लखनऊ/मेरठ (Khabreelal News Desk): उत्तर प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है और मानसून की सक्रियता अब जानलेवा साबित होने लगी है। पहाड़ों पर लगातार हो रही जोरदार और मूसलाधार बारिश का सीधा असर मैदानी इलाकों, विशेषकर उत्तर प्रदेश पर पड़ रहा है। पहाड़ी इलाकों से पानी छोड़े जाने और प्रदेश में हो रही भारी बारिश के कारण यूपी की प्रमुख नदियां—गंगा, यमुना, सरयू, घाघरा और मलान—उफान पर आ गई हैं। नदियों के जलस्तर में हो रही इस अचानक और तेज वृद्धि ने तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। कई जिलों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है और प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है।READ ALSO:-मेरठ में खौफनाक साजिश या हादसा? स्कूल डायरेक्टर की बेड पर मिली लाश, पास बैठा था सांप; परिजनों ने पत्नी पर लगाया हत्या का आरोप
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बाराबंकी में सरयू का रौद्र रूप, 87 गांवों पर संकट

\r\n\r\n
बाढ़ का सबसे बड़ा और तत्काल खतरा बाराबंकी जिले में देखने को मिल रहा है। यहां सरयू (घाघरा) नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता हुआ खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है। नदी के रौद्र रूप के कारण किनारों पर भारी कटान शुरू हो गया है, जिससे तटीय इलाकों की उपजाऊ कृषि भूमि और किसानों के खेत तेजी से नदी में समा रहे हैं। खेतों के डूबने से किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो गई है। नदी के इस भयावह रूप को देखते हुए बाराबंकी के लगभग 87 गांवों पर बाढ़ का सीधा खतरा मंडराने लगा है। इन गांवों के ग्रामीण रतजगा करने को मजबूर हैं और प्रशासन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव कार्यों की तैयारियों में जुट गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

संगम नगरी प्रयागराज और काशी में घाट डूबे

\r\n\r\n
नदियों के उफान का असर धार्मिक नगरी प्रयागराज और वाराणसी में भी साफ तौर पर देखा जा रहा है। प्रयागराज में गंगा और यमुना दोनों नदियां उफान पर हैं और इनका जलस्तर प्रति घंटे के हिसाब से बढ़ रहा है। संगम तट पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। घाटों पर लगातार लाउडस्पीकर के जरिए अनाउंसमेंट किया जा रहा है और लोगों से अपील की जा रही है कि वे गहरे पानी में न जाएं और किनारों पर रहकर ही सुरक्षित स्नान करें। जल पुलिस और गोताखोरों को मुस्तैद कर दिया गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
वहीं, आध्यात्मिक नगरी वाराणसी (काशी) में भी मां गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने के कारण विश्व प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट की निचली सीढ़ियां पूरी तरह से पानी में डूब गई हैं। इसके अलावा मथुरा में भी यमुना नदी का जलस्तर खतरे की घंटी बजा रहा है, जिससे तटीय बस्तियों में दहशत का माहौल है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

बलिया में बेबसी: अपने ही हाथों तोड़ रहे आशियाने

\r\n\r\n
बाढ़ और कटान का सबसे दर्दनाक और बेबस कर देने वाला मंजर बलिया जिले में देखने को मिल रहा है। यहां घाघरा नदी ने किनारों पर इतना भयंकर कटान शुरू कर दिया है कि लोगों के घरों के नीचे की जमीन खिसकने लगी है। बांसडीह इलाके में हालात इतने भयावह हो गए हैं कि लोग अपने जीवन भर की गाढ़ी कमाई से बनाए गए पक्के मकानों को अपने ही हाथों से हथौड़े मारकर तोड़ रहे हैं, ताकि कम से कम ईंटें और लोहे का सामान बचाया जा सके और उसे दूसरी जगह ले जाया जा सके। अब तक लगभग 150 परिवार अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं। इसके साथ ही, बिजनौर जिले में भी मलान नदी का पानी कई जगह छोटे पुलों और रपटों के ऊपर से बह रहा है, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

आंधी, बारिश और बिजली गिरने से दो मौतें

\r\n\r\n
बारिश केवल बाढ़ ही नहीं, बल्कि हादसों का भी कारण बन रही है। गुरुवार को प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में तेज बारिश हुई। सबसे अधिक बारिश लखीमपुर खीरी में 22.5 मिमी दर्ज की गई। मौसम की इस मार के बीच कानपुर में तेज आंधी के कारण एक विशाल पेड़ गिर गया। इस पेड़ के नीचे दबने से एचएएल (HAL) के एक सुपरवाइजर की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, देवरिया में आसमान से गिरी आकाशीय बिजली ने एक 18 साल की युवती की जान ले ली। बारिश का असर आम जनजीवन पर भी पड़ा है; झांसी के टहरौली में तो हालात इतने खराब हो गए कि श्मशान घाट पर टीन शेड न होने के कारण लोगों को तिरपाल तानकर एक शव का अंतिम संस्कार करना पड़ा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मेरठ समेत 40 शहरों में मौसम का मिजाज

\r\n\r\n
शुक्रवार की सुबह से ही बहराइच, गोंडा और उसके आसपास के इलाकों में झमाझम बारिश ने दस्तक दी। इससे पहले राजधानी लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, आगरा और बरेली समेत करीब 40 शहरों में घने बादल छाए रहे। इस दौरान चली हल्की ठंडी हवाओं ने लोगों को उमस भरी गर्मी से काफी राहत दिलाई, हालांकि दिन चढ़ने के साथ कुछ जगहों पर धूप भी खिली। वहीं पश्चिमी यूपी के मेरठ में शुक्रवार दोपहर 2 बजे के बाद मौसम ने अचानक करवट ली। मुंडाली और आसपास के क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया, जिससे मौसम सुहावना हो गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मौसम विभाग का अलर्ट: 7 दिन भारी बारिश के आसार

\r\n\r\n
लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने मौसम में आए इस अचानक बदलाव का कारण स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) बन गया है, जिसके प्रभाव से पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश का सिलसिला तेज हो गया है। अगले 24 घंटों के भीतर यह मौसमी सिस्टम पश्चिमी यूपी को भी पूरी तरह से कवर कर लेगा। इसके अतिरिक्त, भूमध्य रेखा के पास भी एक नया मौसमी सिस्टम सक्रिय हो रहा है, जो मानसूनी गतिविधियों को और अधिक ताकत देगा। इन दोनों मौसमी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव के कारण मौसम विभाग ने अगले 7 दिनों तक पूरे उत्तर प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश होने का अलर्ट जारी किया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बारिश के आंकड़े: अब तक 82% कम हुई थी बारिश

\r\n\r\n
वर्तमान में हो रही इस भारी बारिश से पहले उत्तर प्रदेश में सूखे जैसे हालात पैदा हो रहे थे। आंकड़ों पर गौर करें तो हालिया दिनों में राज्य में सामान्य 9.4 मिमी बारिश के मुकाबले मात्र 1.7 मिमी बारिश ही दर्ज की गई थी, जो कि सामान्य से 82 प्रतिशत कम थी। इसमें भी पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामान्य से 77 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 92 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई थी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के समग्र आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 16 जुलाई के बीच उत्तर प्रदेश में कुल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश में 27 प्रतिशत की कमी रही है। इस दौरान प्रदेश में सामान्य 229.4 मिमी के मुकाबले केवल 167.2 मिमी बारिश ही हुई थी। हालांकि, अब सक्रिय हुए मानसून और अगले 7 दिनों के अलर्ट के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि बारिश की यह कमी काफी हद तक पूरी हो जाएगी, लेकिन इसके साथ ही बाढ़ और जलभराव का जो नया संकट खड़ा हुआ है, वह शासन-प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें