से ही इस मामले में पीड़ित परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं, ने बताया कि आयोग के कड़े नोटिस के बाद मेरठ प्रशासन हरकत में आया।
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सुनवाई के दौरान:

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    एसएसपी मेरठ (SSP Meerut) की ओर से पुलिस का पक्ष रखने के लिए एसपी देहात (SP Rural) अभिजीत कुमार आयोग के समक्ष पेश हुए।
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    वहीं, कमिश्नर मेरठ के प्रतिनिधि के तौर पर एडीएम ई (ADM E) विजयवर्धन तोमर ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, नई दिल्ली में हाजिरी लगाई।
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जब आयोग की चेयरपर्सन (अध्यक्ष) साध्वी निरंजन ज्योति ने कमिश्नर और एसएसपी की अनुपस्थिति का कारण पूछा, तो दोनों प्रतिनिधि अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में मेरठ में कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) का भारी दबाव है। कांवड़ यात्रा की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में अत्यधिक व्यस्तता के चलते शीर्ष अधिकारी आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके।
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अधिकारियों ने आयोग को आश्वस्त करते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा कि वंश कुशवाहा की मौत के मामले में संबंधित थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर ली गई है और वर्तमान में पुलिस द्वारा मामले की गहन विवेचना (Investigation) की जा रही है।
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NCBC अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति की खरी-खरी: "गंभीरता से हो जांच"

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अधिकारियों के जवाब से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग संतुष्ट नजर नहीं आया। NCBC की चेयरपर्सन और पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने मेरठ पुलिस की कार्यशैली और एफआईआर दर्ज करने में की गई भारी देरी पर गंभीर सवाल उठाए।
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उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक युवा की हत्या के मामले में पुलिस का रवैया बेहद निराशाजनक रहा है। उन्होंने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिए कि इस हत्याकांड की महज खानापूर्ति न की जाए, बल्कि अत्यंत गंभीरता और निष्पक्षता के साथ इसकी विवेचना हो, ताकि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द और उचित न्याय मिल सके।
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"एफआईआर दर्ज हुए महीना बीत गया, कार्रवाई सिफर": रविकांत

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सुनवाई के दौरान शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने पुलिस के दावों की हवा निकाल दी। उन्होंने चेयरपर्सन के सामने पुलिस की लापरवाही का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए कहा,
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"महोदया, पुलिस आज जो एफआईआर दर्ज होने का दावा कर रही है, वह भी आपके (आयोग के) सीधे हस्तक्षेप और दबाव के बाद ही संभव हो पाया था। लेकिन विडंबना देखिए कि रिपोर्ट दर्ज हुए आज एक महीना बीत चुका है, और पुलिस ने जांच के नाम पर उससे आगे एक कदम भी नहीं बढ़ाया है। आरोपी अभी भी बेखौफ हैं और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है।"
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रो पड़ीं वंश की मां: जानी थाना प्रभारी और विवेचक पर अभद्रता का आरोप

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सुनवाई का सबसे भावुक और दर्दनाक पल वह था जब अपने जवान बेटे को खो चुकी वंश कुशवाहा की मां, नील प्रभा, ने आयोग के सामने अपना दर्द बयां किया। न्याय की आस में थाने के चक्कर काट रही इस अभागी मां के शब्दों ने वहां मौजूद सभी लोगों को झकझोर दिया।
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नील प्रभा ने आयोग से सीधी शिकायत करते हुए कहा कि न्याय मिलना तो दूर, रक्षक ही भक्षक बने हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि:
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    जानी थाना प्रभारी और मामले के विवेचक (IO) इंस्पेक्टर विजय कुमार राय उनके साथ थाने में बेहद अभद्र और अमानवीय व्यवहार करते हैं।
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    जब भी परिवार जांच की प्रगति जानने या कोई जानकारी देने थाने जाता है, तो उन्हें दुत्कार कर भगा दिया जाता है और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।
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आयोग का बड़ा एक्शन: दोषी पुलिसकर्मियों पर गिरेगी गाज

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एक पीड़ित और बेबस मां के साथ पुलिस द्वारा की जा रही इस अभद्रता को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने बेहद गंभीरता से लिया है। चेयरपर्सन साध्वी निरंजन ज्योति ने इस रवैये को बर्दाश्त न करने योग्य बताया।
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उन्होंने मौके पर मौजूद एसपी देहात अभिजीत कुमार को सख्त और स्पष्ट निर्देश दिए कि जानी थाना प्रभारी और विवेचक इंस्पेक्टर विजय कुमार राय के खिलाफ इस अभद्र आचरण के लिए तत्काल विभागीय जांच शुरू की जाए और उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। आयोग ने साफ कर दिया है कि खाकी वर्दी की आड़ में पीड़ितों का उत्पीड़न किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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क्या है पूरा वंश कुशवाहा हत्याकांड? (28 मई की वह खौफनाक शाम)

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जिन लोगों को इस मामले की जानकारी नहीं है, उनके लिए यह जानना जरूरी है कि यह पूरा विवाद 28 मई को शुरू हुआ था। मेरठ के रहने वाले वंश कुशवाहा को उसके ही दो कथित दोस्त घुमाने के बहाने लेकर गए थे। आरोप है कि उन्होंने साजिश के तहत भोले की झाल के पास रजवाहे (नहर) में वंश को धक्का दे दिया और उसे पानी में डुबोकर बड़ी बेरहमी से उसकी हत्या कर दी।
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शुरुआत में पुलिस ने इसे महज एक हादसा बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की। परिवार चीख-चीख कर हत्या का आरोप लगा रहा था, लेकिन स्थानीय पुलिस ने उनकी एक न सुनी और एफआईआर तक दर्ज करने से इनकार कर दिया।
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शोषित क्रांति दल का संघर्ष और 30 जून की वो अहम मुलाकात

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जब स्थानीय स्तर पर हर दरवाजा बंद हो गया, तब शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने पीड़ित परिवार की लड़ाई लड़ने का जिम्मा उठाया। पुलिस की हठधर्मिता के खिलाफ 30 जून को रविकांत के नेतृत्व में शोषित क्रांति दल का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार (वंश की मां और बहन) को लेकर दिल्ली पहुंचा।
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वहां उन्होंने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति से मुलाकात की और पुलिस की ज्यादती से अवगत कराया। उसी मुलाकात और आयोग की फटकार के बाद मेरठ पुलिस बैकफुट पर आई थी और मजबूरन मामले की रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
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वर्तमान सुनवाई में उपस्थिति: आयोग में हुई इस ताजा सुनवाई के दौरान न्याय की आस लिए वंश कुशवाहा की बहन कनिष्का कुशवाहा, शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत और शोषित क्रांति दल के मेरठ महानगर अध्यक्ष वरुण कुमार प्रमुख रूप से मौजूद रहे। अब देखना यह है कि आयोग के इस कड़े रुख के बाद मेरठ पुलिस के ढुलमुल रवैये में क्या बदलाव आता है और क्या वंश के कातिलों को उनके किए की सजा मिल पाती है या नहीं।
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अस्वीकरण (Disclaimer)
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डिस्क्लेमर: यह समाचार रिपोर्ट राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) नई दिल्ली में हुई सुनवाई, पीड़ित परिवार के बयानों, शोषित क्रांति दल द्वारा दी गई जानकारियों तथा पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किए गए पक्ष पर आधारित है। इस लेख का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था की छवि को धूमिल करना नहीं है, बल्कि निष्पक्ष पत्रकारिता के तहत घटनाक्रम और कानूनी प्रक्रियाओं को जनहित में प्रस्तुत करना है। मामले की अंतिम कानूनी सत्यता अदालत एवं पुलिस की अंतिम विवेचना रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।
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